UP Constable Exam: MBA से लेकर PhD वालों ने दी यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा, एक सीट के लिए 89 दावेदार!
UP Police Constable exam: यूपी में 32,679 सिपाही पदों के लिए 29 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने अप्लाई किया है। इस 12वीं पास वाली नौकरी की रेस में PhD, M.Tech और MBA पास युवा भी शामिल हैं, जहां एक सीट पर 89 दावेदार हैं।

UP Police Constable exam: उत्तर प्रदेश में इन दिनों सरकारी नौकरी पाने का एक अनोखा और विशाल मेला लगा हुआ है। राज्य में 8, 9 और 10 जून 2026 को आयोजित हो रही यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के चलते सड़कों से लेकर बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों तक सिर्फ और सिर्फ युवाओं का समंदर दिखाई दे रहा है। जून की इस तपती और भीषण गर्मी में भी युवा अपनी जान हथेली पर रखकर, ट्रेनों और बसों में लटककर दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। इस परीक्षा में शामिल हो रहे परीक्षार्थियों की तादाद इतनी बड़ी है कि इसकी तुलना देश के दो छोटे राज्यों की कुल आबादी से की जा रही है।
लेकिन इस परीक्षा की सबसे हैरान, चौंकाने वाली और भावुक कर देने वाली तस्वीर शैक्षणिक योग्यता को लेकर सामने आई है। नियमों के मुताबिक, कांस्टेबल पद के लिए न्यूनतम योग्यता महज 12वीं पास होना जरूरी है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस 12वीं पास वाली नौकरी की लाइन में एमएससी (M.Sc), एमटेक (M.Tech), बीटेक (B.Tech), एमबीए (MBA) और यहां तक कि पीएचडी (PhD) जैसी देश की सर्वोच्च शैक्षणिक डिग्रियां हासिल कर चुके उच्च शिक्षित युवा भी खड़े हैं। उच्च शिक्षा की बड़ी-बड़ी डिग्रियां जेब में होने के बावजूद, बेरोजगारी और सरकारी नौकरी की चाहत ने उन्हें इस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है।
कड़ा मुकाबला: एक पद के लिए 89 उम्मीदवार आमने-सामने
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) द्वारा इस बार कांस्टेबल के कुल 32,679 पदों पर भर्ती की जा रही है। इस परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों से 29 लाख से अधिक (करीब 30 लाख) उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। इसका सीधा सा गणित यह है कि महज 1 पद हासिल करने के लिए 89 दावेदारों के बीच कांटे की टक्कर है। इन 89 में से कोई एक ही बाजी मारेगा और खाकी पहनने का अपना सपना पूरा कर पाएगा।
बड़ी डिग्री पर मजबूरी भारी, आखिर क्यों है सरकारी नौकरी का ऐसा क्रेज?
जिस युवा ने अपनी जिंदगी के 25 से 28 साल किताबों को खंगालने, रिसर्च करने और पीएचडी जैसी सर्वोच्च उपाधि पाने में लगा दिए, उसका सिपाही भर्ती की लाइन में खड़ा होना समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में युवाओं के बीच सरकारी नौकरी की सुरक्षा, स्थायित्व और सामाजिक सम्मान का एक अलग ही क्रेज है। प्राइवेट सेक्टर में नौकरियों की अनिश्चितता, मंदी का डर और कम सैलरी के कारण, युवा किसी भी कीमत पर एक सुरक्षित सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं, चाहे वह उनकी योग्यता से छोटी ही क्यों न हो। यह परीक्षा केवल एक नौकरी की जंग नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के अस्तित्व और उनके सुरक्षित भविष्य की तलाश है।




साइन इन