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न IIT, न IIM, न बड़ी डिग्री; बीच में छोड़ दिया कॉलेज, आज हैं अरबों की दौलत के मालिक

डीमार्ट कंपनी के मालिक राधाकिशन दमानी ने कॉमर्स की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी लेकिन सीखने की ललक और अनुशासन के दम पर डीमार्ट खड़ा कर भारत के सबसे सफल उद्योगपतियों में जगह बनाई।

Mon, 8 June 2026 03:50 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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न IIT, न IIM, न बड़ी डिग्री; बीच में छोड़ दिया कॉलेज, आज हैं अरबों की दौलत के मालिक

कई छात्र और युवा यह मान लेते हैं कि अच्छी नौकरी या बड़ी सफलता के लिए केवल बड़ी डिग्री ही रास्ता है। लेकिन भारत के सबसे सफल कारोबारियों में गिने जाने वाले राधाकिशन दमानी की कहानी इस सोच को चुनौती देती है। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की, फिर भी आज उनका नाम देश के सबसे प्रभावशाली निवेशकों और उद्यमियों में लिया जाता है। राधाकिशन दमानी का बचपन मुंबई के एक साधारण परिवार में बीता। उन्होंने कॉमर्स विषय में कॉलेज में दाखिला लिया था लेकिन पहले साल के बाद पढ़ाई छोड़ दी। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही युवा आगे चलकर भारतीय रिटेल सेक्टर की सबसे सफल कंपनियों में से एक की नींव रखेगा। कैसा रहा है राधाकिशन दमानी का करियर? आइए जानते हैं।

कॉलेज छोड़ने के बाद दमानी ने पारंपरिक नौकरी का रास्ता नहीं चुना। शुरुआती दिनों में उन्होंने बॉल बेयरिंग के कारोबार में हाथ आजमाया। बाद में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें शेयर बाजार की दुनिया में प्रवेश करना पड़ा। यहीं से उनकी वास्तविक सीख शुरू हुई। उन्होंने बाजार को समझा, निवेश के सिद्धांत सीखे और वर्षों तक धैर्य के साथ अनुभव जुटाया। शेयर बाजार में शुरुआती दौर आसान नहीं था। कई बार जोखिम उठाने पड़े और गलतियां भी हुईं। लेकिन दमानी ने हर अनुभव को सीख में बदला। उन्होंने यह समझा कि लंबी अवधि की सोच और अनुशासन ही स्थायी सफलता की कुंजी है। यही सोच बाद में उनके कारोबारी मॉडल की सबसे बड़ी ताकत बनी।

45 साल की उम्र में शुरू किया नया सपना

जहां कई लोग 40 की उम्र के बाद नया करियर शुरू करने से डरते हैं, वहीं दमानी ने करीब 45 वर्ष की आयु में रिटेल कारोबार में उतरने का फैसला किया। पहले उन्होंने बाजार को समझा, ग्राहकों की जरूरतों का अध्ययन किया और फिर 2002 में डीमार्ट की शुरुआत की। धीरे धीरे यह ब्रांड देशभर में फैल गया और आज सैकड़ों स्टोर्स के साथ भारतीय रिटेल सेक्टर की बड़ी ताकत बन चुका है।

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हालांकि, ये ध्यान में रखना जरूरी है कि राधाकिशन दमानी की कहानी यह नहीं कहती कि पढ़ाई जरूरी नहीं है। बल्कि यह सिखाती है कि सीखना कभी बंद नहीं होना चाहिए। कॉलेज की डिग्री महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन जिज्ञासा, अनुशासन, धैर्य और लगातार खुद को बेहतर बनाने की इच्छा उससे भी अधिक मायने रखती है। दमानी ने औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं की लेकिन जीवनभर सीखने की आदत ने उन्हें भारत के सबसे सफल उद्योगपतियों में शामिल कर दिया।

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सीखने की क्षमता बड़ी होनी चाहिए

आज जब लाखों छात्र परीक्षा परिणाम, कॉलेज प्रवेश और करियर विकल्पों को लेकर चिंतित रहते हैं, तब राधाकिशन दमानी का सफर याद दिलाता है कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होती। सीखने की क्षमता, सही निर्णय लेने का साहस और लंबे समय तक मेहनत करने का धैर्य किसी भी व्यक्ति को असाधारण सफलता तक पहुंचा सकता है।

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