कौन हैं गुरतेज संधू, IIT दिल्ली के ग्रेजुएट; 1382 अमेरिकी पेटेंट हासिल कर महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन को भी पीछे छोड़ा
Gurtej Sandhu: अमृतसर में पले-बढ़े IIT दिल्ली से पढ़े गुरतेज संधू ने 1382 अमेरिकी पेटेंट हासिल कर महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पढ़िए पूरी खबर…

Who is Gurtej Sandhu: भारतीय प्रतिभा का डंका एक बार फिर पूरी दुनिया में बजा है। इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली के पूर्व छात्र गुरतेज संधू इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। उन्होंने साइंस और इनोवेशन की दुनिया में एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने इतिहास रच दिया है। गुरतेज संधू ने अमेरिका में कुल 1,382 यूटिलिटी पेटेंट अपने नाम दर्ज करा लिए हैं। इस बेमिसाल संख्या के साथ उन्होंने बिजली के बल्ब का आविष्कार करने वाले दुनिया के महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन के 1,093 पेटेंट के रिकॉर्ड को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। गुरतेज संधू अमेरिकी इतिहास में सातवें सबसे बड़े और सबसे सक्रिय आविष्कारक बन गए हैं।
अमृतसर से IIT दिल्ली और फिर अमेरिका तक का सफर
पंजाब के अमृतसर में पले-बढ़े गुरतेज संधू बचपन से ही मेधावी छात्र थे। उन्होंने भारत के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली से साल 1985 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में अपनी MTech की डिग्री पूरी की थी। इसके बाद वे हायर एजुकेशन और रिसर्च के लिए अमेरिका चले गए। पिछले 35 वर्षों से वे अमेरिका के इडाहो में रहकर सेमीकंडक्टर और चिप फैब्रिकेशन के क्षेत्र में क्रांतिकारी रिसर्च कर रहे हैं। वर्तमान में गुरतेज संधू दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी में सीनियर फेलो और वाइस प्रेसिडेंट के रूप में कार्यरत हैं।
आपके स्मार्टफोन और कंप्यूटर के पीछे है संधू का दिमाग
भले ही आम लोग गुरतेज संधू के नाम से ज्यादा परिचित न हों, लेकिन आज पूरी दुनिया में जो स्मार्टफोन, डिजिटल कैमरा, क्लाउड कंप्यूटिंग, लैपटॉप और डेटा स्टोरेज का इस्तेमाल हो रहा है, उसके पीछे संधू की तकनीक ही काम कर रही है। उन्होंने थिन-फिल्म प्रक्रियाओं, मैटेरियल्स, वीएलएसआई (VLSI) और एटॉमिक लेयर डिपॉजिशन पर अभूतपूर्व रिसर्च किया है।
इसके अलावा DRAM और NAND मेमोरी सिस्टम को विकसित करने में उनका सबसे अहम योगदान रहा है, जिसकी बदौलत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आज अधिक तेज, छोटे और कॉम्पैक्ट हो पाए हैं। उनकी इन ऐतिहासिक खोजों के लिए उन्हें साल 2018 में दुनिया के प्रतिष्ठित 'IEEE एंड्रयू एस ग्रोव अवार्ड' से भी नवाजा जा चुका है।
सफलता के साथ छिड़ी 'ब्रेन ड्रेन' पर बहस
गुरतेज संधू की इस जादुई सफलता ने भारतीय गौरव को तो बढ़ाया ही है, लेकिन साथ ही देश में ‘ब्रेन ड्रेन’ की एक पुरानी बहस को भी सोशल मीडिया पर फिर से जिंदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग यह मुद्दा उठा रहे हैं कि "इंजीनियर तो भारत तैयार करता है, लेकिन उन आविष्कारों और पेटेंट का पूरा फायदा अमेरिका जैसे देश उठा ले जाते हैं"। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में आज भी विश्व स्तरीय रिसर्च लैब्स, बड़े बजट और मजबूत सपोर्ट सिस्टम की कमी है, जिसके कारण देश के होनहार वैज्ञानिकों को विदेशों का रुख करना पड़ता है।




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