Armed Naxals wiped out in Chhattisgarh by deadline, says Chhattisgarh Deputy CM Vijay Sharma छत्तीसगढ़ में तय डेडलाइन पर नक्सलवाद का अंत; अब बस्तर का विकास प्राथमिकता: डिप्टी CM विजय शर्मा, Chhattisgarh Hindi News - Hindustan
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छत्तीसगढ़ में तय डेडलाइन पर नक्सलवाद का अंत; अब बस्तर का विकास प्राथमिकता: डिप्टी CM विजय शर्मा

Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य में हथियारबंद नक्सली कैडर ‘पूरी तरह से समाप्त’ हो गया है और अब मुख्य चुनौती पर्यावरण तथा आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के साथ बस्तर का विकास है।

Tue, 31 March 2026 11:13 AMPraveen Sharma रायपुर, भाषा
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छत्तीसगढ़ में तय डेडलाइन पर नक्सलवाद का अंत; अब बस्तर का विकास प्राथमिकता: डिप्टी CM विजय शर्मा

Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य में हथियारबंद नक्सली कैडर ‘पूरी तरह से समाप्त’ हो गया है और अब मुख्य चुनौती पर्यावरण तथा आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के साथ बस्तर का विकास है। शर्मा ने यह भी कहा कि दो वर्ष पहले नक्सलवाद को खत्म करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करना, तकनीक आधारित खुफिया तंत्र और सुरक्षा बलों द्वारा सटीक अभियान ने इस दिशा में अहम भूमिका निभाई। गृह विभाग भी संभाल रहे शर्मा ने सोमवार शाम दिए इंटरव्यू में कहा कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर लिया जाएगा।

शर्मा ने कहा, “हथियारबंद नक्सलवाद से मुक्ति का जो विषय था, वह अब पूरा हो चुका है। छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलियों का पूरा कैडर समाप्त हो गया है। आज जब हम बात कर रहे हैं, तो मेरा मानना है कि जो 15-20 नक्सली शेष हैं, वे भी पुनर्वास की प्रक्रिया में हैं। 31 मार्च 2026 की निर्धारित समयसीमा तक राज्य में नक्सली संगठन का सशस्त्र कैडर पूरी तरह समाप्त हो चुका है।”

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संविधान का शासन बस्तर और राज्य के हर कोने तक पहुंचा

उन्होंने कहा, "आपको बस यह रात गुजारनी है, छत्तीसगढ़ में नक्सली संगठन असल में खत्म हो चुका है।'' इसे पिछले दो वर्षों की "सबसे बड़ी उपलब्धि" बताते हुए शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को इसका श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि इनके प्रयासों से संविधान का शासन बस्तर और राज्य के हर कोने तक पहुंचा है।

उन्होंने कहा, "नक्सल विरोधी अभियान इतने सटीक थे कि सुरक्षा कर्मियों को खरोंच तक नहीं आई, जबकि कई नक्सली मारे गए। पिछले दो वर्षों में हमारी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि नक्सलवाद पर नियंत्रण पाना रही है।"

जनता का भरोसा बनने तक सुरक्षा शिविर जारी रहेंगे

बस्तर में सुरक्षा बलों की तैनाती का जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा कि सुरक्षा शिविर फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि जनता का भरोसा बनने में समय लगता है। उन्होंने कहा कि यह सच है कि पूरा कैडर खत्म हो चुका है, लेकिन लोगों को इसे पूरी तरह स्वीकार करने में समय लगेगा। एहतियाती इंतजाम जारी रहेंगे। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अंदरूनी इलाकों में मौजूद करीब 400 सुरक्षा शिविरों को धीरे-धीरे पुलिस थानों, स्कूलों, अस्पतालों या पंचायत भवनों जैसे आधारभूत ढांचों में बदला जाएगा। शर्मा ने याद दिलाया कि 10 मार्च को विधानसभा के बजट सत्र में उन्होंने कहा था कि बस्तर में तैनात अधिकांश अर्धसैनिक बलों को 31 मार्च 2027 तक वापस बुलाया जा सकता है।

भूपेश बघेल पर साधा निशाना

शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए कहा, "पूर्व मुख्यमंत्री कह रहे थे कि 31 मार्च आ गया है, चलो जश्न मनाते हैं। मैं आपको बता दूं, यह नए साल की शाम नहीं है। आपको यह समझना होगा कि यह एक गंभीर विषय है।''

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बस्तर में अब सबसे बड़ी चुनौती विकास

उन्होंने कहा कि अगर नक्सली नेटवर्क पूरी तरह समाप्त हुआ है, तो यह केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए बड़ी उपलब्धि है। आखिर, एक समय देश में होने वाली 80 प्रतिशत नक्सली गतिविधियां छत्तीसगढ़ में केंद्रित थीं। शर्मा ने कहा कि बस्तर में अब सबसे बड़ी चुनौती विकास की है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी संस्कृति को बचाए रखना और युवाओं के लिए आर्थिक अवसर सृजित करना शामिल है।

क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा

उन्होंने कहा कि लघु वनोपज और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। बस्तर के विकास की रूपरेखा पर उन्होंने कहा कि भले ही कोई तय खाका नहीं है, लेकिन दिशा स्पष्ट है। बस्तर में विकास खासकर राज्य के आदिवासी-बहुल सरगुजा क्षेत्र के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां विकास की गुंजाइश पूरी तरह से खत्म हो जाए। उन्होंने कहा कि विकास एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, चाहे वह बस्तर में हो या सरगुजा में। विकास की कमी और हथियार उठाने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।

बस्तर को बदलने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक-आर्थिक समस्याएं लोगों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित नहीं करतीं। शर्मा ने कहा कि बस्तर को बदलने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं और यहां के युवाओं में अपार प्रतिभा है। उन्होंने कहा, ''हमें बहुत कड़ी मेहनत करनी होगी और बस्तर के विकास के लिए अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है। मेरा विश्वास है कि बस्तर के युवाओं में इतनी जबर्दस्त प्रतिभा है कि अगर 2036 के ओलंपिक खेलों में बस्तर का कोई युवा देश के लिए कोई पदक जीत लाए, तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी।'' उन्होंने कहा, ''इसके अलावा, बस्तर की महिलाएं-हमारी माताएं और बहनें-सही मायने में भविष्य में इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार बनेंगे।''

बस्तर विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगा

शर्मा ने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ये महिलाएं इस क्षेत्र में सफलतापूर्वक बड़े उद्यम स्थापित करेंगी। जैसे-जैसे हम अपने प्रयास जारी रखेंगे, बस्तर विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ता हुआ दिखाई देगा और इसके युवा वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ते हुए नजर आएंगे।'' उन्होंने कहा कि बस्तर की अर्थव्यवस्था का आधार लघु वनोपज होगा और इस दिशा में काम पहले से जारी है। खनन गतिविधियों को लेकर फैल रही अफवाहों पर उन्होंने कहा कि इनमें कोई सच्चाई नहीं है और सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है। तेलंगाना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वहां की सरकार ने भी नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी काम किया है और उसे ‘नरम रवैया’ कहना सही नहीं होगा।

नक्सलियों के खिलाफ मामले वापस क्या बोले विजय

सरेंडर करने वाले नक्सलियों के राजनीति में आने के सवाल पर शर्मा ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की स्वतंत्रता देता है, बशर्ते वे हिंसा का रास्ता छोड़ दें। इस सवाल पर कि क्या सरेंडर करने वाले नक्सलियों के खिलाफ मामले वापस लिए जाएंगे, उन्होंने कहा, ''यह एक राष्ट्रीय स्तर का नीतिगत निर्णय है। हमें इन सभी पहलुओं पर विचार करना होगा, क्योंकि उन्होंने सरेंडर कर दिया है, अपने हथियार डाल दिए हैं और मुख्यधारा में लौट आए हैं। कोई भी निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर ही लिया जाना चाहिए।''

उन्होंने कहा कि राज्य की औद्योगिक नीति में उन कंपनियों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान है जो पुनर्वासित नक्सलियों को रोजगार देती हैं, और सरकार ऐसे लोगों की सूची उद्योगों के साथ साझा कर सकती है।

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