CTET : सीटीईटी में 75 फीसदी फेल, देश के हजारों शिक्षकों की नौकरी का क्या होगा, TET कब तक पास करना अनिवार्य
सीटीईटी 2026 में कुल 23 लाख 24 हजार 625 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। ये परीक्षार्थी पेपर एक और पेपर दो की परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से केवल 5,97,061 अभ्यर्थी ही सफल हो पाए। सफलता का प्रतिशत 25.68% रहा।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) का परीक्षा डेटा जारी कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, कुल 23 लाख 24 हजार 625 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। ये परीक्षार्थी पेपर एक और पेपर दो की परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से केवल 5,97,061 अभ्यर्थी ही सफल हो पाए। सफलता का प्रतिशत 25.68% रहा। पेपर-दो की बात करें तो इसमें शामिल अभ्यर्थियों की तुलना में अभ्यर्थी अधिक असफल रहे।
पेपर-दो (कक्षा 6-8) में कुल 1867428 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से केवल 3,46,738 ही उत्तीर्ण हो सके। इस पेपर के लिए मात्र 18.56% ही अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की। वहीं, पेपर-एक (कक्षा 1-5) का परिणाम थोड़ा बेहतर रहा। इस पेपर में 10,65,410 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 3,58,937 अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की। बोर्ड ने कहा है कि यह डेटा परीक्षा की पारदर्शिता और विश्लेषण के उद्देश्य से जारी किया गया है। केन्द्र और राज्य स्तर के स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए सीटीईटी अनिवार्य योग्यता है।
क्वालिफाइंग सर्टिफिकेट डिजिलॉकर पर जल्द
उम्मीदवारों की मार्कशीट और क्वालिफाइंग सर्टिफिकेट भी जल्द ही डिजिलॉकर (DigiLocker) पर अपलोड कर दिए जाएंगे। उम्मीदवार सीटीईटी फरवरी – 2026 के अपने ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में दिए गए अपने मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके इन्हें डाउनलोड कर सकते हैं।
सीटीईटी क्या है
सीबीएसई हर साल दो बार सीटीईटी परीक्षा आयोजित करता है। सीटेट के पेपर -1 में भाग लेने वाले सफल उम्मीदवार कक्षा 1 से लेकर कक्षा 5 तक के लिए होने वाली शिक्षक भर्ती के लिए योग्य माने जाएंगे। जबकि पेपर -2 में बैठने वाले सफल अभ्यर्थी कक्षा 6 से 8वीं तक के लिए होने वाली शिक्षक भर्ती के लिए योग्य माने जाएंगे। इस परीक्षा को पास करने वाले परीक्षार्थी देशभर के केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और आर्मी स्कूलों में शिक्षकों के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।
देश के हजारों शिक्षकों की नौकरी पर तलवार
टीचरों को नौकरी में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश भर के हजारों प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। यूपी, झारखंड, एमपी व राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे लाखों शिक्षक हैं जो बगैर टीईटी पास किए वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अब इन टीचरों को 2 साल ( सितंबर 2025 - कोर्ट के फैसले की तिथि से ) में टीईटी पास करना ही होगा वरना या तो इन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर इन्हें जबरन रिटायर कर दिया जाएगा। इस कड़े फैसले से सिर्फ उन्हें छूट मिलेगी जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें भी अगर प्रमोशन चाहिए तो टीईटी पास करना ही पड़ेगा। सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किेए जाने के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु व यूपी समेत कई राज्य पुनर्विचार याचिका दायर कर चुके हैं।




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