सरहद पर खाई गोली, शोपियां में आतंकियों से लोहा लेने वाले मेजर ने किया UPSC क्रैक; अब बनेंगे अफसर
upsc success story major nitish kumar singh : भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर नीतीश कुमार सिंह ने शोपियां में आतंकियों से लड़ते हुए घायल हुए थे। नौकरी के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा 2025 में 305वीं रैंक हासिल की।

upsc success story major nitish kumar singh : कुछ कहानियां सिर्फ कामयाबी के इर्द गिर्द नहीं घूमतीं वो जज्बे, कभी न हार मानने वाली जिद और फर्ज को निभाने की एक नई राह खोजने के बारे में होती हैं। जब पुरानी राह किसी हादसे में छूट जाए तो इंसान टूट जाता है लेकिन कुछ विरले ही होते हैं जो अपना रास्ता खुद बनाते हैं। रिटायर्ड मेजर नीतीश कुमार सिंह एक ऐसे ही इंसान हैं। वो कोई ऐसे शख्स नहीं हैं जिन्होंने अचानक अपनी मंजिल बदल ली हो, बल्कि असल मायने में वो देश सेवा के उसी रास्ते पर चलते रहे हैं बस उनका तरीका बदल गया। नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से निकले भारतीय सेना के इस जांबाज अफसर ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 305वीं रैंक (AIR 305) हासिल की है। आइए जानते हैं मेजर नीतीश कुमार सिंह की सफलता की कहानी।
नीतीश कुमार सिंह ने पहले किया एनडीए का रुख
बिहार की मिट्टी ने हमेशा देश को बड़े बड़े अफसर और जांबाज दिए हैं। मेजर नीतीश की कहानी की शुरुआत भी इसी सूबे के बेगूसराय जिले के शम्हो ब्लॉक के बिजुलिया गांव से होती है। यह एक ऐसा इलाका है जहां सपने शोर मचाकर नहीं बल्कि खामोशी से पलते हैं और मजबूत उसूलों की बुनियाद पर खड़े होते हैं। उनके पिता शिवकांत सिंह के घर में अनुशासन और शिक्षा कोई ऐसी चीज नहीं थी जिसकी बस ख्वाहिश की जाए, बल्कि यह जिंदगी जीने का एक तय तरीका था। शुरुआती दिनों में ऐसा नहीं था कि तकदीर के कोई बड़े फैसले नजर आ रहे हों। वहां बस एक चीज थी और वो लगातार मेहनत और अपनी बात पर टिके रहना। इसी खामोश लेकिन मजबूत इरादे ने उन्हें नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) तक पहुंचाया, जो देश की सेवा के लिए उनका पहला और सबसे अहम कदम था।
शोपियां में आतंकियों का किया सामना
मगर जिंदगी कभी सीधी लकीर में नहीं चलती। साल 2017 की बात है। दक्षिण कश्मीर के शोपियां में आतंकियों के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा था। कोर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME) में तैनात मेजर सिंह इस मोर्चे पर डटे हुए थे। इसी दौरान वो गंभीर रूप से घायल हो गए। मगर एक फौजी के लिए चोट सिर्फ जिस्मानी नहीं होती। यह उसकी उस रफ्तार पर ब्रेक लगा देती है, जिससे उसने हमेशा दौड़ना सीखा है। यह उसकी पहचान और उसके उस भरोसे को भी झकझोर देती है जो उसने खुद पर किया होता है। भले ही मैदान ए जंग पीछे छूट जाए लेकिन एक सिपाही के अंदर देश की सेवा करने की जो आग होती है, वो कभी नहीं बुझती। ऐसे में जो रास्ता बचता है वो सिर्फ ठीक होने का नहीं होता बल्कि खुद को एक नए सांचे में ढालने का होता है।
सिविल सेवा की तरफ किया रुख
चोट से उबरने के बाद मेजर नीतीश के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा था, जिसका सामना वर्दी पहनने वाले कई लोगों को अंदर ही अंदर करना पड़ता है कि जब वो काम ही छिन जाए जिसके लिए आपने दिन रात ट्रेनिंग ली है, तो फिर जिंदगी में क्या बचता है? इस सवाल का जवाब तुरंत नहीं मिला और न ही ये कोई आसान फैसला था लेकिन यह बहुत पुख्ता था। उन्होंने सिविल सेवाओं की तरफ रुख करने का मन बना लिया।
यूपीएससी की तैयारी को लोग अक्सर मोटी मोटी किताबों, कोचिंग सेंटर्स और दिन रात की स्ट्रेटेजी के चश्मे से देखते हैं। लेकिन मेजर सिंह के लिए यह इम्तिहान कुछ अलग ही था। यह सब्र, बर्दाश्त करने की ताकत और खुद पर यकीन का टेस्ट था। एक तरफ अपनी गहरी चोट से उबरना और दूसरी तरफ देश के सबसे मुश्किल इम्तिहान की तैयारी करना था। यह एक ऐसा सफर था जो धीमा था और जिसमें कल का कुछ पता नहीं था। इसके बावजूद, सेना का अनुशासन उनके बहुत काम आया। जिस लगन और मेहनत ने उन्हें सरहदों पर मोर्चे पर डटे रहना सिखाया था, उसी ने अब पढ़ाई के दौरान उनके हर दिन का रूटीन तय किया।
यूपीएससी में 305वीं रैंक के साथ चयन
अब ऑल इंडिया 305वीं रैंक हासिल करने के बाद, मेजर सिंह लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जहां देश के भावी अफसरों को ट्रेनिंग दी जाती है। भले ही ये बदलाव बाहर से बहुत बड़ा लगे। गोला बारूद वाले जंग के मैदान से निकलकर अब वो मीटिंग और फाइलों वाले कॉन्फ्रेंस रूम में जा रहे हैं लेकिन इसके पीछे की सोच और आत्मा आज भी वही है। मेजर सिंह का ये सफर इसलिए भी इतना खास है क्योंकि इसमें कश्मीर के मोर्चे से लेकर सिविल सर्विस की लिस्ट तक का फासला तो है ही, साथ ही इसके बीच का वो संघर्ष भी है जिसे शायद शब्दों में पिरोना मुश्किल है। इस सफर में कोई बड़ा ड्रामा नहीं है, बल्कि एक खामोश और न टूटने वाला हौसला है।




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