2024 में स्टैंडिंग ओपनर, 2026 में टीम में जगह नहीं, फिर भी जिंदा हैं उम्मीदें; वर्ल्ड कप जीतना चाहते हैं यशस्वी जायसवाल
2024 में टी-20 विश्व कप टीम का हिस्सा रहने वाले यशस्वी जायसवाल को 2026 के विश्व के लिए चयनित नहीं किया गया और अब टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे वक्त में जायसवाल का इंटरव्यू सामने आया है जिसमें उन्होंने देश के लिए वर्ल्ड कप जीतने को अपना सपना बताया है।

भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए सितारे यशस्वी जायसवाल उन खिलाड़ियों में से हैं जो तीनों फॉर्मेट में खेलने की प्रतिभा रखते हैं। हालांकि, वर्तमान में उन्होंने सिर्फ टेस्ट क्रिकेट में ही मौके मिल रहे हैं। वनडे में रोहित शर्मा के होने के कारण उन्हें बतौर सलामी बल्लेबाज मौका नहीं दिया जा रहा, जबकि टी-20 में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी उन्हें विश्व कप के लिए चयनित नहीं किया गया। प्रतिभा होने के बाद भी चयनकर्ताओं द्वारा लगातार नजरअंदाज होने का मलाल तो यशस्वी जायसवाल में भी होगा। उनका दर्द और भविष्य की योजना एक इंटरव्यू में साफ सामने आई है।
हाल ही में यशस्वी जायसवाल ने केविन पीटरसन को उनके यूट्यूब चैनल के लिए इंटरव्यू दिया जिसमें अपनी भविष्य की योजनाओं और सपनों को लेकर बातें कहीं। जायसवाल ने अपनी मंशा जाहिर करते हुए कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य टीम इंडिया के लिए विश्व कप की ट्रॉफी उठाना है। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, "मेरा सपना अपने देश के लिए विश्व कप जीतना है। चाहे वह 50 ओवर का प्रारूप हो या टी-20, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं बस एक विश्व कप उठाना चाहता हूं।" जायसवाल का मानना है कि जब भी वे मैदान पर उतरते हैं, तो उनका उद्देश्य केवल अपनी टीम और राष्ट्र के लिए जीत हासिल करना होता है।
बता दें कि जायसवाल आज जो भी हैं उनकी यह सफलता रातों-रात नहीं आई है। इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके बचपन का संघर्ष आज भी उन्हें प्रेरित करता है। जायसवाल ने बताया कि एक समय था जब वे तंबू में रहते थे और गुजारे के लिए पानीपुरी बेचते थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। जायसवाल ने साझा किया कि वे सोते समय भी भारत के लिए खेलने की कल्पना करते थे। उन्होंने कहा, "जब मैं छोटा था तब परिस्थितियां कठिन थीं, लेकिन मैं विजुअलाइज करता था कि किसी दिन मैं भारत के लिए खेलूंगा।" उनके पिता और महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर उनके सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत रहे हैं। सचिन ने उन्हें सलाह दी थी कि बस गेंद को ध्यान से देखते रहो, वह खुद बताएगी कि आगे क्या करना है।
जायसवाल ने अपनी मानसिक स्थिति के बारे में भी बात की। मैदान पर जायसवाल की मानसिकता बहुत ही सकारात्मक रहती है। वे दबाव को एक बोझ के रूप में नहीं, बल्कि एक सुनहरे अवसर के रूप में देखते हैं। उन्होंने अपनी सोच साझा करते हुए कहा, "मैं दबाव को एक अवसर के रूप में देखता हूं क्योंकि इसी के लिए मैं हर दिन मेहनत करता हूं। मैं बस वहां जाकर खेल का आनंद लेना चाहता हूं।" जायसवाल कठिन पिचों पर बल्लेबाजी करना पसंद करते हैं क्योंकि इससे उन्हें गर्व महसूस होता है। वे चाहते हैं कि मुश्किल समय में टीम उन पर भरोसा कर सके और वे एक ऐसे खिलाड़ी बनें जो मैच का रुख बदल सके।
23 साल की कम उम्र में यशस्वी जायसवाल ने टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक और आईपीएल में सबसे तेज अर्धशतक जैसे कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। हालांकि, इन व्यक्तिगत रिकॉर्डों से ज्यादा उनके लिए टीम की जीत और तिरंगे का सम्मान मायने रखता है। जायसवाल ने कहा कि वे अपनी टीम के लिए 'मैच विनर' बनना चाहते हैं और यही सपना उन्हें हर दिन सुधार करने और लड़ने की शक्ति देता है।





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