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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए रजिस्ट्रार सत्यापित करेंगे PhD डिग्री, किन्हें मिलेगी UGC NET से छूट, समझें नियम

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए अब पीएचडी डिग्री को रजिस्ट्रार से सत्यापित कराना होगा। रजिस्ट्रार के नहीं होने पर संकाय अध्यक्ष द्वारा सत्यापन किया जाएगा। पीएचडी करने वाले छात्रों को यह बताना होगा कि डिग्री रेगुलर मोड में ली गई है।

Thu, 12 March 2026 07:51 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, प्रमुख संवाददाता, मुजफ्फरपुर
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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए रजिस्ट्रार सत्यापित करेंगे PhD डिग्री, किन्हें मिलेगी UGC NET से छूट, समझें नियम

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए अब पीएचडी डिग्री को रजिस्ट्रार से सत्यापित कराना होगा। रजिस्ट्रार के नहीं होने पर संकाय अध्यक्ष द्वारा सत्यापन किया जाएगा। असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए तैयार ड्राफ्ट में यह प्रावधान किया गया है। नियुक्ति के लिए पीएचडी का अब पांच बिंदुओं पर सत्यापन किया जाएगा। पीएचडी करने वाले छात्रों को यह बताना होगा कि डिग्री रेगुलर मोड में ली गई है। छात्रों को यह भी सत्यापित करना होगा कि पीएचडी में दो बाह्य परीक्षक शामिल हुए थे। उन्हें यी भी सत्यापित करना होगा कि पीएचडी के दौरान खुली मौखिकी हुई थी या नहीं, दो रिसर्च पेपर रेफर्ड जर्नल में प्रकाशित हुए हैं या नहीं? इसके अलावा, यह भी देखा जाएगा कि छात्र ने यूजीसी या सीएसआईआर या इसके समकक्ष की तरफ से आयोजित होने वाले सेमिनार में प्रस्तुति दी है या नहीं।

500 विदेशी विश्वविद्यालयों से पीएचडी की गई मान्य

नए ड्राफ्ट में कहा गया कि जिन छात्रों ने विदेशी विश्वविद्यालयों से पीएचडी की है, वे भी इसमें शामिल हो सकते हैं। विश्व की टॉप 500 विवि को नियुक्ति प्रक्रिया में मान्य किया गया है। इन छात्रों को नेट (UGC NET ) की जरूरत नही होगी। इसके अलावा, जिन विषयों में नेट की परीक्षा नहीं होती, उनके छात्रों को भी नेट से छूट दी गई है। म्यूजिक, नाट्य शास्त्र जैसे विषयों को यूजीसी के नियमों के अनुसार देखा जाएगा।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सहायक प्राध्यापक के लिए बने नए ड्राफ्ट का विरोध किया है। विद्यार्थी परिषद के कार्यालय मंत्री श्रीनिवास ने कहा कि इससे योग्य अभ्यर्थियों का नुकसान होगा। शिक्षा व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ेगा। यूजीसी का रेगुलेशन 2018 कहता है कि सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति नेट, अकादमिक रिकार्ड और साक्षात्कार पर होनी चाहिए। इसके बाद भी लिखित परीक्षा का प्रारूप यूजीसी के प्रावधानों का उल्लंघन है।

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की नई नियमावली के अन्य प्रावधान

राजभवन ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की नई नियमावली के मसौदे पर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को उनके हस्ताक्षर और सुझाव के लिए भेजा है। इसके तहत 160 अंकों की लिखित परीक्षा और 40 अंकों का साक्षात्कार प्रस्तावित है। सभी कुलपतियों की सहमति के बाद यह नियमावली जल्द ही लागू कर दी जाएगी।

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क्या होगी योग्यता

यूजीसी या सीएसआईआर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण करनी होगी, या यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त समान स्तर की राष्ट्रीय परीक्षा, अथवा बिहार सरकार द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (स्लेट/सेट) या उसके द्वारा अधिकृत किसी एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। बशर्ते कि संबंधित विषय में पीएच.डी. डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी, यदि उनकी डिग्री विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एम.फिल./पीएच.डी. डिग्री प्रदान करने के न्यूनतम मानक और प्रक्रिया विनियम, 2009 या 2016 तथा समय-समय पर किए गए संशोधनों के अनुसार प्राप्त की गई है, तो उन्हें नेट, स्लेट या सेट से छूट दी जा सकती है। यह भी प्रावधान है कि जिन अभ्यर्थियों ने 11 जुलाई 2009 से पहले पीएच.डी. कार्यक्रम में पंजीकरण कराया था, वे उस समय लागू संस्थान के अध्यादेश/उपनियम/नियमों के अनुसार शासित होंगे।

प्रस्तावित नियमावली के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए कुल 200 अंकों की चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। लिखित परीक्षा वर्णनात्मक (डिस्क्रिप्टिव) प्रकृति की होगी। इससे अभ्यर्थियों के विषय ज्ञान और विश्लेषणात्मक क्षमता का आकलन किया जा सकेगा। मसौदे में न्यूनतम आयु 23 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके साथ ही चयन प्रक्रिया में अनुभव को कोई अलग अंक नहीं दिया जाएगा। इसी प्रकार नेट, जेआरएफ और पीएचडी जैसी योग्यताओं को केवल पात्रता के रूप में माना जाएगा, लेकिन इनके लिए अलग से अंक देने का प्रावधान नहीं रखा गया है। बहाली प्रक्रिया बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से होगी। साक्षात्कार में शामिल सभी सदस्य प्रोफेसर रैंक के ही होंगे।

ऐसे पीएच.डी. अभ्यर्थियों को भी नेट/राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (स्लेट/सेट) से छूट दी जाएगी, बशर्ते वे निम्नलिखित शर्तों को पूरा करते हों:

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अभ्यर्थी की पीएच.डी. डिग्री नियमित (रेगुलर) में प्रदान की गई हो

पीएच.डी. शोधप्रबंध का मूल्यांकन कम से कम दो बाहरी परीक्षकों द्वारा किया गया हो

अभ्यर्थी का ओपन पीएच.डी. वाइवा-वोसे (मौखिक परीक्षा) आयोजित किया गया हो

अभ्यर्थी ने अपने पीएच.डी. शोधकार्य से संबंधित दो शोध पत्र प्रकाशित किए हों, जिनमें से कम से कम एक शोध पत्र रेफरीड जर्नल में प्रकाशित हो

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अभ्यर्थी ने अपने पीएच.डी. कार्य पर आधारित कम से कम दो शोध पत्र ऐसे सम्मेलन/सेमिनार में प्रस्तुत किए हों, जो यूजीसी / आईसीएसएसआर / सीएसआईआर या किसी समान एजेंसी द्वारा प्रायोजित/वित्तपोषित/समर्थित हों।

इन सभी शर्तों की पूर्ति का प्रमाण संबंधित विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार या डीन (एकेडमिक अफेयर्स/संबंधित संकाय) द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।

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