13 tribal children rescued from bonded labour, 8 persons arrested in Chhattisgarh छत्तीसगढ़ में पुलिस ने मानव तस्करों से छुड़ाए 13 बैगा बच्चे, 1 से 2 हजार रुपए महीना देकर करा रहे थे बंधुआ मजदूरी, Chhattisgarh Hindi News - Hindustan
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छत्तीसगढ़ में पुलिस ने मानव तस्करों से छुड़ाए 13 बैगा बच्चे, 1 से 2 हजार रुपए महीना देकर करा रहे थे बंधुआ मजदूरी

पुलिस ने बताया कि इस मामले में भोरमदेव पुलिस स्टेशन में मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी और किशोर न्याय अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच चल रही है।

Thu, 7 May 2026 04:32 PMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, रायपुर, छत्तीसगढ़
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छत्तीसगढ़ में पुलिस ने मानव तस्करों से छुड़ाए 13 बैगा बच्चे, 1 से 2 हजार रुपए महीना देकर करा रहे थे बंधुआ मजदूरी

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए संरक्षित बैगा जनजाति के 13 बच्चों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया। पुलिस ने बताया कि बुधवार को चलाए गए इस बचाव अभियान के दौरान आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें दो कथित मानव तस्कर और छह मालिक शामिल हैं। इस दौरान पुलिस ने 8 से 15 साल की उम्र के बच्चों को उनके चंगुल से मुक्त कराया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इन बच्चों से सुबह 6 से 9 बजे तक और फिर दोपहर 12 से शाम 7 बजे तक कड़ी मेहनत कराई जाती थी। बदले में बच्चों को कोई वेतन नहीं मिलता था, जबकि उनके माता-पिता को केवल 1 हजार से 2 हजार रुपए महीना दिए जाते थे। बैगा जनजाति मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और इससे लगे मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में निवास करने वाली एक अत्यंत पिछड़ी (PVTG) आदिम जनजाति समूह है।

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8 में से 7 आरोपियों की पहचान आई सामने

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से सात की पहचान रवि यादव, रामू यादव, बधी यादव, कन्हैया यादव, रामफल यादव, राम बिहारी यादव और रूपेश यादव के रूप में हुई है। उधर कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि बैगा समुदाय के ये सभी बच्चे भोरमदेव इलाके के थुहापानी गांव के रहने वाले हैं और आरोपियों इन नाबालिगों के माता-पिता को पैसों का लालच देकर उन्हें इन बच्चों से काम कराने के लिए राजी किया था। इसके बाद वे उन्हें जिले के कई गांवों में जबरदस्ती मजदूरी कराने के लिए लेकर गए थे।

बच्चों के मां-बाप को पैसों का लालच देकर तैयार किया

बचाए गए बच्चों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बताया कि आरोपियों में से एक रवि यादव छह से सात महीने पहले उनके माता-पिता के पास आया था और उसने उन्हें पैसों का लालच देकर बच्चों से काम करने के लिए मना लिया। इसके बाद उन बच्चों को अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया, जहां उनसे मवेशी चराने और जानवरों की देखभाल करने का काम करवाया गया।

अधिकारी ने बताया कि बच्चे हर दिन सुबह 6 बजे से 9 बजे तक और फिर दोपहर से शाम 7 बजे तक काम करते थे और इसके बदले उनके माता-पिता को कथित तौर पर हर महीने 1,000 से 2,000 रुपए दिए जाते थे, जबकि बच्चों को खुद कोई मजदूरी नहीं मिलती थी।

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अलग-अलग गांवों से बचाए गए बच्चे

पुलिस अधीक्षक ने कहा, 'इस बारे में सूचना मिलने का बाद हमने यह अभियान शुरू किया था। जिसके बाद बंधुआ मजदूरी में धकेले गए कुल 13 बच्चों को अलग-अलग गांवों से बचाया गया। इस मामले में एक FIR दर्ज की गई है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो तस्कर और छह मालिक शामिल हैं।'

कई धाराओं के अंतर्गत पुलिस ने दर्ज किया मामला

पुलिस ने बताया कि इस मामले में भोरमदेव पुलिस स्टेशन में मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी और किशोर न्याय अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच चल रही है।

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उधर इस बारे में पुलिस को सूचना देने वाले और बाल संरक्षण के लिए काम करने वाले एक NGO, 'एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन' के अधिकारी मनीष शर्मा ने बताया कि, 'यह बचाव अभियान बताता है कि कैसे तस्करी नेटवर्क बेहद गरीब और हाशिए पर रहने वाले जनजातीय समुदायों को अपना निशाना बना रहे हैं।' उन्होंने NGO द्वारा बाल मजदूरी के बारे में सचेत किए जाने के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई की भी सराहना की।

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