UP Board Result 2026: गणित ने डुबोई लाखों परीक्षार्थियों की लुटिया, हिंदी में भी 5.81 लाख लटके; चौंका देंगे आंकड़े
यूपी बोर्ड 2026 के नतीजो ने सबको चौंका दिया है। गणित के साथ-साथ मातृभाषा हिंदी में भी लाखों छात्र फेल हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने साल 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं, लेकिन इन आंकड़ों ने शिक्षा जगत के जानकारों और अभिभावकों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इस बार के परिणामों ने एक ऐसी कड़वी सच्चाई सामने रखी है जिसे पचा पाना मुश्किल है। उत्तर प्रदेश, जिसे हिंदी पट्टी का दिल कहा जाता है, वहां के करीब पौने छह लाख छात्र अपनी ही हिंदी में फेल हो गए हैं। सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि गणित और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों ने भी परीक्षार्थियों के पसीने छुड़ा दिए हैं।
गणित के जाल में उलझा छात्रों का भविष्य
यूपी बोर्ड की इस परीक्षा में सबसे ज्यादा बुरा हाल गणित विषय का रहा है। जिसे हम अक्सर मुश्किल विषय मानते हैं, उसने इस बार सच में लाखों छात्रों का गणित बिगाड़ कर रख दिया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों को मिलाकर कुल 4,49,932 विद्यार्थी गणित में फेल हुए हैं। 10वीं कक्षा में गणित का रिजल्ट औसत प्रतिशत से काफी नीचे रहा। हाईस्कूल में गणित विषय लेने वाले 19,84,265 छात्रों में से केवल 81.29% ही पास हो सके, जबकि 3,64,588 छात्रों को असफलता हाथ लगी। वहीं, इंटरमीडिएट (12वीं) में भी कहानी कुछ अलग नहीं थी। 12वीं में गणित के 3,98,628 परीक्षार्थियों में से 85,344 छात्र फेल हो गए, जिससे इस विषय का पास प्रतिशत महज 77.69% रहा।
हिंदी में 5.81 लाख फेल
सबसे ज्यादा हैरान करने वाले आंकड़े हिंदी विषय से आए हैं। प्रयागराज से जारी रिपोर्ट बताती है कि इस साल कुल 5,81,703 परीक्षार्थी हिंदी में फेल हुए हैं। हाईस्कूल में हिंदी में पंजीकृत 27.56 लाख छात्रों में से 3,89,911 छात्र फेल हो गए। यहां पास होने का प्रतिशत 85.74% रहा, जो उम्मीद से काफी कम है। वहीं इंटरमीडिएट में 12वीं में सामान्य हिंदी लेने वाले 1,02,448 छात्र और साहित्यिक हिंदी लेने वाले 89,344 छात्र अपनी परीक्षा पास नहीं कर सके। यानी साहित्यिक हिंदी में फेल होने वालों का प्रतिशत काफी ज्यादा रहा।
अंग्रेजी और विज्ञान में भी डूबी नैया
अंग्रेजी विषय ने भी छात्रों को खूब रुलाया है। प्रदेश भर में करीब 6.40 लाख परीक्षार्थी अंग्रेजी में फेल हुए हैं। 10वीं में जहां 3.95 लाख छात्र अंग्रेजी की बाधा पार नहीं कर सके, वहीं 12वीं में 2.44 लाख छात्र इस विदेशी भाषा के सामने पस्त हो गए। विज्ञान और अन्य विषयों की स्थिति भी बहुत संतोषजनक नहीं कही जा सकती। हाईस्कूल विज्ञान में 4,38,689 छात्र फेल हुए हैं। इंटरमीडिएट की बात करें तो वहां फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) में 2.57 लाख, केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) में 2.67 लाख और बायोलॉजी (जीव विज्ञान) में 1.56 लाख छात्र फेल हुए हैं। इतिहास जैसे कला वर्ग के विषय में भी 53 हजार से ज्यादा छात्र सफल नहीं हो सके।
क्यों बिगड़ रहा है रिजल्ट?
ऐसा बताया जा रहा है कि कोरोना काल के बाद से छात्रों की लिखने की आदत कम हुई है और बुनियादी समझ पर असर पड़ा है। गणित और विज्ञान जैसे विषयों में प्रैक्टिस की कमी साफ नजर आती है, वहीं हिंदी में फेल होने का मुख्य कारण वर्तनी की गलतियां और व्याकरण के नियमों की अनदेखी है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि वे इन आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करेंगे ताकि आगामी सत्र में पढ़ाई की गुणवत्ता को सुधारा जा सके। फिलहाल, इन नतीजों ने उन लाखों घरों में मायूसी फैला दी है जिनके बच्चे एक-दो नंबरों से या मुख्य विषयों में पिछड़ गए हैं।




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