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जयपुर के वेदांत ने UPSC में गाड़ा झंडा, पिता इंजीनियर, मां प्रिंसिपल, दादा रह चुके हैं विश्वविद्यालय के कुलपति

जवाहरनगर जयपुर के वेदांत सिंह धाकड़ ने सिविल सेवा परीक्षा में 392वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान की भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय 'सेल्फ स्टडी' और तकनीक का सहारा लेकर यह मुकाम हासिल किया है।

Sat, 7 March 2026 06:00 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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जयपुर के वेदांत ने UPSC में गाड़ा झंडा, पिता इंजीनियर, मां प्रिंसिपल, दादा रह चुके हैं विश्वविद्यालय के कुलपति

कहते हैं कि अगर जड़ों में शिक्षा और संस्कारों का खाद-पानी हो, तो सफलता का वृक्ष विशाल ही होता है। जवाहरनगर जयपुर के वेदांत सिंह धाकड़ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में 392वीं रैंक हासिल कर इस बात को सच कर दिखाया है। वेदांत की यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान की भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय 'सेल्फ स्टडी' और तकनीक का सहारा लेकर यह मुकाम हासिल किया है।

शानदार शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पारिवारिक संबल

वेदांत एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां शिक्षा का गहरा प्रभाव है। उनके दादा प्रोफेसर बी.एल. वर्मा, कोटा विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति रहे हैं। घर में पढ़ाई-लिखाई का माहौल बचपन से ही था। उनके पिता यादवेन्द्र सिंह पेशे से इंजीनियर हैं और माता संध्या गहलोत एक निजी स्कूल में प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) के रूप में शिक्षा की अलख जगा रही हैं।

बीए एलएलबी के बाद प्रशासनिक सेवा का लक्ष्य

वेदांत ने अपनी उच्च शिक्षा बीए एलएलबी, जोधपुर से पूरी की। कानून की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें नीति-निर्माण और प्रशासन के जरिए समाज की सेवा करनी है। वर्तमान में वे दिल्ली-अंडमान निकोबार प्रशासनिक सेवा में एक प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

डिजिटल पढ़ाई और घर का कोना बना 'सक्सेस मंत्र'

अक्सर माना जाता है कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा के लिए दिल्ली के बड़े संस्थानों में नियमित कोचिंग जरूरी है, लेकिन वेदांत ने इस धारणा को तोड़ दिया। उन्होंने केवल जरूरत के अनुसार ऑनलाइन संसाधनों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया। किसी भी नियमित कोचिंग क्लास में जाकर समय बिताने के बजाय घर पर ही रहकर एकाग्रता के साथ तैयारी की।

सफलता का संदेश

वेदांत की सफलता उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी या बड़े शहरों में न जा पाने का बहाना बनाते हैं। घर के अनुशासित माहौल और माता-पिता के मार्गदर्शन में उन्होंने साबित कर दिया कि इंटरनेट के दौर में ज्ञान अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

वेदांत सिंह धाकड़ ने कहा, 'मेरे दादाजी और माता-पिता हमेशा से मेरी प्रेरणा रहे हैं। घर पर रहकर पढ़ाई करने से मुझे खुद का विश्लेषण करने का अधिक समय मिला और ऑनलाइन कोचिंग ने मेरी तैयारी की कमियों को दूर करने में मदद की।'

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राजस्थान से सफल हुए युवाओं के नाम

चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा निवासी डॉ. अनुज अग्निहोत्री - रैंक 1

बालोतरा - गौरव चौपड़ा 83, जितेंद प्रजापत 287

कोटा - माधवेन्द्र प्रताप सिंह 153

बूंदी - सौरभ शर्मा 146

बांसवाड़ा - निश्चल जैन 119

श्रीगंगानगर - प्रिंस सेठी 313

जयपुर - वेदांत सिंह धाकड़ 392, संभव पाटनी 608

खैरथल तिजारा - बादल यादव 635, नितिश यादव 237

हनुमानगढ़ - गरिमा शर्मा 460

बीकानेर - नीरज तई 180, अदिति अरोड़ा 351, सुनील सिद्ध 533, नमिता सोनी 557, डा. पुरुषोत्तम झोरड़ 691, हिमांशु वर्मा 779

चित्तौड़गढ़ - आनंद मैत्रेय 858।

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