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5 कोशिशें, 4 बार इंटरव्यू… आखिरकार मेहनत ने किया कमाल; साक्षी जैन ने ऐसे UPSC में मार ली बाजी

upsc success story sakshi jain: राजस्थान के टोंक की साक्षी जैन ने CA से UPSC तक का सफर तय किया। 5 प्रयासों, 4 इंटरव्यू और कई उतार-चढ़ाव के बाद 2025 में साक्षी ने 37वीं रैंक हासिल की। जानिए साक्षी जैन की इस जर्नी की पूरी कहानी।

Mon, 13 April 2026 02:51 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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5 कोशिशें, 4 बार इंटरव्यू… आखिरकार मेहनत ने किया कमाल; साक्षी जैन ने ऐसे UPSC में मार ली बाजी

upsc success story sakshi jain: राजस्थान के छोटे से शहर टोंक की रहने वाली साक्षी जैन की कहानी एक साधारण शुरुआत से बड़े मुकाम तक पहुंचने की मिसाल है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने ही शहर में पूरी की और फिर आगे की पढ़ाई के लिए जयपुर का रुख किया। यहीं से उनके करियर की दिशा तय होने लगी। चार्टर्ड अकाउंटेंसी जैसे कठिन कोर्स को उन्होंने साल 2018 में सिर्फ चार साल में और एक ही प्रयास में पास कर लिया जो उनकी मेहनत और अनुशासन को साफ दिखाता है। मगर उन्होंने इस प्रोफेशनल डिग्री के साथ कैसे सिविल सेवा का सफर तय किया और इस जर्नी में उन्हें कितने मुश्किल पड़ावों का सामना किया, ये दिलचस्प कहानी है। आइए जानते हैं साक्षी जैन ने कैसे यूपीएससी का मुकाम तय किया।

कॉरपोरेट नौकरी से बदला रास्ता

इंडियन मास्टरमाइंड में छपी रिपोर्ट की मानें तो साक्षी ने CA बनने के बाद साक्षी ने Barclays जैसी नामी कंपनी में काम किया। यहां उन्होंने फाइनेंशियल एनालिस्ट के तौर पर काम शुरू किया। नौकरी अच्छी थी और करियर भी स्थिर नजर आ रहा था लेकिन उनके मन में कुछ अधूरा सा महसूस हो रहा था। परिवार के जरिए उन्हें सिविल सेवा के बारे में समझने का मौका मिला और तभी उन्होंने तय किया कि उन्हें ऐसा काम करना है जिससे समाज के लोगों से सीधा जुड़ाव हो और उनके जीवन में बदलाव लाया जा सके।

कोरोना के बीच शुरू हुई तैयारी

साक्षी ने जनवरी 2020 में UPSC की तैयारी शुरू की जब देश में कोरोना महामारी का दौर शुरू हो रहा था। उस समय न कोचिंग संस्थान खुले थे और न ही तैयारी का कोई तय ढांचा था। ऐसे में उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया और अपने ऑप्शनल विषय कॉमर्स एंड अकाउंटेंसी के लिए एक विशेष कोर्स जॉइन किया। छह महीने का यह कोर्स उनकी तैयारी का मजबूत आधार बना और उन्होंने धीरे-धीरे अपनी रणनीति तैयार की।

लगातार असफलताओं के बीच बनी मजबूती

उनका पहला प्रयास 2021 में था जिसमें वह प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाईं। लेकिन इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी। 2022 से 2025 तक उन्होंने हर साल प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा पास की और चार बार इंटरव्यू तक पहुंचीं। 5वीं कोशिश में आखिरकार 2025 में उनकी मेहनत रंग लाई और 37वीं रैंक के साथ उनका चयन हो गया।

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जहां कमजोरी थी वहीं किया सुधार

साक्षी ने अपनी तैयारी के दौरान यह समझ लिया था कि उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। जनरल स्टडीज में उनके अंक लगभग स्थिर थे लेकिन निबंध और ऑप्शनल विषय में उतार-चढ़ाव था। निबंध में उनके अंक पहले गिरते रहे लेकिन आखिरी प्रयास में उन्होंने इसे सुधार लिया। वहीं ऑप्शनल विषय में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अच्छे अंक हासिल किए। इस सुधार का असर उनके कुल मेंस स्कोर पर भी पड़ा जो बढ़कर 816 तक पहुंच गया।

इंटरव्यू बना सफलता की कुंजी

साक्षी के लिए इंटरव्यू सिर्फ ज्ञान का नहीं बल्कि मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास का खेल था। उनके इंटरव्यू अंकों में उतार-चढ़ाव साफ दिखता है लेकिन आखिरी प्रयास में उन्होंने 201 अंक हासिल किए। इस बार उन्होंने पूरी सकारात्मक सोच के साथ इंटरव्यू दिया। खास बात यह रही कि वह दिन की आखिरी कैंडिडेट थीं फिर भी उन्होंने पूरे उत्साह के साथ खुद को प्रस्तुत किया और यही उनकी सफलता का बड़ा कारण बना।

किताबों से बाहर की चुनौतियां

इस लंबे सफर में साक्षी को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि कई व्यक्तिगत चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। लंबे समय तक पढ़ाई करने से स्वास्थ्य पर असर पड़ा जिसे उन्होंने योग और नियमित वॉक से संभाला। इसके अलावा समाज का दबाव और बार-बार असफल होने के बाद खुद पर संदेह होना भी उनके लिए मुश्किल रहा। हालांकि, उनके परिवार ने हर समय उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।

अब समाज में बदलाव लाने का लक्ष्य

सिविल सेवा में आने के बाद साक्षी का फोकस बिल्कुल साफ है। वह खासतौर पर वित्तीय साक्षरता पर काम करना चाहती हैं, खासकर महिलाओं के बीच। उनका मानना है कि आज भी समाज में वित्तीय जानकारी की कमी है और इस दिशा में काम करने की जरूरत है।

अभ्यर्थियों के लिए सीधा संदेश

साक्षी जैन का कहना है कि UPSC की तैयारी में सबसे जरूरी है सही दिशा और स्पष्ट सोच। उनके मुताबिक, सिलेबस और पिछले साल के सवालों को अपनी तैयारी का आधार बनाना चाहिए और उसी के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए।

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