मेडिकल छात्रों की 3 बड़ी सिरदर्दी का एक ही इलाज? जानिए AIIMS के डॉक्टरों ने क्यों छेड़ी NExT परीक्षा की मुहिम
एम्स और आरएमएल के डॉक्टरों ने एमबीबीएस छात्रों के लिए जल्द से जल्द NExT परीक्षा लागू करने की मांग की है।

भारत में डॉक्टर बनना कोई आसान काम नहीं है। सालों की कड़ी मेहनत, रातों की नींद और न जाने कितने इम्तिहान पास करने के बाद एक छात्र सफेद कोट पहन पाता है। लेकिन हकीकत यह है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद भी उनका संघर्ष खत्म नहीं होता। एमबीबीएस के छात्रों को अलग-अलग स्तर पर कई तरह की परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। अब इस पुरानी और उलझी हुई व्यवस्था को बदलने की मांग तेज हो गई है। दिल्ली एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA), छात्र संघ और एम्स के अन्य सेंटरों (जैसे नागपुर और पटना) के साथ-साथ आरएमएल (RML) अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने सरकार से 'नेशनल एग्जिट टेस्ट' यानी NExT को जल्द से जल्द लागू करने की पुरजोर वकालत की है। डॉक्टरों का मानना है कि यह परीक्षा मेडिकल शिक्षा में एक बहुत बड़ी और जरूरी क्रांति लाएगी।
आखिर इस नई परीक्षा की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? 'जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर' में पिछले महीने छपे एक संपादकीय में इस मुद्दे पर गहराई से बात की गई है। लेख में डॉक्टरों ने साफ कहा है कि आज के दौर में अंडरग्रेजुएट मेडिकल परीक्षाएं बहुत ही बिखरी हुई और असंतुलित हैं। हर यूनिवर्सिटी का परीक्षा लेने का अपना अलग तरीका है, जिससे देश भर के छात्रों के हुनर का सही और एक समान आकलन नहीं हो पाता। मौजूदा परीक्षाएं उस कम्पेटेंसी-बेस्ड ट्रेनिंग से बिल्कुल मेल नहीं खातीं, जिसकी एक अच्छे डॉक्टर से उम्मीद की जाती है। इसी खामी को दूर करने के लिए NExT का विचार सामने लाया गया था।
क्या है NExT और यह कैसे बदलेगा सिस्टम?
आपको बता दें कि NExT का जिक्र पहली बार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) अधिनियम, 2019 में किया गया था। बाद में 2023 के एक गजट नोटिफिकेशन में इसके नियम-कानूनों को विस्तार से समझाया गया। आसान लफ्जों में समझें तो यह एक 'सिंगल नेशनल क्वालिफाइंग एग्जाम' होगा। यह अकेला इम्तिहान तीन पुरानी परीक्षाओं की छुट्टी कर देगा, जिसमें एमबीबीएस फाइनल ईयर की परीक्षा, पीजी दाखिले के लिए होने वाला NEET-PG और विदेश से पढ़कर आने वाले डॉक्टरों के लिए होने वाला FMGE टेस्ट शामिल है। अब इन तीनों के लिए छात्रों को सिर्फ एक ही टेस्ट देना होगा।
यह परीक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगी। इसके दो अहम हिस्से होंगे। NExT स्टेप 1 के स्कोर का इस्तेमाल न सिर्फ पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स में दाखिले के लिए होगा, बल्कि सरकारी नौकरियों, फेलोशिप और स्कॉलरशिप के मौकों के लिए भी यही स्कोर मान्य होगा। इससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और मनमानी खत्म होगी। वहीं, NExT स्टेप 2 पूरी तरह से छात्रों के प्रैक्टिकल हुनर और मरीजों से बातचीत करने के तरीके (कम्युनिकेशन स्किल्स) को परखेगा। हालांकि इसका पूरा खाका आना अभी बाकी है, लेकिन यह असल जिंदगी में अस्पताल में लिए जाने वाले मेडिकल फैसलों की तरह ही होगा।
छात्रों का बोझ कम और जनता का भरोसा ज्यादा
इस एक परीक्षा से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि छात्रों के सिर से कई अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी का भारी मानसिक बोझ कम हो जाएगा। लेख के लेखकों का कहना है कि जब देश के सभी मेडिकल छात्रों को एक ही राष्ट्रीय पैमाने पर परखा जाएगा, तो इससे जनता का डॉक्टरों पर भरोसा भी बढ़ेगा। मरीज को यह तसल्ली रहेगी कि उसका इलाज करने वाला डॉक्टर एक तय और बेहतरीन मापदंड को पार करके आया है, चाहे उसने देश के किसी भी कोने से पढ़ाई की हो। नए और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के लिए भी यह खुद को साबित करने का एक बेहतरीन मौका होगा कि वे कितनी अच्छी शिक्षा दे रहे हैं, क्योंकि उनके छात्रों का प्रदर्शन सीधे तौर पर दिखेगा।
इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों की गलतियों से सबक
डॉक्टरों ने अपने लेख में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और डेंटल एजुकेशन का उदाहरण देते हुए एक बड़ी चेतावनी भी दी है। पिछले बीस सालों में इन क्षेत्रों में तेजी से कॉलेज तो खुले, लेकिन सही मूल्यांकन न होने की वजह से पढ़ाई का स्तर गिर गया। कई संस्थान सिर्फ डिग्रियां बांटने की दुकान बनकर रह गए और आखिरकार उनमें से कइयों को ताला लगाना पड़ा। मेडिकल के पेशे में ऐसी लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि यहां सीधा सवाल इंसान की जिंदगी से जुड़ा होता है। कमजोर ट्रेनिंग किसी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। NExT एक ऐसा न्यूनतम राष्ट्रीय मापदंड तय करेगा, जिसे हर डॉक्टर को पार करना ही होगा।




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