PhD Theses of AI will be returned plagiarism ban registration cancelled UGC guidelines rules new PhD : पीएचडी थीसिस में AI दिखा तो लौटाई जाएगी, कितने फीसदी नकल पर लगेगा बैन, UGC ने जारी किए नियम, Career Hindi News - Hindustan
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PhD : पीएचडी थीसिस में AI दिखा तो लौटाई जाएगी, कितने फीसदी नकल पर लगेगा बैन, UGC ने जारी किए नियम

UGC PhD Guidelines : यूजीसी ने पीएचडी थीसिस में एआई के उपयोग और नकल पर सख्त नियम लागू किए हैं। 40 फीसदी से अधिक प्लेजरिज्म पर प्रतिबंध या पंजीकरण रद्द करने जैसी कार्रवाई हो सकती है।

Fri, 5 June 2026 09:20 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, कार्यालय संवाददाता, पटना
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PhD : पीएचडी थीसिस में AI दिखा तो लौटाई जाएगी, कितने फीसदी नकल पर लगेगा बैन, UGC ने जारी किए नियम

PhD UGC Guidelines : एआई के बढ़ते इस्तेमाल और रिसर्च कार्यों में इसके दुरुपयोग को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पीएचडी थीसिस की जांच को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं। यदि किसी थीसिस में 10 से 40 प्रतिशत तक नकल पाई जाती है, तो उसे संशोधन के लिए वापस कर दिया जाएगा। संशोधन के लिए लौटाई गई थीसिस को शोधार्थी छह माह के भीतर सुधार कर दोबारा जमा कर सकेंगे। यूजीसी के नियमों के अनुसार यदि किसी थीसिस में 40 से 60 प्रतिशत तक प्लेजरिज्म पाया जाता है, तो शोधार्थी को एक वर्ष तक थीसिस जमा करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। वहीं यदि साहित्यिक चोरी 60 प्रतिशत से अधिक पाई जाती है, तो शोधार्थी का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) रद्द किया जा सकता है।

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सुपरवाइजर पर भी होगी कार्रवाई

नियमों का उल्लंघन होने पर केवल शोधार्थी ही नहीं, बल्कि उनके पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) पर भी कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी थीसिस में बड़े स्तर पर साहित्यिक चोरी पाई जाती है या कोई शोधार्थी बार-बार ऐसा करता है, तो संबंधित सुपरवाइजर को नए शोधार्थियों का मार्गदर्शन करने से प्रतिबंधित किया जा सकता है। यहां तक कि उनकी सुपरवाइजर मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

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एआई कहां मंजूर और कहां नहीं

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार रूटीन कार्यों या व्याकरण संबंधी सुधार के लिए एआई का उपयोग स्वीकार्य होगा, लेकिन इसका उल्लेख शोधार्थियों को अपनी थीसिस में करना होगा। हालांकि शोध के निष्कर्ष, सारांश या डेटा विश्लेषण तैयार करने के लिए एआई से प्राप्त सामग्री का उपयोग स्वीकार्य नहीं होगा। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को इन नियमों से शोधार्थियों को अवगत कराने का निर्देश दिया है।

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पीपीयू ने एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पहले ही की थी चर्चा

पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (पीपीयू) ने अपनी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इस विषय पर पहले ही चर्चा की थी। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यूजीसी के दिशा निर्देशों के अनुरूप ही शोधार्थियों की थीसिस को साहित्यिक चोरी जांच नीति के तहत स्वीकृति प्रदान की जाएगी।

थीसिस अपलोड करने पर ही पीएचडी की डिग्री

पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के लिए अब शोधार्थियों को वाइवा परीक्षा के सात दिनों के अंदर अपनी थीसिस को शोधगंगा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। बिहार के पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने सभी शोधार्थियों के लिए यह नया नियम लागू कर दिया है। हाल ही में कुलाधिपति ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद पाटलिपुत्र विवि ने भी अधिसूचना जारी कर दी है। नियम का पालन नहीं करने पर पीएचडी अवार्ड की अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी और शोधार्थी को डिग्री नहीं मिलेगी। जारी अधिसूचना के अनुसार वाइवा की तिथि से एक सप्ताह के भीतर शोधार्थियों को थीसिस की पीडीएफ फाइल पेन ड्राइव में सुरक्षित कर एक आवेदन पत्र के साथ यूनिवर्सिटी के पीएचडी सेल में अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी। इसके बाद ही पीएचडी अवार्ड की अधिसूचना निर्गत की जाएगी।

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