Rylen Anil: कौन हैं 16 वर्षीय रायलन अनिल? जिन्होंने NTA के NEET पोर्टल की खोली पोल
Who is Rylen Anil: दुबई के 16 वर्षीय छात्र रायलन अनिल ने NTA के री-नीट परीक्षा पोर्टल के सुपर एडमिन पेज पर गंभीर सुरक्षा चूक खोजकर CERT-In को अलर्ट किया था।

NEET 2026 Re-exam: मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) को लेकर देश में जारी चर्चाओं के बीच एक महत्वपूर्ण तकनीकी मामला सामने आया। दुबई में रहने वाले 16 वर्षीय भारतीय छात्र और एथिकल हैकर रायलन अनिल ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के परीक्षा पोर्टल पर एक गंभीर तकनीकी खामी को उजागर किया था। रायलन वर्तमान में एक सीबीएसई स्कूल से 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं और स्वतंत्र रूप से साइबर सुरक्षा पर रिसर्च करते हैं।
री-नीट (Re-NEET) परीक्षा पोर्टल में क्या थी गंभीर खामी?
रायलन अनिल के अनुसार, यह घटना 31 मई 2026 की रात की है। उन्होंने बताया कि जब वे एनटीए के री-नीट (Re-NEET) परीक्षा के लिए तैयार किए गए वेब पोर्टल की सुरक्षा जांच कर रहे थे, तब उन्हें इसके बैकएंड आर्किटेक्चर में एक गंभीर सुरक्षा चूक का पता चला।
सुपर एडमिन पेज को किया बाईपास: इस तकनीकी खामी के कारण पोर्टल के मुख्य ‘सुपर एडमिन’ पेज के प्रमाणीकरण स्तर यानी सुपर एडमिन लॉग इन को आसानी से बाईपास किया जा सकता था।
डेटा लीक का बड़ा खतरा: इस चूक की वजह से कोई भी अनधिकृत व्यक्ति री-नीट परीक्षा से जुड़े प्रशासनिक नियंत्रण और लाखों उम्मीदवारों के बेहद संवेदनशील पर्सनल डेटा तक पहुंच हासिल कर सकता था।
CERT-In को भेजी गई अलर्ट रिपोर्ट: स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए रायलन ने उसी रात दुबई के समयानुसार लगभग 9:30 बजे भारत की मुख्य साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In (कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम) को इस लूपहोल के बारे में एक तकनीकी रिपोर्ट भेजकर अलर्ट किया।
NTA की तुरंत कार्रवाई और अधिकारियों का धन्यवाद
रायलन ने बताया कि उनकी रिपोर्ट पर भारतीय अधिकारियों ने बेहद गंभीरता से कदम उठाया। उन्हें एनटीए की ओर से एक आधिकारिक ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल में समय रहते इस गंभीर तकनीकी कमी को सामने लाने के लिए 16 वर्षीय रायलन का आभार व्यक्त किया गया था। इसके साथ ही, सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एनटीए ने प्रभावित री-नीट परीक्षा पोर्टल को तुरंत इंटरनेट से हटाकर बंद कर दिया ताकि उस खामी को पूरी तरह ठीक किया जा सके।
इसके अलावा रायलन ने आईआईटी रुड़की द्वारा संचालित जेईई एडवांस्ड परीक्षा पोर्टल की भी एक तकनीकी खामी की रिपोर्ट अधिकारियों को दी थी, जिसे आईआईटी प्रशासन ने एक ‘क्लाउड मिसकॉन्फिगरेशन’ बताते हुए तुरंत ठीक कर लिया था।
आठवीं कक्षा से है कोडिंग और एथिकल हैकिंग का शौक
जब रायलन से उनकी इस विशेषज्ञता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें आठवीं कक्षा से ही कंप्यूटर कोडिंग और लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम में गहरी रुचि थी। उन्होंने किसी पेशेवर संस्थान के बजाय ऑनलाइन साइबर सुरक्षा गेम्स (CTFs) और बग बाउंटी कार्यक्रमों के माध्यम से खुद ही एथिकल हैकिंग को सीखा।
वह भविष्य में एक चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर (CISO) बनना चाहते हैं। उनका मानना है कि भारत के उच्च-स्तरीय राष्ट्रीय परीक्षा पोर्टल्स की डेटा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से मजबूत साइबर और पेनेट्रेशन ऑडिट किए जाने बेहद आवश्यक हैं।




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