TET: टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने निकाली रैली, मांगें पूरी नहीं हुईं तो थम जाएगी पढ़ाई
TET Exam: उत्तराखंड में जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ परेड मैदान से सचिवालय तक 'गर्जना रैली' निकाली। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और बड़ा करने की चेतावनी दी।

TET: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सड़कें उस समय नारों और भारी उत्साह से गूंज उठीं, जब प्रदेशभर के हजारों जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरने का फैसला किया। प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित इस 'गर्जना रैली' ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाथ में चॉक और डस्टर थामने वाले शिक्षक और शिक्षिकाएं जब अपनी मांगों की तख्तियां लेकर परेड मैदान से सचिवालय की तरफ बढ़े, तो उनका जोश देखने लायक था। सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्होंने अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की।
टीईटी (TET) की नई शर्तों पर भड़के शिक्षक: सम्मान की रक्षा की मांग
इस ऐतिहासिक मार्च के दौरान शिक्षकों ने मुख्य रूप से अपने सम्मान की रक्षा और लंबे समय से लटके मुद्दों को लेकर आवाज उठाई। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का सबसे बड़ा विरोध टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर था।
रैली में शामिल शिक्षकों और उनके नेताओं ने साफ शब्दों में कहा नई शर्तें थोपना गलत, जो शिक्षक पिछले कई वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, उन पर करियर के इस मोड़ पर आकर अचानक नई शर्तें थोपना बिल्कुल भी उचित नहीं है। सरकार को शिक्षकों की पुरानी और लंबित समस्याओं को नजरअंदाज करना बंद करना होगा और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए तुरंत एक सकारात्मक फैसला लेना होगा।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो उग्र होगा आंदोलन, थम जाएगी पढ़ाई
इस रैली की सबसे खास बात यह थी कि इसमें केवल स्थानीय शिक्षक ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों और दूर-दराज के गांवों से भी भारी संख्या में शिक्षक शामिल होने पहुंचे थे। सचिवालय तक पैदल मार्च करने के बाद शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने अधिकारियों को अपना एक ज्ञापन सौंपा।
शिक्षक नेताओं ने सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यह तो सिर्फ एक शुरुआत थी। अगर उनकी जायज मांगों पर जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। शिक्षकों ने सरकार से भावुक अपील भी की कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले इसे सींचने वाले गुरुजनों के हितों की अनदेखी बंद होनी चाहिए।
उत्तराखंड के सरकारी बेसिक और जूनियर स्कूलों में साल 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को अध्यापक पात्रता परीक्षा (TET) में शामिल कराने के लिए नियमों को आसान बनाने जा रही है। इस नए कदम के तहत, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पहले सेवा में आए सभी शिक्षक अब टीईटी परीक्षा देने के पात्र हो जाएंगे।
शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि इसका आधिकारिक प्रस्ताव पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। सरकार के इस फैसले से राज्य के करीब 24 हजार शिक्षकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से अपने भविष्य को लेकर असमंजस में थे।




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