TET: 25 lakhs Teachers to Launch Janpratinidhi Chuppi Todo Campaign Against TET Mandatory Rule, School Lockouts in July TET अनिवार्यता के खिलाफ देशभर के 25 लाख शिक्षक एकजुट; जुलाई में स्कूलों में तालाबंदी की चेतावनी, Career Hindi News - Hindustan
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TET अनिवार्यता के खिलाफ देशभर के 25 लाख शिक्षक एकजुट; जुलाई में स्कूलों में तालाबंदी की चेतावनी

TET: देशभर के 25 लाख शिक्षक 'जनप्रतिनिधि चुप्पी तोड़ो' अभियान शुरू करेंगे। बैक डेट से TET अनिवार्यता के विरोध में जुलाई में शिक्षक विद्यालयों में तालाबंदी और गैर शैक्षणिक कार्यों का विरोध करेंगे।

Sun, 7 June 2026 09:53 AMPrachi लाइव हिन्दुस्तान
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TET अनिवार्यता के खिलाफ देशभर के 25 लाख शिक्षक एकजुट; जुलाई में स्कूलों में तालाबंदी की चेतावनी

TET 2026: उत्तर प्रदेश समेत देश भर के प्राथमिक शिक्षकों में इस समय भारी आक्रोश है। बेसिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य करने और इस फैसले को 'बैक डेट' पुरानी तारीख से लागू किए जाने के विरोध में एक बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर केंद्र व राज्य सरकार और स्थानीय राजनेताओं की उदासीनता के खिलाफ ‘जनप्रतिनिधि चुप्पी तोड़ो’ अभियान शुरू करने का एलान किया है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की इस देशव्यापी मुहिम में करीब 25 लाख शिक्षक एकजुट होंगे। वे 'जनप्रतिनिधि चुप्पी तोड़ो' अभियान के तहत अपने-अपने क्षेत्रों के सांसदों और विधायकों का घेराव कर विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांगेंगे।

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जुलाई में विद्यालयों में तालाबंदी और कार्य बहिष्कार की चेतावनी

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ से जुड़े उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री डॉ. शैलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि न्यायपालिका के रुख और उसके बाद सरकार व जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने शिक्षकों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि आगामी जुलाई महीने में शिक्षक अपनी मांगों के समर्थन में विद्यालयों में तालाबंदी करेंगे।

शिक्षक किसी भी प्रकार के गैर-शैक्षणिक कार्यों का पूरी तरह विरोध और बहिष्कार करेंगे।शिक्षकों का कहना है कि यह मुद्दा उनके रोजगार और जीवन-मरण से जुड़ा हुआ है, इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों ने इस पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है जो कि बेहद चिंताजनक है।

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क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य किया है। हाल में कोर्ट ने इसकी समय सीमा एक साल बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 की थी। जिन शिक्षकों की पांच साल या उससे कम नौकरी बची है, वे इससे मुक्त रहेंगे।

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राज्य अध्यापक पुरस्कार के आवेदनों पर खड़ा हुआ असमंजस

इस विवाद का सीधा असर राज्य अध्यापक पुरस्कार की प्रक्रिया पर भी पड़ता दिख रहा है। वाराणसी में 7 जून से इस पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू होने जा रहे हैं, लेकिन इसे लेकर शिक्षकों के बीच गहरा असमंजस और बहस छिड़ गई है।

नौकरी पर संकट: शिक्षकों का तर्क है कि जब बैक डेट से टीईटी अनिवार्य होने के कारण उनकी मौजूदा नौकरी पर ही तलवार लटक रही है, तो ऐसी स्थिति में राज्य पुरस्कार के लिए आवेदन मांगना कितना तार्किक है।

पात्रता पर सवाल: शिक्षकों के बीच यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि इस संकट के बीच किसका आवेदन मान्य माना जाएगा।

एक्सटेंशन का लाभ: इसके अलावा, यह संशय भी बरकरार है कि जो शिक्षक पूर्व में यह पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं, क्या वे अपनी नौकरी में मिलने वाले दो वर्ष के सेवा विस्तार का लाभ उठा पाएंगे या नहीं।

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