उत्तराखंड में स्कूलों के नए समय पर ठनी, किस बात पर अड़े शिक्षक; शिक्षा विभाग से वार्ता रही बेनतीजा
स्कूलों की नई समय सारिणी को लेकर शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। समय बढ़ाए जाने के विरोध में शिक्षकों ने कड़ा रुख अपनाया है।

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के घंटों और नई समय सारिणी को लेकर मचा घमासान अब आर-पार की जंग में तब्दील होता नजर आ रहा है। शुक्रवार को राजधानी देहरादून स्थित शिक्षा महानिदेशालय में शासन और शिक्षक संगठनों के बीच हुई अहम बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। स्थिति यह रही कि करीब घंटों चली माथापच्ची के बाद भी दोनों पक्ष अपने-अपने स्टैंड पर अड़े रहे, जिसके चलते गतिरोध और गहरा गया है।
बैठक में गरमाया माहौल
दरअसल, शासन द्वारा स्कूलों का समय बढ़ाए जाने के फैसले के बाद से ही पूरे प्रदेश में शिक्षक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल रखा है। इसी भारी विरोध को देखते हुए शासन की पहल पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सभागार में यह आपात बैठक बुलाई गई थी। बैठक की शुरुआत से ही माहौल में तल्खी साफ दिखाई दे रही थी।
शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने दलील दी कि विद्यालय संचालन का समय बढ़ाना उनकी मजबूरी और जरूरत दोनों है। उन्होंने इसके पीछे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या (NCF) के कड़े प्रावधानों का हवाला दिया। अधिकारियों का कहना था कि नई नीति के मानकों को पूरा करने के लिए पढ़ाई के घंटों में इजाफा करना अनिवार्य है।
केवल समय बढ़ाना ही सुधार नहीं: शिक्षक संगठन
अधिकारियों की इन दलीलों पर शिक्षक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। संगठनों ने दोटूक कहा कि विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधा-अधूरा अर्थ निकाल रहा है। शिक्षकों का तर्क था कि नई शिक्षा नीति में शिक्षा का स्तर सुधारने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के ढेरों सुझाव हैं, लेकिन विभाग का पूरा ध्यान केवल घड़ी की सुइयां आगे बढ़ाने पर टिका है।
बैठक में मौजूद शिक्षक नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चिलचिलाती धूप में बच्चों को ज्यादा देर तक स्कूलों में रोकना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि वे बच्चों की सेहत और शिक्षकों के हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे।
लिखित प्रस्ताव के साथ लामबंद हुए शिक्षक
गतिरोध को देखते हुए शिक्षक संगठनों ने अपनी मांगों और व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर शासन को एक विस्तृत लिखित प्रस्ताव भी सौंपा है। इसमें मांग की गई है कि समय सारिणी को लचीला बनाया जाए और इसे थोपने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय किया जाए।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में शासन की ओर से अपर शिक्षा निदेशक परमेंद्र सकलानी, मेहरबान सिंह बिष्ट, परमेंद्र कुमार बिष्ट और डॉ. मोहन सिंह बिष्ट जैसे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखने के लिए प्राथमिक शिक्षक संघ के मनोज तिवारी, दिगंबर सिंह नेगी, अश्विनी कुमार के साथ ही जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा, संरक्षक सतीश घिल्डियाल और जिला महामंत्री रूपक पुरी ने मोर्चा संभाला।
अब आगे क्या?
फिलहाल इस बैठक के बेनतीजा रहने से स्कूलों के समय को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। विभाग जहां नियमों की दुहाई दे रहा है, वहीं शिक्षक सड़क पर उतरने को तैयार हैं। अब सबकी नजरें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सरकार बीच का कोई रास्ता निकालेगी या यह विवाद आने वाले दिनों में स्कूलों की तालाबंदी की वजह बनेगा।




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