मिड डे मील बनाने वाली मां के बेटे ने किया कमाल, GATE के बाद अब UPSC क्रैक कर बना IAS ऑफिसर
UPSC Success Story IAS Dongre Revaiah: डोंगरे रेवैया ने साल 2022 की UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की और कुल 1000 सफल उम्मीदवारों में से 410वीं रैंक (AIR 410) प्राप्त की। अब वे एक IAS अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं।

UPSC Success Story IAS Dongre Revaiah: "मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" इन पंक्तियों को सच कर दिखाया है एक ऐसे नौजवान ने, जिसके पास न तो सुख-सुविधाएं थीं और न ही आर्थिक मजबूती, लेकिन उसके पास था तो बस अटूट आत्मविश्वास और कुछ कर गुजरने का जज्बा। डोंगरे रेवैया ने साल 2022 की UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की और कुल 1000 सफल उम्मीदवारों में से 410वीं रैंक (AIR 410) प्राप्त की। अब वे एक IAS अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं एक ऐसे होनहार छात्र की, जिसने अभावों के बीच पलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षा पास की है। इस छात्र की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उसकी मां स्कूल में मिड-डे मील बनाने का काम करती हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा की दहलीज तक पहुंचने का यह सफर हर उस युवा के लिए सबक है जो मुश्किलों से घबरा जाते हैं।
बचपन से ही था पढ़ाई का जुनून
इस छात्र का जीवन संघर्षों की एक खुली किताब रहा है। पिता की कम आय और घर की तंगहाली के बीच उसकी मां ने स्कूलों में बच्चों के लिए खाना बनाकर अपने बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया। मां ने खुद भले ही मुश्किलें झेलीं, लेकिन बेटे की आंखों में कभी आंसू नहीं आने दिए और हमेशा उसे ऊंचे सपने देखने के लिए प्रेरित किया। छात्र ने भी अपनी मां के पसीने की हर बूंद की कीमत समझी और अपनी पूरी ताकत पढ़ाई में झोंक दी।
GATE में सफलता और फिर UPSC का लक्ष्य
UPSC क्रैक करने से पहले इस प्रतिभाशाली युवा ने अपनी तकनीकी योग्यता को भी साबित किया था। उसने देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा GATE को न केवल पास किया, बल्कि उसमें शानदार रैंक भी हासिल की। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के रास्ते खुले होने के बावजूद, उसका दिल हमेशा से देश की सेवा करने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की मदद करने के लिए धड़कता था।
यही कारण था कि उसने एक सुरक्षित करियर के बजाय 'कांटों भरे' सिविल सेवा के रास्ते को चुना। उसने अपनी इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि और GATE की तैयारी के दौरान विकसित किए गए अनुशासन को UPSC की पढ़ाई में आधार बनाया।
बिना किसी बड़े संसाधनों के की तैयारी
आजकल जहां लोग लाखों रुपये खर्च कर दिल्ली जैसे शहरों में कोचिंग लेते हैं, इस छात्र ने साबित किया कि अगर संकल्प पक्का हो, तो सीमित संसाधनों में भी जीत हासिल की जा सकती है। उसने इंटरनेट का सही उपयोग किया, लाइब्रेरी में घंटों वक्त बिताया और पुराने टॉपर्स के अनुभवों से सीखा। उसकी दिनचर्या में पढ़ाई के अलावा कुछ नहीं था।
मां के लिए सबसे बड़ा तोहफा
जब UPSC का रिजल्ट आया और इस छात्र का नाम लिस्ट में दिखा, तो उसकी मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सालों तक दूसरों के बच्चों के लिए खाना बनाने वाली उस मां के लिए यह पल दुनिया की सारी दौलत से बढ़कर था। छात्र का कहना है, "मेरी सफलता मेरी मां के संघर्षों का प्रतिफल है। उन्होंने मुझे सिखाया कि गरीबी दिमाग की स्थिति है, मेहनत की नहीं।"




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