IIT Student Rejects Rs 70 LPA Dream Job; Tells Ankur Warikoo I Dont Want This Anymore Viral Post: पैसा या पैशन? IITian ने आखिर क्यों ठुकराई ₹70 लाख की नौकरी?, Career Hindi News - Hindustan
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Viral Post: पैसा या पैशन? IITian ने आखिर क्यों ठुकराई ₹70 लाख की नौकरी?

Viral Post: 70 लाख की नौकरी मिली, पर IIT छात्र ने अंकुर वारिकू को लिखा, मुझे ये नहीं चाहिए। दूसरों की उम्मीदों की रेस से थके छात्र की ये कहानी आंखें खोलने वाली है कि मोटी सैलरी हमेशा खुशियां नहीं देती।

Mon, 8 June 2026 02:58 PMPrachi लाइव हिन्दुस्तान
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Viral Post: पैसा या पैशन? IITian ने आखिर क्यों ठुकराई ₹70 लाख की नौकरी?

IIT Graduate Viral Story: देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी (IIT) में दाखिला पाने और वहां से लाखों-करोड़ों का पैकेज हासिल करने का सपना हर इंजीनियरिंग छात्र का होता है। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि कोई छात्र ₹70 लाख सालाना (LPA) का बंपर जॉब ऑफर हाथ में होने के बाद भी उसे ठुकरा दे? जी हां, ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला और बेहद दिलचस्प मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया और छात्रों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। एक IITian ने ₹70 लाख के शानदार पैकेज को केवल इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उसका दिल इस नौकरी के लिए गवाही नहीं दे रहा था। इस छात्र ने पैकेज की इस दौड़ को ठुकराकर मशहूर इन्वेस्टर, लेखक और कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू के सामने जो खुलासा किया, उसने देश के लाखों युवाओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

बचपन से सिर्फ नंबरों की रेस

अंकुर वारिकू ने सोशल मीडिया पर इस छात्र के ईमेल का जिक्र किया। छात्र ने बताया कि वह आईआईटी का फाइनल ईयर का स्टूडेंट है। उसने एक बड़ी कंपनी (MNC) में इंटर्नशिप की और बाद में उसे वहीं से 70 लाख रुपये के पैकेज का परमानेंट जॉब ऑफर (PPO) मिल गया। कागज पर यह एक परफेक्ट लाइफ लग रही थी।

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लेकिन छात्र के मुताबिक, उसका पूरा बचपन सिर्फ अच्छे मार्क्स, कॉम्पिटिशन और दूसरों की उम्मीदों को पूरा करने में बीत गया। स्कूल में उसे हमेशा 90 प्रतिशत से ज्यादा नंबर लाने और टॉपर्स से आगे रहने की ट्रेनिंग दी गई। इस सफलता की दौड़ का नतीजा था कि उसने आईआईटी में दाखिला तो पा लिया, लेकिन वह अंदर से हमेशा खुद को कमजोर और कम आत्मविश्वासी महसूस करता रहा। 70 लाख के इस ऑफर ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वह वाकई यही जिंदगी चाहता है?

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कॉर्पोरेट की दुनिया और जिम्मेदारी का टकराव

छात्र ने लिखा कि उसे अपनी आने वाली जिंदगी एक कभी न खत्म होने वाली दौड़ की तरह दिख रही है— जहां हर साल सिर्फ कॉर्पोरेट कॉम्पिटिशन, प्रमोशन, नौकरियां बदलना और एआई (AI) जैसे बदलावों के बीच खुद को साबित करना होगा। अंत में एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तो मिल जाएगा, लेकिन जीवन का असली आनंद कहीं खो जाएगा।

इसके साथ ही उसके सामने एक बड़ा पारिवारिक संकट भी था। वह एक किसान परिवार से आता है, इसलिए माता-पिता के प्रति उसकी बड़ी वित्तीय जिम्मेदारियां हैं। वह इस बड़े मौके को इतनी आसानी से छोड़ भी नहीं सकता था। उसने बताया कि उसे फिटनेस, जिम और एक अनुशासित जीवनशैली पसंद है, लेकिन इस शौक से तुरंत एक स्थिर कमाई कर पाना मुश्किल है। उसने दुख जताते हुए लिखा कि अक्सर मोटी सैलरी वाली नौकरियां लोगों को उनकी खुशियां नहीं दे पाती हैं।

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अंकुर वारिकू की सलाह: अपनी सफलता खुद परिभाषित करो

अंकुर वारिकू ने छात्र की इस ईमानदारी की तारीफ की और कहा कि उसकी उलझन पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा कि जब सफलता समाज के नियमों से तय होती है, तो वह अंदर से खोखली ही लगती है। यह छात्र एक ऐसा खेल, खेल रहा है जो दूसरों ने उसके लिए बनाया है।

वारिकू ने युवाओं को सीख देते हुए कहा कि पहला बहादुरी भरा कदम यह मानना है कि "दुनिया जिसे सफलता कहती है, वह जरूरी नहीं कि आपकी नजर में भी सफलता हो।" उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि जब लोग आपसे कहें कि आपके पास जो है उसके लिए बस 'आभारी' रहो और ज्यादा मत सोचो, तब भी अपने दिल की आवाज सुनना सबसे जरूरी है ताकि जिंदगी के आखिरी दिनों में कोई पछतावा न रहे।

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