ind vs eng 2nd semi final t20 world cup 2026 India have a golden opportunity to avenge a 39 year-old defeat against Eng वानखेड़े में भारत के पास इंग्लैंड से 39 साल पुराना बदला लेने का सुनहरा मौका, लेकिन आंकड़े कर रहे निराश, Cricket Hindi News - Hindustan

वानखेड़े में भारत के पास इंग्लैंड से 39 साल पुराना बदला लेने का सुनहरा मौका, लेकिन आंकड़े कर रहे निराश

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में भारत और इंग्लैंड की टीमें मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में आमने-सामने हैं। यह मुकाबला केवल फाइनल में पहुंचने की जंग नहीं है, बल्कि भारतीय टीम के पास इसी मैदान पर इंग्लैंड से 39 साल पुराना हिसाब चुकता करने का एक शानदार मौका भी है।

Thu, 5 March 2026 06:09 PMVimlesh Kumar Bhurtiya लाइव हिन्दुस्तान
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वानखेड़े में भारत के पास इंग्लैंड से 39 साल पुराना बदला लेने का सुनहरा मौका, लेकिन आंकड़े कर रहे निराश

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में भारत और इंग्लैंड की टीमें मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में आमने-सामने हैं। यह मुकाबला केवल फाइनल में पहुंचने की जंग नहीं है, बल्कि भारतीय टीम के पास इसी मैदान पर इंग्लैंड से 39 साल पुराना हिसाब चुकता करने का एक शानदार मौका भी है। साल 1987 के बाद पहली बार ये दोनों टीमें वानखेड़े में किसी वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में टकरा रही हैं। इतिहास गवाह है कि यह मैदान भारतीय टीम के लिए आईसीसी नॉकआउट मुकाबलों में बहुत ज्यादा सुखद नहीं रहा है, लेकिन घरेलू परिस्थितियों और प्रशंसकों के जबरदस्त समर्थन के चलते इस बार टीम इंडिया से हिसाब चुकता करने और फाइनल में प्रवेश करने की उम्मीद की जा रही है।

यदि इतिहास के पन्नों को पलटें, तो 1987 के वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल की यादें आज भी भारतीय प्रशंसकों को चुभती हैं। उस मैच में इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज ग्राहम गूच ने 115 रनों की शानदार पारी खेली थी, जिसकी मदद से इंग्लैंड ने 254 रन बनाए थे। जवाब में मोहम्मद अजहरुद्दीन के 64 रनों के बावजूद पूरी भारतीय टीम महज 219 रनों पर ढेर हो गई थी और टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी। आंकड़ों की बात करें तो वानखेड़े में भारत ने अब तक खेले तीन आईसीसी नॉकआउट मैचों में से दो गंवाए हैं, जिसमें 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली जीत ही एकमात्र सुखद अपवाद रही है। ऐसे में सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय टीम पर इस बार इतिहास को बदलने का दबाव और मौका एक साथ है।

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वर्तमान टूर्नामेंट में भारतीय टीम के प्रदर्शन का विश्लेषण करें, तो टीम इंडिया अब तक एक टीम यूनिट के बजाय इंडिविजुअल परफॉर्मेंसेस के दम पर यहां तक पहुंची है। अलग-अलग मैचों में अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, हार्दिक पांड्या और शिवम दुबे जैसे खिलाड़ियों ने अपनी चमक दिखाई है, लेकिन टीम का एकजुट प्रदर्शन जिम्बाब्वे वाले मैच को छोड़ दिया जाए तो अभी भी उस स्तर का नहीं रहा है जिसकी उम्मीद की जाती है। टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय उनकी खराब फील्डिंग रही है, जहां टूर्नामेंट के दौरान कई आसान कैच छोड़े गए हैं। इसके अलावा, सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और गेंदबाज वरुण चक्रवर्ती की फॉर्म में निरंतरता की कमी और कप्तान सूर्या का पहले मैच के बाद लय से भटकना भी भारत के लिए चुनौती बना हुआ है।

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हालांकि, इन चुनौतियों के बीच भारत के पास घरेलू परिस्थितियों का फायदा है। टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी जैसे सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे वानखेड़े को अपना घर मानते हैं, क्योंकि वे यहां मुंबई या आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए लंबे समय से खेल रहे हैं। आंकड़ों के लिहाज से भी इंग्लैंड के खिलाफ भारत का पलड़ा भारी है। टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत का इंग्लैंड पर 17-12 का रिकॉर्ड है और घरेलू जमीन पर यह बढ़त 10-6 की हो जाती है। अब देखना यह है कि क्या जसप्रीत बुमराह की घातक गेंदबाजी और भारतीय बल्लेबाजी की गहराई इंग्लैंड की चुनौती को पार कर 8 मार्च को अहमदाबाद में होने वाले फाइनल का टिकट कटा पाएगी या 1987 की कहानी रिपीट होगी।

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