Chhattisgarh Naxalism End Former DGP DM Awasthi Backs Government March 31 Deadline जब रायपुर तक पहुंच गया था नक्सलवाद का डर, छत्तीसगढ़ पूर्व DGP ने याद दिलाए पुराने दिन; 31 मार्च की डेडलाइन पर क्या बोले?, Raipur Hindi News - Hindustan
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जब रायपुर तक पहुंच गया था नक्सलवाद का डर, छत्तीसगढ़ पूर्व DGP ने याद दिलाए पुराने दिन; 31 मार्च की डेडलाइन पर क्या बोले?

पूर्व डीजीपी अवस्थी ने कहा  है कि डेडलाइन सुरक्षाबलों को प्रेरित करती है और एक लक्ष्य देती है और यह होम मिनिस्टर की 'दृढ़ इच्छाशक्ति' को भी दिखाता है। इसी का असर है कि आज हम नक्सलवाद को विलुप्त होने की कगार पर देख रहे हैं।

Mon, 30 March 2026 04:46 PMMohit एएनआई, रायपुर
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जब रायपुर तक पहुंच गया था नक्सलवाद का डर, छत्तीसगढ़ पूर्व DGP ने याद दिलाए पुराने दिन; 31 मार्च की डेडलाइन पर क्या बोले?

छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक (डीजीपी) डीएम अवस्थी ने छत्तीसगढ़ में 31 मार्च तक नक्सलवाद को खत्म करने की डेडलाइन पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी सरकार की नक्सलवाद के खात्मे की पहल से कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद मिली है। पीएम मोदी और अमित शाह द्वारा नक्सलवाद के खात्मे की 31 मार्च की डेडलाइन पर उन्होंने कहा कि यह सरकार की यह ‘दृढ़ इच्छाशक्ति’ को दर्शाता है और सुरक्षा बलों को प्रेरित करता है।

न्यूज एजेंसी एनआई से बातचीत में अवस्थी ने कहा ‘डेडलाइन सुरक्षाबलों को प्रेरित करती है और एक लक्ष्य देती है और यह होम मिनिस्टर की ’दृढ़ इच्छाशक्ति' को भी दिखाता है। इसी का असर है कि आज हम नक्सलवाद को विलुप्त होने की कगार पर देख रहे हैं। बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित इलाके अब सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं।'

'1990 के दशक का वह बस्तर लौटेगा'

1990 के दशक के बस्तर की संस्कृति, जीवन और पर्यावरण को याद करते हुए उन्होंने सरकार की इस पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के 'एक बार फिर फूलों और रोशनी से खिलने' की उम्मीद जताई। उन्होंने बताया, ‘मैंने फरवरी 1989 में बस्तर देखा था। तब यह बहुत सुंदर था। बीजापुर और दंतेवाड़ा में लोग शांति से रहते थे। बाजार लगते थे और गोलपल्ली से जगदलपुर तक राज्य परिवहन की बसें चलती थीं। मैंने खुद उनमें यात्रा की है। सड़कें थीं और बस्तर एक खूबसूरत घाटी थी। उन्होंने सब कुछ बर्बाद कर दिया। सड़कें तोड़ दीं, स्कूल गिरा दिए और अस्पतालों को नुकसान पहुंचाया। मुझे उम्मीद है कि 1990 के दशक का वह बस्तर लौटेगा, जब हम साबरी नदी के तट पर कोंटा में घूमा करते थे। झीरम घाटी फूलों की इतनी सुंदर घाटी थी, मैंने इसे अपनी आंखों से देखा था। मुझे उम्मीद है कि 31 मार्च के बाद, अगले एक या दो साल में, बस्तर एक बार फिर फूलों और रोशनी से जगमगा उठेगा।’

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इसके अलावा, बीजेपी सरकार से पहले नक्सलवाद को लेकर पूर्व डीजीपी ने कहा कि एक वक्त ऐसा भी था जब ऐसा डर था कि नक्सलवाद राजधानी तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सुरक्षा बलों को मजबूत किया गया है, जिससे राज्य में नक्सलवाद में धीरे-धीरे गिरावट आई है।

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'10 साल में हालात पूरी तरह बदल गए हैं'

अवस्थी ने कहा कि ‘एक समय ऐसा भी था जब लगता था कि सुरक्षा बल देश में नक्सलवाद को कभी नहीं हरा पाएंगे। तब एमसीसी और सीपीआई ने मिलकर सीपीआई-माओवादी का गठन किया। एक समय ऐसा भी आया जब लोग कहने लगे कि नक्सलवादी रायपुर तक पहुंच गए हैं। लेकिन इन 10 साल में हालात पूरी तरह बदल गए हैं। सुरक्षा बलों द्वारा किए गए बलिदान और झेले नुकसान की भरपाई करना असंभव है। बस इतना ही है कि उनके बलिदान का फल मिला है, और अब नक्सलवाद और आतंकवाद का अंत हो रहा है।’

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'बंदूक उठाने वाला रास्ता एक गंभीर खतरा था'

उन्होंने कहा 'नक्सलियों द्वारा आईईडी धमाकों, विस्फोटों और घात लगाकर किए गए हमलों से जो आतंक का माहौल बनाया गया था, वह अब खत्म हो रहा है, लेकिन विचारधारा अभी भी है। वह विचारधारा शोषितों को न्याय दिलाने के लिए थी। न्याय की लड़ाई जारी रहेगी, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से और वह भी भारतीय संविधान के दायरे में रहकर। बंदूक उठाने वाला रास्ता एक गंभीर खतरा था, और अब वह खत्म हो रहा है।'

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