upsc success story rasneet kaur air 51 without coaching पिता खंभे पर जोड़ते हैं तार, बेटी का UPSC में कमाल; 22 साल की रसनीत ने बिना कोचिंग कैसे पाई 51वीं रैंक, Career Hindi News - Hindustan
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पिता खंभे पर जोड़ते हैं तार, बेटी का UPSC में कमाल; 22 साल की रसनीत ने बिना कोचिंग कैसे पाई 51वीं रैंक

upsc success story rasneet kaur: पंजाब के राजपुरा की 22 वर्षीय रसनीत कौर ने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ-स्टडी से अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर 51वीं रैंक हासिल कर मिसाल कायम की है।

Mon, 30 March 2026 06:44 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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पिता खंभे पर जोड़ते हैं तार, बेटी का UPSC में कमाल; 22 साल की रसनीत ने बिना कोचिंग कैसे पाई 51वीं रैंक

upsc success story rasneet kaur: क्या कामयाबी के लिए लाखों रुपये की फीस और बड़े शहरों की चकाचौंध वाकई जरूरी है? अगर आपके मन में भी कभी यह सवाल उठा है तो पंजाब के राजपुरा की रहने वाली रसनीत की कामयाबी आपके सारे संशय दूर कर देगी। भारत की सबसे प्रतिष्ठित और सबसे कठिन मानी जाने वाली यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) में एक 22 साल की लड़की ने वह कर दिखाया है, जो अच्छे-अच्छे संसाधनों वाले उम्मीदवार सालों की मेहनत के बाद भी नहीं कर पाते। हाल ही में 6 मार्च 2026 को जब UPSC ने अपने 2025 के रिक्रूटमेंट साइकिल का फाइनल रिजल्ट जारी किया तो उसमें कुल 958 होनहारों ने IAS, IPS और IFS जैसे पदों के लिए अपनी जगह बनाई। इन्हीं में से एक खास नाम रसनीत कौर का है, जिन्होंने पूरे देश में 51वीं रैंक (AIR 51) हासिल कर सबको चौंका दिया है। सबसे ज्यादा हैरान और प्रेरित करने वाली बात यह है कि रसनीत ने यह मुकाम अपने पहले ही प्रयास में और बिना किसी महंगी कोचिंग क्लास का दरवाजा खटखटाए हासिल किया है।

एक लाइनमैन की बेटी का आसमान छूने का सपना

रसनीत कौर का ताल्लुक पंजाब के पटियाला जिले के एक बेहद छोटे और शांत कस्बे राजपुरा से है। वह एक बहुत ही साधारण और मध्यवर्गीय परिवार से आती हैं। उनके पिता जसविंदर सिंह पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) में बतौर लाइनमैन अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बचपन से ही रसनीत ने अपने पिता को दिन-रात कड़ी मेहनत करते और पसीना बहाते देखा था। पिता के इसी जमीनी संघर्ष ने उनके भीतर एक ऐसी आग पैदा की, जिसने उन्हें सिविल सेवा के जरिए देश और समाज के लिए कुछ बड़ा करने का जज्बा दिया। उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि या सीमित संसाधनों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया बल्कि उसी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। वह बहुत छोटी उम्र में ही यह बात अच्छी तरह समझ गई थीं कि शिक्षा ही वह इकलौता हथियार है, जिससे न सिर्फ उनकी, बल्कि पूरे समाज की तकदीर बड़े पैमाने पर बदली जा सकती है।

अपने कमरे को ही बना लिया तपस्या का केंद्र

आज के दौर में जहां UPSC की तैयारी के नाम पर छात्र दिल्ली के मुखर्जी नगर या राजेंद्र नगर का रुख करते हैं और कोचिंग के भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, वहां रसनीत ने एक बिल्कुल अलग और साहसिक रास्ता चुना। उन्होंने घर पर ही रहकर सेल्फ-स्टडी पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया। रसनीत ने खुद को एक साल के लिए एक कमरे में समेट लिया और इसे ही अपनी तपस्या का केंद्र बना लिया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक जीवन, शादियों, पार्टियों और दोस्तों से पूरी तरह से दूरी बना ली। उनके दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि पहला प्रयास ही उनका आखिरी प्रयास होना चाहिए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसी भी तरह की ढिलाई या आधे-अधूरे मन से की गई कोशिश के लिए उनकी जिंदगी में कोई जगह नहीं थी।

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लैपटॉप पर ही ले आईं सारे संसाधन

रसनीत ने दिल्ली जाने के बजाय, डिजिटल युग की ताकत का सही इस्तेमाल किया और अपने लैपटॉप को ही अपनी सबसे बड़ी कोचिंग बना लिया। उन्होंने कई बेहतरीन ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स, यूट्यूब चैनल्स और सरकारी वेबसाइट्स को खंगाला। खुद को अपडेट रखने और देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की बराबरी करने के लिए उन्होंने शानदार डिजिटल नोट्स बनाए और ऑनलाइन टेस्ट सीरीज का जमकर अभ्यास किया। उनका यह स्मार्ट तरीका बताता है कि अगर आपके पास सही दिशा और इंटरनेट का सही इस्तेमाल करने की समझ हो, तो दुनिया का कोई भी कोना आपका क्लासरूम बन सकता है।

एनसीईआरटी से की शुरुआत

UPSC के अन्य अनुभवी टॉपर्स की तरह, रसनीत ने भी अपनी तैयारी की बुनियाद को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने शुरुआत में ही भारी-भरकम रेफरेंस किताबों के पीछे भागने के बजाय NCERT की किताबों को अपनी सबसे बड़ी ढाल बनाया। इतिहास, भूगोल, और राजव्यवस्था जैसे अहम और गहरे विषयों की समझ विकसित करने के लिए उन्होंने पहले स्कूल स्तर की बेसिक किताबें खत्म कीं और उसके बाद ही एडवांस स्तर की पढ़ाई की तरफ कदम बढ़ाया। उनका यह अनुशासन और पढ़ने का व्यवस्थित तरीका हर उस छात्र के लिए एक सटीक रोडमैप है, जो घर बैठे इस परीक्षा को पास करने का सपना देखता है।

लाखों युवाओं के लिए एक जीती-जागती मिसाल

रसनीत कौर की यह कहानी उन लाखों UPSC उम्मीदवारों के लिए एक चमकदार रोशनी की किरण है, जिन्हें लगता है कि बिना भारी-भरकम फीस चुकाए सफलता नहीं मिल सकती। उनकी इस शानदार सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने की सच्ची लगन है, और आप इंटरनेट पर मौजूद सही संसाधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो आप देश के किसी भी हिस्से में बैठकर IAS बनने का अपना ख्वाब हकीकत में बदल सकते हैं।

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