dhadkan song dulhe ka sehra recording day kissa, nusrat fateh ali khan not able to sing this line दूल्हे का सेहरा…जानिए किसने लिखा था ये रुलाने वाला गाना, एक लाइन नहीं गा पा रहे थे नुसरत साहब, Bollywood Hindi News - Hindustan
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दूल्हे का सेहरा…जानिए किसने लिखा था ये रुलाने वाला गाना, एक लाइन नहीं गा पा रहे थे नुसरत साहब

फिल्म धड़कन के गाने दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है रिकॉर्डिंग के दौरान कुछ ऐसा था स्टूडियो का माहौल। इस गीतकार की लिखी एक लाइन को गा नहीं पा रहे थे नुसरत फतेह अली खान। फीमेल वर्जन भी है अवेलेबल।

Wed, 15 April 2026 02:37 PMUsha Shrivas लाइव हिन्दुस्तान
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दूल्हे का सेहरा…जानिए किसने लिखा था ये रुलाने वाला गाना, एक लाइन नहीं गा पा रहे थे नुसरत साहब

साल 2000 में सकही कुमार, सुनील शेट्टी और शिल्पा शेट्टी की फिल्म रिलीज हुई थी धड़कन। इस फिल्म की कहानी ने छाप छोड़ दी थी। देव, अंजलि और राम की ट्रायंगल लव स्टोरी ने उस एरा को खास बना दिया था। एक्टर्स ने अपनी परफॉरमेंस से खूब तारीफें बटोरी। लेकिन सबसे ज्यादा कमाल इस फिल्म के शानदार म्यूजिक ने किया। नदीम-श्रवण ने इस फिल्म के सभी गाने 3 साल के लंबे समय में तैयार किए। लेकिन एक गाने ने खास जगह बनाई। इस फिल्म का गाना ‘दूल्हे का सेहरा’ आज भी शादियों में बजने वाला सबसे बेस्ट गाना माना जाता है। लेकिन आप जानते हैं ये गाना कैसे बना था?

गाने की अलग कहानी है

नदीम-श्रवण की जोड़ी ने फिल्म धड़कन में कुल 5 गाने रखे थे। दो गानों को रिपीट किया गया था। लेकिन शानदार गानों की लिस्ट में ‘दूल्हे का सेहरा’ ऑडियंस का फेवरेट बन गया। इस फिल्म के सभी गाने समीर अनजान ने लिखे थे। और उनका खुद का जुड़ाव भी ‘दूल्हे का सेहरा’ गाने से ही है। इस गाने को रिकॉर्ड किए जाने की एक अलग कहानी है।

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गाने के बोल सुनते ही मान गए नुसरत फतेह अली खान

समीर अनजान ने बताया था कि म्यूजिक कंपोजर नदीम नुसरत फतेह अली खान के बड़े मुरीद थे। उन्होंने ‘दूल्हे का सेहरा’ के लिरिक्स सुनने के बाद खान साहब को फोन लगाया और उनसे एक गाना गाने की रिक्वेस्ट की। समीर ने कहा कि नुसरत फतेह अली खान ने कहा था कि अगर गाने में दम लगा तो वो जरूर गाएंगे। नदीम ने उन्हें अपनी बनाई धुनों के साथ गाने की जानकारी दी और वो तुरंत मान गए।

150 बार हुआ रिटेक

जिस दिन ये गाना रिकॉर्ड होना था उस दिन रिकॉर्डिंग स्टूडियो को महफ़िल की तरह सजाया गया। क्योंकि नुसरत फतेह अली खान इस गाने को महसूस कर, जमीन पर बैठकर गाने वाले थे। गाने का पहला हिस्सा रिकॉर्ड हो चुका था। लेकिन जैसे ही वो लाइन आई ‘मैं तेरे बाहों के झूले में पली बाबुल’। इस बाबुल शब्द को बोलते ही नुसरत फतेह अली खान रो पड़ते थे। उन्हें अपनी बेटियों से बहुत लगाव था और गाने के दौरान वो उन्हें याद कर रो पड़ते थे। इस लाइन को गाने के लिए उन्होंने 150 रिटेक लिए। बाद में जब नदीम को लगा कि ये आज ये गाना नहीं हो पाएगा, तो उन्होंने नुसरत फतेह अली खान से कल गाने की बात कही। लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने कंपोजर से कहा था कि ये गाना इसी बुखार में निकलेगा’। इसके बाद जो कमाल हुआ वो दुनिया जानती है। इस गाने का एक फीमेल वर्जन भी है जिसे जसपिंदर नरूला ने गाया है।

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उस साल फिल्म धड़कन की 45 लाख यूनिट बेची गई थीं। फिल्म का साउंड ट्रैक उस साल का दूसरा सबसे पॉपुलर ट्रैक बना। नंबर 1 पर शाहरुख खान की फिल्म मोहब्बें के गाने थे।

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