…तो इस बार भी विश्व कप जीतेगा भारत? हैरान कर रहे 2007 के ये तीन संयोग
संयोग और आंकड़े सब ऐसे लग रहे हैं जैसे 2007 का विश्व कप रिक्रिएट हो रहा है। लेकिन अब सूर्या ब्रिगेड के सामने यह चुनौती है कि क्या वह माही सेना की तरह दृढ़ संकल्पित होकर बिना कोई बाहरी दबाव लिए पूरे फोकस के साथ खेल पाएंगे और विश्व कप का खिताब एक बार फिर अपने नाम कर पाएंगे।

टी-20 विश्व कप 2026 में भारत रविवार को सुपर-8 का अपना पहला मुकाबला दक्षिण अफ्रीका के हाथों 76 रनों से बुरी तरह हारा। इसके बाद टीम इंडिया विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचेगी या नहीं, ऐसी चर्चाएं तेज हो गईं। भारत की एक हार ने देश- विदेश के तमाम क्रिकेट समर्थकों को अब निराश कर दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई यह स्थिति इतनी चिंताजनक है।
भारत अभी पूरी तरह से टी-20 विश्व कप में सेमीफाइनल की रेस से बाहर नहीं हुआ है। बस उसे अपने दोनों मुकाबले या तो बड़े अंतर से जीतने हैं या सिर्फ जीतने हैं और यह उम्मीद करनी है कि गुरुवार को खेले जाने वाले दोपहर के मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका वेस्टइंडीज को हरा दे। फिलहाल, भारत के पास सेमीफाइन में पहुंचने या ना पहुंचने के तमाम सेनेरियो हैं, लेकिन कुछ संयोंग ऐसे हैं जो भारत को विश्व कप जिताने की उम्मीद देते हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी कि टी-20 विश्व कप में 3 संयोग ऐसे बन चुके हैं जो 2007 के टी-20 विश्व कप में भी हए थे और भारत ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में खिताब अपने नाम किया था। टी-20 विश्व कप 2007 के तीन घटनाक्रम पूरी तरह से 2026 के विश्व कप से मेल खाते हैं और सोशल मीडिया पर फैंस इस बात से काफी खुश भी हैं।
जिस तरह इस विश्व कप के इस संस्करण में जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को ग्रुप स्टेज में हराया है ठीक इसी तरह 2007 के विश्व कप में भी कंगारू टीम को रौंदा था। भारतीय टीम ने जिस तरह से इस विश्व कप में पाकिस्तान को ग्रुप स्टेज में पटखनी दी है 2007 के वर्ल्ड कप में भी मैच टाई होने के बाद बॉल आउट के माध्यम से इसी तरह हराया था। इतना ही नहीं, 2007 के विश्व कप में भी भारतीय टीम अपने सुपर -8 के पहले मुकाबले में इस बार की तरह ही हार गई थी। उसे तब न्यूजीलैंड के हाथों 10 रनों से शिकस्त झेलनी पड़ी थी और इस विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका ने हराया है।
2007 के विश्व कप में सुपर-8 का पहला मुकाबला हारने के बाद भारतीय टीम के सामने लगभग ऐसी ही परिस्थितियां थीं, जैसी इस विश्व कप में है। भारत को अपने अगले दो मैच इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों के साथ खेलने थे और सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए दोनों मुकाबलों को हर हाल में जीतना जरूरी था। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में युवा भारतीय टीम ने ठीक ऐसा ही किया। सुपर-8 के अपने दूसरे मुकाबले में उन्होंने इग्लैंड को 18 रनों से पटखनी दी। इसके बाद अगले मैच में दक्षिण अफ्रीका को 37 रनों से हराया और चार अंकों के साथ अपने ग्रुप के न्यूजीलैंड को साथ लेकर सेमीफाइनल में पहुंचा।
यंग माही आर्मी के सामने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के धुरंधर थे। लेकिन तब भी टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में पहले ऑस्ट्रेलिया को 15 रनों से रौंदा और उसके बाद न्यूजीलैंड से सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में पहुंची पाकिस्तान को 5 रनों से हराकर विश्व कप का खिताब अपने नाम किया और इतिहास रच दिया।
वर्तमान भारतीय टीम के सामने भी ठीक ऐसी ही स्थिति है। सुपर-8 का पहला मुकाबला हारने के बाद सूर्या ब्रिगेड के पास माही की तरह इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका को फेस नहीं करना है, बल्कि जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज जैसी टीमों को हराना और सेमीफाइनल में जगह पक्की करनी है। इंग्लैंड की टीम पहले ही सेमीफाइनल में जगह पक्की कर चुकी है। ग्रुप-2 से न्यूजीलैंड के सेमीफाइनल में जाने की संभावना ज्यादा है। ऐसे में भारत का सामना सेमीफाइनल में इन्हीं दो टीमों में से किसी एक से होगा और अंत में फाइनल की चुनौती होगी।
संयोग और आंकड़े सब ऐसे लग रहे हैं जैसे 2007 का विश्व कप रिक्रिएट हो रहा है। लेकिन अब सूर्या ब्रिगेड के सामने यह चुनौती है कि क्या वह माही सेना की तरह दृढ़ संकल्पित होकर बिना कोई बाहरी दबाव लिए पूरे फोकस के साथ खेल पाएंगे और विश्व कप का खिताब एक बार फिर अपने नाम कर पाएंगे।
2007 और 2026 विश्व कप के तीन अद्भुत संयोग
जिम्बाब्वे ने ग्रुप स्टेज में ऑस्ट्रेलिया को हराया
भारत ने ग्रुप स्टेज में पाकिस्तान को हराया
भारत सुपर-8 का अपना पहला मुकबला हार गया
इन तीन घटनाओं के बाद 2007 में बने विश्व चैंपियन। क्या 2026 में खुद को दोहराएगा इतिहास?





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