Success Story: पिता है सिक्योरिटी गार्ड, बेटे ने किताबों से बदल दी किस्मत; 5वें प्रयास में पास किया UPSC
Jatin Jakhar Success Story: जतिन जाखड़ के लिए यूपीएससी का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उन्होंने साल 2024 की परीक्षा में अपने 5वें प्रयास में 191 रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है। आइए उनकी सफलता की कहानी जानते हैं।

Jatin Jakhar UPSC Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों छात्र आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता उन्हीं को मिलती है जिनके हौसलों में उड़ान और इरादों में मजबूती होती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है जतिन जाखड़ की, जिन्होंने अभावों में रहकर भी वह मुकाम हासिल किया जिसे पाना करोड़ों युवाओं का सपना है।
जतिन जाखड़ की सफलता इसलिए खास है क्योंकि वे किसी रईस खानदान से नहीं आते। उनके पिता एक प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगियों के बीच जतिन ने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची, तो गरीबी कभी भी सफलता के आड़े नहीं आ सकती।
चार बार मिली हार, पर नहीं मानी हार
जतिन जाखड़ के लिए यूपीएससी का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उन्होंने साल 2024 की परीक्षा में अपने 5वें प्रयास में 191 रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है। इससे पहले वे चार बार असफल हुए थे। अक्सर छात्र दो या तीन प्रयासों के बाद टूट जाते हैं और कोई दूसरा रास्ता चुन लेते हैं, लेकिन जतिन ने अपनी हर हार से कुछ न कुछ सीखा। उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों पर काम किया और हर बार दोगुने उत्साह के साथ मैदान में उतरे।
पिता का संघर्ष और जतिन का संकल्प
जतिन जाखड़ की इस कामयाबी के पीछे उनके पिता का खून-पसीना शामिल है। एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हुए उनके पिता ने कभी जतिन की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी। जतिन बताते हैं कि जब भी वे खुद को कमजोर महसूस करते थे, तो उन्हें अपने पिता का चेहरा याद आता था, जो कड़ी धूप और रात की ठंड में ड्यूटी करते थे ताकि उनका बेटा पढ़ सके। पिता के इसी संघर्ष ने जतिन के भीतर एक ऐसी आग जला दी जिसने उन्हें आखिरकार सफलता के शिखर पर पहुंचा दिया।
तैयारी की रणनीति: सादगी और अनुशासन
जतिन ने अपनी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया और बाहरी दुनिया से दूरी बनाए रखी। उन्होंने कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ स्टडी पर काफी जोर दिया। जतिन का मानना है कि यूपीएससी केवल किताबी ज्ञान की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह आपके धैर्य और व्यक्तित्व का परीक्षण है। उन्होंने अपने वैकल्पिक विषय का चुनाव बहुत सोच-समझकर किया और नियमित रूप से उत्तर लेखन का अभ्यास किया।
युवाओं के लिए संदेश
जतिन जाखड़ का नाम केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो मुश्किल हालातों में बड़े सपने देखते हैं। जतिन की कहानी हमें सिखाती है कि चाहे रास्ता कितना भी पथरीला क्यों न हो, अगर आपके पास धैर्य और संकल्प की लाठी है, तो आप दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर भी पहुंच सकते हैं।




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