अमिताभ बच्चन की 'अमर अकबर एंथनी' का बना था फीमेल वर्जन, ये एक्ट्रेसेस थीं लीड रोल में, लेकिन नहीं हो पाई कभी रिलीज
सुधा ने आईकॉनिक फिल्म 'अमर अकबर एंथोनी' को लेकर कुछ ऐसा बताया, जिसे सुनकर आप भी यकीन नहीं कर पाएंगे। जी हां, सुधा ने बताया कि 'अमर अकबर एंथनी' का एक फीमेल वर्जन बना था, जिसमें वो खुद हीरोइन थीं, लेकिन ये फिल्म कभी रिलीज ही नहीं हो पाई थी।

एक्ट्रेस सुधा चंद्रन उन स्टार्स में से हैं, जिन्होंने अपने करियर में टीवी से लेकर फिल्मों तक में खास पहचान बनाई है। शानदार एक्टिंग के साथ-साथ सुधा ने अपने डांस के लिए भी जानी जाती हैं। मशहूर फिल्म मयूरी में जबरदस्त परफॉर्मेंस देने से लेकर एकता कपूर के साथ अपने कोलेबोरेशन की वजह से इंडियन टेलीविजन पर एक जबरदस्त पहचान बनाने तक, चंद्रन ने लगातार खुद को नया रूप दिया है। ऐसे में अब सुधा ने आईकॉनिक फिल्म 'अमर अकबर एंथोनी' को लेकर कुछ ऐसा बताया, जिसे सुनकर आप भी यकीन नहीं कर पाएंगे। जी हां, सुधा ने बताया कि 'अमर अकबर एंथनी' का एक फीमेल वर्जन बना था, जिसमें वो खुद हीरोइन थीं, लेकिन ये फिल्म कभी रिलीज ही नहीं हो पाई थी। आइए जानते हैं कौन सी है वो फिल्म?
क्या था उस फिल्म का नाम?
सुधा चंद्रन ने हाल ही में हॉटरफ्लाई को अपना इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने अपने शुरुआती करियर के एक दिलचस्प हिस्से के बारे में बताया। सुधा ने बताया कि 'अमर अकबर एंथनी' का एक फीमेल वर्जन बना था, जिसका नाम 'सीता सलमा सूजी' था। इस फिल्म को मनमोहन देसाई की 'अमर अकबर एंथनी' का फीमेल लीड रोल वाला अडैप्टेशन माना जा रहा था। हालांकि, ये फिल्म कभी पर्दे पर रिलीज ही नहीं हो पाई।

फिल्म में ये स्टार्स थे लीड रोल में
सुधा चंद्रन ने याद करते हुए कहा, 'मैं एक फिल्म पर काम कर रही थी, यह 'अमर अकबर एंथनी' का फीमेल वर्जन था, जिसका नाम 'सीता सलमा सूजी' था। फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई, लेकिन इसमें मैं, अर्चना पूरन सिंह और मुनमुन सेन ने काम किया था। इसमें जीत उपेंद्र, शेखर सुमन और एस.डी. बनर्जी भी थे, वह बंगाल से थे। उस समय, हमें सच में लगा कि हम 'अमर अकबर एंथनी' को फिर से बना रहे हैं। हम बहुत ईमानदारी से काम कर रहे थे। मेरे हीरो जीत उपेंद्र थे, और डायरेक्टर एक मुस्लिम आदमी थे, जिनका नाम कमर नरवी साहब था।'
ऐसे हुई थी पति से पहली मुलाकात
सुधा ने आगे बताया कि इस अनरिलीज्ड फिल्म की मेकिंग के दौरान उनकी मुलाकात अपने पति रवि डांग से हुई, जो इस प्रोजेक्ट में एसोसिएट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। एक्ट्रेस ने कहा, 'उस फिल्म में, मेरे पति एसोसिएट डायरेक्टर थे। मुझे लगता था कि सभी फ्रस्ट्रेट एक्टर असिस्टेंट डायरेक्टर बन जाते हैं, और एक्टिंग करने की इच्छा हमेशा उनके अंदर रहती है। वह छह फीट लंबे और अच्छे दिखने वाले थे। मैं अक्सर सोचती थी कि वह एक्टर बनने आए होंगे लेकिन सफल नहीं हो पाए, इसलिए अब वह फाइलें लेकर घूम रहे हैं।'
पहली बार में पति का समझा घमंडी
सुधा चंद्रन ने माना कि उनकी पहली बातचीत अच्छी नहीं थी। उन्होंने कहा, 'मैं उन्हें देखती थी और 'गुड मॉर्निंग' कहती थी, लेकिन उन्होंने कभी जवाब नहीं दिया। मुझे लगा कि एक एसोसिएट डायरेक्टर के हिसाब से वह बहुत घमंडी हैं। एक दिन मैंने उनसे पूछा, 'तुम्हारी क्या प्रॉब्लम है? क्या तुम अपनी गर्लफ्रेंड से लड़कर यहां आ रहे हो?' उन्होंने कहा, 'मैं तुम्हारा मतलब ठीक से समझ नहीं पाया।' तो मैंने उनसे पूछा कि वह मेरे गुड मॉर्निंग विश का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैडम, मुझे गुड मॉर्निंग कहने के पैसे नहीं मिल रहे हैं। मुझे काम करने के पैसे मिल रहे हैं, और मैं अपने प्रोड्यूसर के लिए काम कर रहा हूं।' उस जवाब ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी। 'यह सुनकर, मुझे एहसास हुआ कि इस आदमी में दम है।'
मां को मनाना नहीं था आसान
इसके बाद धीरे-धीरे जैसे-जैसे वे करीब आए, उन्होंने शादी के बारे में सोचना शुरू कर दिया। हालांकि, उसके माता-पिता को मनाना आसान नहीं था। एक्ट्रेस ने बताया, 'मेरी मां ने कहा कि उन्हें इंडस्ट्री से कोई नहीं चाहिए। फिर मैंने अपने पिता से बात की और उनसे कहा कि अगर मैं शादी कर रही हूं, तो मैं इस आदमी से शादी करना चाहती हूं। मेरी मां ने मुझसे कहा, 'सुधा, मैं रवि को नहीं जानता, लेकिन मैं तुम्हें जानती हूं। मेरी बेटी कभी गलत नहीं हो सकती। अगर तुमने उसे चुना है, तो उसमें जरूर कुछ तो बात होगी।'
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