यूपी में SDM-DSP रेस में बाहरी भी आगे, इस बार 10 राज्यों के कितने अभ्यर्थी बनेंगे अफसर
यूपी पीसीएस 2024 के फाइनल रिजल्ट में उत्तर प्रदेश के 864 होनहारों के साथ ही बिहार, दिल्ली और राजस्थान समेत 10 अन्य राज्यों के 68 अभ्यर्थियों ने शानदार सफलता हासिल की है।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा जारी पीसीएस-2024 (PCS 2024) का फाइनल रिजल्ट इन दिनों हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। इस परीक्षा के नतीजे न सिर्फ उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए एक बड़ा जश्न लेकर आए हैं बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी इन नतीजों ने खुशी की लहर दौड़ा दी है। प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यूपीपीसीएस हमेशा से एक बड़ा आकर्षण रहा है। इस बार के परिणाम यह साफ तौर पर बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों पर सिर्फ यूपी के युवाओं का ही एकाधिकार नहीं है बल्कि देश के दूसरे हिस्सों की प्रतिभाएं भी यहां आकर अपनी मेधा का डंका बजा रही हैं।
अगर हम आंकड़ों की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि आयोग ने कुल 932 पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन किया है। इन 932 सफल चेहरों में से 864 युवा उत्तर प्रदेश की माटी से ताल्लुक रखते हैं। यानी कुल चयन का 92.7 फीसदी हिस्सा यूपी के होनहारों के नाम रहा है। यह आंकड़ा इस बात की तस्दीक करता है कि सूबे के युवाओं में इस परीक्षा को लेकर कितनी जबरदस्त दीवानगी और तैयारी का स्तर है। लेकिन कहानी का दूसरा और बेहद दिलचस्प पहलू यह है कि बाकी बची हुई सीटों पर देश के 10 अन्य राज्यों के होनहारों ने अपनी सफलता का झंडा गाड़ दिया है।
10 राज्यों से 68 का हुआ पीसीएस-2024 में चयन
इन नतीजों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के अलावा 10 अन्य राज्यों के कुल 68 परीक्षार्थियों ने पीसीएस-2024 की इस बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण परीक्षा को पास कर लिया है। सफल होने वाले इन बाहरी युवाओं में हमारे पड़ोसी राज्य बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली, और हरियाणा के उम्मीदवार शामिल हैं। इसके साथ ही महाराष्ट्र, पंजाब, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के युवाओं ने भी उत्तर प्रदेश की इस सबसे बड़ी सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी का स्वाद चखा है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है।
अमूमन सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्र जानते हैं कि किसी भी राज्य की लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करना कितना मुश्किल होता है। खासकर तब, जब परीक्षा में उस राज्य विशेष (यूपी स्पेशल) के बारे में गहराई से सवाल पूछे जाते हों। पिछले कुछ समय में यूपीपीसीएस ने अपने सिलेबस में बदलाव करते हुए वैकल्पिक विषयों को हटाकर यूपी स्पेशल के दो पेपर जोड़ दिए थे। माना जा रहा था कि इस बदलाव के बाद दूसरे राज्यों के छात्रों के लिए यूपीपीसीएस की राह थोड़ी मुश्किल हो जाएगी, क्योंकि उन्हें उत्तर प्रदेश के इतिहास, भूगोल, संस्कृति और राजनीति का बहुत बारीकी से अध्ययन करना पड़ेगा। लेकिन इन 68 मेधावियों ने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो और मेहनत में कोई कसर न छोड़ी जाए, तो सिलेबस का कोई भी बदलाव आपका रास्ता नहीं रोक सकता।
क्यों बाहरी को भी लुभाती है यूपीपीएससी की पीसीएस परीक्षा
उत्तर प्रदेश में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों के इस शानदार प्रदर्शन को कई नजरियों से देखा जा रहा है। पहला तो यह कि यूपीपीसीएस की परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर पूरे देश के युवाओं का भरोसा कायम है। दिल्ली के मुखर्जी नगर से लेकर पटना और जयपुर के कोचिंग संस्थानों में बैठकर तैयारी करने वाला युवा भी जानता है कि अगर उसमें काबिलियत है, तो उत्तर प्रदेश का आयोग उसके साथ पूरा इंसाफ करेगा। दूसरा बड़ा कारण यह है कि उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े सूबे में प्रशासनिक अधिकारी (जैसे एसडीएम या डीएसपी) के तौर पर काम करने का अपना एक अलग रुतबा और अनुभव होता है। यहां काम करने की चुनौतियां और अवसर इतने बड़े होते हैं कि हर युवा इस सिस्टम का हिस्सा बनना चाहता है।
बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे हिंदी भाषी राज्यों के युवाओं के लिए तो यूपी हमेशा से एक 'सेकंड होम' की तरह रहा है। भाषा की समानता और मिलती-जुलती सामाजिक पृष्ठभूमि की वजह से इन राज्यों के छात्र यूपीपीसीएस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। वहीं, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे गैर-हिंदी भाषी राज्यों से भी युवाओं का चुना जाना यह बताता है कि उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक सेवाओं की चमक अब पूरे देश में फैल चुकी है।




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