TET : टीईटी अनिवार्यता व छूट पर जल्द आएगा आदेश, क्या अनुभव होगा पैमाना, शिक्षा मंत्री ने क्या दिए संकेत
मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता को लेकर उत्पन्न भ्रम की स्थिति पर कहा है कि एससी के आदेश को लेकर कुछ गलतफहमियां हैं और सरकार इस विषय पर स्पष्टता लाने के लिए प्रयासरत है।

मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता को लेकर उत्पन्न भ्रम की स्थिति पर कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लेकर कुछ गलतफहमियां हैं और सरकार इस विषय पर स्पष्टता लाने के लिए प्रयासरत है। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि न्यायालय के निर्देशानुसार वही शिक्षक पढ़ाएंगे जिन्होंने निर्धारित शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की है। जिन शिक्षकों ने अभी तक परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें यह परीक्षा देना आवश्यक होगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2005 से पहले नियुक्त शिक्षकों सहित कुछ श्रेणियों के शिक्षकों के संबंध में अलग स्थिति है,जिस पर सरकार विचार कर रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 50 से 60 हजार ऐसे शिक्षक हैं, जिन पर यह नियम लागू हो सकता है, लेकिन इसमें भी कई वर्ग जैसे माध्यमिक शिक्षक, खेल शिक्षक एवं अन्य विशेष श्रेणियां शामिल नहीं हैं। साथ ही हाल के वर्षों में नियुक्त वे शिक्षक, जिन्होंने पहले से पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है, उन्हें भी इससे छूट रहेगी।
अनुभव को ध्यान में रखते हुए सरकार कर रही कोर्ट से अनुरोध का विचार
मंत्री ने कहा कि जिन शिक्षकों ने पूर्व निर्धारित मापदंडों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है और लंबे समय से सेवा दे रहे हैं, उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए सरकार माननीय न्यायालय से अनुरोध करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षक वर्षों से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं और उन्होंने उस समय की सभी पात्रताओं को पूरा किया था।
किसी प्रकार के भ्रम में न आएं, बेकार के आंदोलन से बचें
सिंह ने शिक्षकों से अपील की कि वे किसी प्रकार के भ्रम में न आएं और अनावश्यक रूप से विरोध या आंदोलन से बचें। उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षक संगठन दोनों का उद्देश्य समान है और कानूनी दायरे में रहते हुए समाधान निकाला जाएगा।
शिक्षा विभाग नया आदेश जारी करेगा
मध्य प्रदेश में डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर असर डालने वाली TET परीक्षा को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग नया आदेश जारी करेगा। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नए आदेश में टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता और छूट की स्थिति स्पष्ट की जाए। आयुक्त ने कहा कि नए आदेश में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य होगी और किन्हें नियमानुसार छूट या सरलीकरण मिलेगा।
देश के लाखों शिक्षकों की नौकरी पर तलवार
टीचरों को नौकरी में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश भर के लाखों प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। यूपी, झारखंड, एमपी व राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे लाखों शिक्षक हैं जो बगैर टीईटी पास किए वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अब इन टीचरों को 2 साल ( सितंबर 2025 - कोर्ट के फैसले की तिथि से ) में टीईटी पास करना ही होगा वरना या तो इन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर इन्हें जबरन रिटायर कर दिया जाएगा। इस कड़े फैसले से सिर्फ उन्हें छूट मिलेगी जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें भी अगर प्रमोशन चाहिए तो टीईटी पास करना ही पड़ेगा। सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किेए जाने के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु व यूपी समेत कई राज्य पुनर्विचार याचिका दायर कर चुके हैं।




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