TET mandatory for teachers ctet Supreme Court Extends Deadline last date No Further Grace Period Thereafter TET : शिक्षकों को टीईटी पास करना ही होगा, सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा बढ़ाई, इसके बाद और मोहलत नहीं, Career Hindi News - Hindustan
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TET : शिक्षकों को टीईटी पास करना ही होगा, सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा बढ़ाई, इसके बाद और मोहलत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें अपने 2025 के टीईटी अनिवार्य संबंधी फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी। हालांकि कोर्ट ने टीईटी पास करने की समयसीमा 31 अगस्त, 2028 तक बढ़ा दी।

Sat, 30 May 2026 06:55 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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TET : शिक्षकों को टीईटी पास करना ही होगा, सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा बढ़ाई, इसके बाद और मोहलत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर के सेवारत शिक्षकों को राहत देने से इनकार करते हुए साफ कर दिया कि उन्हें ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। शीर्ष अदालत ने टीईटी को अनिवार्य बताते हुए सेवा में बने रहने के लिए यह परीक्षा पास करने की समय सीमा 31 अगस्त, 2028 तक बढ़ा दी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और मनमोहन की पीठ ने अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में शीर्ष अदालत के पूर्व के फैसले की समीक्षा की मांग को लेकर दाखिल कई राज्य सरकारों, शिक्षक संघों और व्यक्तिगत शिक्षकों द्वारा दाखिल 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए यह फैसला दिया है। आपको बता दें कि देश में 25 लाख से ज्यादा ऐसे शिक्षक हैं जो बगैर टीईटी पात्रता हासिल किए सालों से पढ़ा रहे हैं। अब उनकी नौकरी संकट में है।

31 अगस्त, 2028 तक की मोहलत

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के 2025 के उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी, जिसमें कहा गया था कि निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के लागू होने से पहले नियुक्त सेवारत शिक्षकों, जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है, को एक सितंबर, 2025 से दो वर्षों के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि ‘संबंधित प्राधिकारों द्वारा टीईटी परीक्षा शीघ्रता से आयोजित की जानी चाहिए क्योंकि इसके लिए आवश्यक समय और संसाधन सीमित हैं, इसलिए हम समय सीमा को दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करते हैं और मूल रूप से निर्देशित 31 अगस्त, 2027 के बजाय 31 अगस्त, 2028 तक योग्यता प्राप्त करनी होगी।

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और अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि टीईटी पास करने के लिए और अतिरिक्त समय नहीं दी जाएगी। टीईटी की आवश्यकता को कानून का पूर्वव्यापी अनुप्रयोग मानने वाले तर्क को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के वैधानिक ढांचे में स्पष्ट रूप से यह परिकल्पना की गई है कि सेवारत शिक्षकों को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर न्यूनतम योग्यताएं प्राप्त करनी होंगी। पीठ ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम विशेष रूप से कानून के प्रारंभ होने के समय सेवारत शिक्षकों से संबंधित है और उन्हें निर्धारित योग्यताएं प्राप्त करने के लिए समय दिया गया है।

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आने वाली पीढ़ियों के शैक्षिक भविष्य पर असर पड़ेगा

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अधीनस्थ कानूनों या राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा जारी अधिसूचनाओं में निहित छूट मूल कानून को रद्द नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि इस आधार पर फैसले को रद्द करना कि इसके परिणामस्वरूप हजारों शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे, इसका अर्थ यह होगा कि जिन शिक्षकों के पास टीईटी योग्यता नहीं है, वे सेवा में बने रहेंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों के शैक्षिक भविष्य पर असर पड़ेगा।याचिकाकर्ताओं के 2025 के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा था कि आरटीई अधिनियम और एनसीटीई अधिनियम में 2011 के संशोधन से पहले नियुक्त शिक्षकों को उनके करियर के मध्य में टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सेवा शर्तों में अनुचित परिवर्तन है। पीठ ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ‘इस दलील के आधार पर फैसले को अप्रभावी घोषित करना कि इसके परिणामस्वरूप हजारों शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे, इसका मतलब यह होगा कि जिन शिक्षकों के पास टीईटी योग्यता नहीं है, वे सेवा में बने रहेंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों के शैक्षिक भविष्य पर असर पड़ेगा।

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शिक्षकों की सेवा बच्चों के भविष्य की कीमत पर नहीं हो सकती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘शिक्षा के अधिकर अधिनियम एक बाल-केंद्रित कानून है और इसे इसी रूप में पढ़ा जाना चाहिए। शिक्षकों की सेवा बच्चों के शैक्षिक भविष्य की कीमत पर नहीं हो सकती।’ राज्य सरकारों ने कह था कि कम समय में टीईटी की शर्त लागू करने से बड़ी संख्या में शिक्षकों की नौकरी जा सकती है, जिससे सार्वजनिक शिक्षा और स्कूलों में शिक्षण की निरंतरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। व्यावहारिक कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा में निरंतरता और बच्चों के कल्याण के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे टीईटी परीक्षाएं नियमित रूप से आयोजित करें, अधिमानतः वर्ष में दो बार लगभग छह महीने के अंतराल पर, ताकि योग्य शिक्षकों को उत्तीर्ण होने के उचित अवसर मिल सकें।

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