TET: जनगणना ने बढ़ाई शिक्षकों की टेंशन! TET परीक्षा की तैयारी के लिए नहीं मिल रहा समय
भीषण गर्मी में घर-घर जाकर जनगणना करने और दूसरी तरफ यूपी टीईटी परीक्षा पास करने के दोहरे दबाव के कारण यूपी की महिला शिक्षिकाओं के सामने इन दिनों भारी मानसिक संकट खड़ा हो गया है।

TET: उत्तर प्रदेश सेवारत सरकारी शिक्षिकाओं के सामने इन दिनों एक अनोखा और बेहद कठिन संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच उनकी ड्यूटी घर-घर जाकर राष्ट्रीय जनगणना करने में लगाई गई है, वहीं दूसरी तरफ उन पर अपनी सरकारी सेवा में बने रहने के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) पास करने का भारी मानसिक दबाव है।
जुलाई 2026 में होगी टीईटी परीक्षा
आगामी 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन प्रस्तावित किया गया है। कोर्ट और शासन के कड़े नियमों के मुताबिक सरकारी शिक्षकों को अपनी नौकरी और सेवा सुरक्षित रखने के लिए इस टीईटी परीक्षा को पास करना बेहद अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में शिक्षिकाओं के लिए फील्ड में जाकर फील्डवर्क करने और अपनी पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
20 मई से स्कूल बंद, लेकिन नहीं मिला ग्रीष्मावकाश का सुख
शिक्षिकाओं का दर्द है कि शिक्षा विभाग के आदेशानुसार 20 मई से राज्य के सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियां तो घोषित हो चुकी हैं, लेकिन गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ होने के कारण उन्हें छुट्टियों जैसा बिल्कुल भी महसूस नहीं हो रहा है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात महिला शिक्षकों का कहना है कि चिलचिलाती धूप और अत्यधिक तापमान के कारण दोपहर के समय लोग अपने घरों पर नहीं मिलते हैं या दरवाजा नहीं खोलते हैं। इस वजह से मजबूरन उन्हें सुबह जल्दी और देर शाम को क्षेत्र में जाकर लोगों से संपर्क करना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई का पूरा शेड्यूल अस्त-व्यस्त हो गया है।
शिक्षिकाओं की ज़ुबानी: 34 सवालों के जवाब, नक्शा निर्माण और टीईटी की टेंशन
एक अध्यापिका ने बताया कि इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी में फील्ड में जनगणना सर्वे करना बेहद थका देने वाला होता है। लोगों के घर जाकर 34 अलग-अलग सवालों के जवाब दर्ज करने होते हैं और साथ ही पूरे ब्लॉक का नक्शा तैयार करना पड़ रहा है। इस भारी शारीरिक थकान के कारण टीईटी परीक्षा के लिए केवल एक महीना बचने के बावजूद दिन में समय नहीं मिल पा रहा है। वह रात को नींद खराब कर किसी तरह सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन क्लास के जरिए तैयारी की कोशिश कर रही हैं।
एक प्रधानाध्यापिका ने बताया कि उन्हें 20 जून तक जनगणना का काम पूरा करने का लक्ष्य मिला है, जिसे वे समय से पहले खत्म करने के प्रयास में सुबह-शाम जुटी हैं। इस काम के कारण वह छुट्टियों में घर आए अपने बच्चों को भी समय नहीं दे पा रही हैं, और न ही टीईटी के लिए पढ़ पा रही हैं।
शिक्षिकाओं ने सामूहिक रूप से मांग की है कि परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन को उनके कार्यभार और समय सीमा में कुछ आंशिक ढील जरूर देनी चाहिए, ताकि वे अपनी आजीविका को सुरक्षित रखने वाली इस परीक्षा में सफल हो सकें।




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