UP TET : यूपी टीईटी विज्ञापन में चूक, आवेदन से 3 लाख DElEd छात्र बाहर, क्या है NCTE का नियम
UP TET : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) 2026 से लगभग तीन लाख डीएलएड प्रशिक्षुओं को बाहर कर दिया गया है। जबकि यह राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियम के विपरीत है।

चार साल बाद होने जा रही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) 2026 से लगभग तीन लाख डीएलएड प्रशिक्षुओं को बाहर कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 16 जुलाई 2019 के आदेश पर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की ओर से चार अगस्त 2022 को जारी पत्र में साफ किया गया है कि किसी भी शिक्षक प्रशिक्षक पाठ्यक्रम (डीएलएड, बीएड या डीएड आदि) में प्रवेश लेने वाला अभ्यर्थी टीईटी में शामिल होने के लिए पात्र है। इसी के साथ एनसीटीई ने अपनी 11 फरवरी 2011 की अधिसूचना को भी संशोधित कर दिया था।
इस लिहाज से डीएलएड, बीएड या डीएड आदि शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के प्रथम से लेकर चतुर्थ सेमेस्टर तक के प्रशिक्षु भी यूपी-टीईटी में आवेदन के लिए पात्र हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से शुक्रवार को जारी यूपी-टीईटी 2026 के विज्ञापन में प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए एनसीटीई से मान्यता प्राप्त एवं उत्तर प्रदेश शासन से संबद्ध संस्था से दो वर्षीय डीएलएड (बीटीसी) पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में शामिल होने वाले या उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही आवेदन के लिए अर्ह माना है।
आरसीआई मान्यता प्राप्त डीएड फाइनल ईयर वाले योग्य
इसी प्रकार एनसीटीई से मान्यता प्राप्त दो वर्षीय डीएड या भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) से मान्यता प्राप्त संस्था से शिक्षा शास्त्र में दो वर्षीय डीएड (विशेष शिक्षा) के अंतिम वर्ष में शामिल होने वाले अथवा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए योग्य माना गया है। उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए भी डीएलएड (बीटीसी), डीएड, डीएड (विशेष शिक्षा) के साथ ही बीएड और समकक्ष पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष में शामिल हो रहे या उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही आवेदन की अनुमति दी गई है। डीएलएड के प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर में प्रशिक्षणरत तीन लाख अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाएंगे। बीएड, डीएड या दूसरे समकक्ष पाठ्यक्रमों के प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के अभ्यर्थियों को शामिल कर लें तो यह संख्या और अधिक हो जाएगी।
यूपी-टीईटी का बहिष्कार करेगा बेरोजगारों का गुट
दो से चार जुलाई तक प्रस्तावित यूपी-टीईटी का बेरोजगारों के एक गुट ने बहिष्कार का निर्णय लिया है। प्रशिक्षित बेरोजगारों का कहना है कि जब सरकार को शिक्षक भर्ती ही नहीं शुरू करनी है तो यूपी-टीईटी क्यों कराई जा रही है। जीव विज्ञान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष जितेंद्र यादव का कहना है कि शिक्षा मंत्री संदीप सिंह लगातार यह कहते आ रहे हैं कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात पूरा है। ऐसे में जब भर्ती नहीं करनी है तो क्या यूपी-टीईटी केवल सरकार का कोष भरने के लिए कराई जा रही है। 2018 के बाद से प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। उसके बाद दो बार 2019 और 2021 में यूपी-टीईटी हो चुका है और सरकार करोड़ों की कमाई कर चुकी है। यही नहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर 2013 में विज्ञान और गणित जबकि 2021 में जूनियर एडेड हाईस्कूलों में भर्ती आई थी जो अब तक चल रही है।




साइन इन