IITian श्रेयांश ने 2.3 करोड़ का पैकेज ठुकराकर चुना IAS का सफर, सेल्फ स्टडी से भेदा UPSC का चक्रव्यूह
Shreyansh Bardia Success Story: मध्य प्रदेश के हरदा जिले के रहने वाले श्रेयांश बार्डिया की कहानी साहस बयां करती है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में शानदार 194वीं रैंक हासिल कर श्रेयांश अब एक आईएएस (IAS) अधिकारी बनने जा रहे हैं।

Shreyansh Bardia UPSC Success Story: सफलता की कहानियां अक्सर कड़ी मेहनत और बड़े समझौतों से लिखी जाती हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के हरदा जिले के रहने वाले श्रेयांश बार्डिया की कहानी कुछ अलग ही साहस बयां करती है। श्रेयांश ने वह कर दिखाया जो आज के दौर में किसी भी युवा के लिए एक सपने जैसा है—उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनी के करोड़ों रुपये के सैलरी पैकेज को सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया ताकि वे देश की सेवा कर सकें। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में शानदार 194वीं रैंक हासिल कर श्रेयांश अब एक आईएएस (IAS) अधिकारी बनने जा रहे हैं।
उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गौरव की बात है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो कॉर्पोरेट की चकाचौंध छोड़कर समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं।
इंजीनियरिंग से लेकर UPSC तक का सफर
श्रेयांश बार्डिया शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान (IIT) से अपनी डिग्री हासिल की। कैंपस प्लेसमेंट के दौरान उन्हें विदेशों की बड़ी कंपनियों से भारी-भरकम सैलरी के प्रस्ताव मिले थे। किसी भी सामान्य युवा के लिए इतने बड़े पैकेज को मना करना मुश्किल होता, लेकिन श्रेयांश के मन में कुछ और ही चल रहा था।
उनके पिता और परिवार ने हमेशा उन्हें अपने दिल की सुनने के लिए प्रेरित किया। श्रेयांश का मानना था कि पैसा कमाना जीवन का एकमात्र उद्देश्य नहीं हो सकता, असली संतुष्टि तब मिलती है जब आप अपनी योग्यता से आम लोगों के जीवन में बदलाव ला सकें।
बिना कोचिंग के हासिल की सफलता?
श्रेयांश की तैयारी की सबसे खास बात उनका अनुशासन और रणनीति रही। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के लिए खुद को पूरी तरह झोंक दिया। अखबारों की ठीक से पढ़ाई, सीमित लेकिन गुणवत्तापूर्ण किताबों का चुनाव और नियमित रूप से उत्तर लेखन का अभ्यास उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। उन्होंने अपनी असफलता से कभी हार नहीं मानी और हर प्रयास के साथ अपनी कमियों को दूर किया।
क्यों ठुकराया करोड़ों का ऑफर?
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने कॉर्पोरेट जगत के शानदार करियर में 2.3 करोड़ का पैकेज क्यों छोड़ दिया, तो उनका जवाब बेहद सादगी भरा था। श्रेयांश ने बताया कि इंजीनियरिंग ने उन्हें तकनीकी सोच दी, लेकिन वे उस सोच का इस्तेमाल नीति निर्माण और प्रशासन में करना चाहते थे। वे जमीनी स्तर पर काम करके शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार लाना चाहते हैं।
हरदा में जश्न का माहौल
श्रेयांश की इस सफलता की खबर जैसे ही उनके पैतृक शहर हरदा पहुंची, वहां खुशी की लहर दौड़ गई। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। उनके माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं, जो यह बताते हैं कि उनके बेटे ने न केवल अपना सपना पूरा किया है, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। श्रेयांश की यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि आपके पास स्पष्ट लक्ष्य और उसे पाने का जुनून है, तो दुनिया की कोई भी सुख-सुविधा आपको आपके मार्ग से भटका नहीं सकती।




साइन इन