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बिना कोचिंग पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक, लघिमा तिवारी ने कैसे पाई 19वीं रैंक?

ias laghima tiwari upsc success story: राजस्थान के अलवर की रहने वाली लघिमा तिवारी ने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया 19वीं रैंक हासिल कर एक शानदार मिसाल कायम की है।

Sun, 5 April 2026 10:30 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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बिना कोचिंग पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक, लघिमा तिवारी ने कैसे पाई 19वीं रैंक?

ias laghima tiwari upsc success story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा का नाम सुनते ही अच्छे अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। इसे हमारे मुल्क के सबसे कड़े और चुनौतीपूर्ण इम्तिहानों में शुमार किया जाता है। हर साल देश भर से लाखों नौजवान आईएएस और आईपीएस बनने का ख्वाब अपनी आंखों में सजाए इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं और दिन रात एक कर देते हैं। लेकिन कामयाबी का सेहरा उन चंद ही लोगों के सिर बंधता है, जिनकी लगन सच्ची होती है। इस परीक्षा को पास करने का सबसे अचूक मंत्र सिर्फ और सिर्फ पक्का इरादा और लगातार की गई कड़ी मेहनत है। अगर आपका हौसला बुलंद हो, तो रास्ते की हर अड़चन छोटी लगने लगती है। बिल्कुल इसी बात को सच कर दिखाया है राजस्थान के अलवर की रहने वाली लघिमा तिवारी ने। लघिमा ने बिना किसी कोचिंग के, अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी 2022 की परीक्षा में ऑल इंडिया 19वीं रैंक (AIR 19) हासिल कर एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो आज लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

बिना कोचिंग की यूपीएससी की तैयारी

लघिमा की तालीम की बात करें, तो उन्होंने प्रतिष्ठित दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। साल 2021 में अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई मुकम्मल करने के बाद, उन्होंने किसी कॉरपोरेट जॉब के पीछे भागने के बजाय अपना पूरा ध्यान और ऊर्जा यूपीएससी की तैयारी पर लगा दी। अक्सर लोगों के बीच यह धारणा होती है कि इतनी बड़ी परीक्षा बिना किसी नामी गिरामी कोचिंग सेंटर के पास नहीं की जा सकती। लेकिन लघिमा ने अपनी शानदार रणनीति और पक्के इरादे से इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो बिना भारी भरकम फीस चुकाए भी यूपीएससी जैसे मुश्किल इम्तिहान में कामयाबी का परचम लहराया जा सकता है। करीब एक साल तक उन्होंने खुद को दुनिया की चकाचौंध से दूर रखा और पूरे अनुशासन के साथ पढ़ाई में जुटी रहीं।

पढ़ाई के लिए क्या अपनाई रणनीति

अपनी सफलता के राज खोलते हुए लघिमा बताती हैं कि तैयारी के दौरान उनका सबसे बड़ा हथियार बनी उनकी खुद की बनाई हुई साफ सुथरी और स्पष्ट रणनीति। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि तैयारी के शुरुआती दिनों में दिशा तय करने के लिए उन्होंने यूट्यूब का भरपूर इस्तेमाल किया। उन्होंने यूट्यूब पर कई यूपीएससी टॉपर्स के इंटरव्यू बारीकी से देखे और सुने। उन इंटरव्यूज से उन्हें यह समझने में काफी मदद मिली कि तैयारी का सही रास्ता क्या होना चाहिए। जनरल स्टडीज, करंट अफेयर्स और स्टैटिक सब्जेक्ट्स को किस तरह से कवर करना है, इसका पूरा खाका उन्होंने टॉपर्स के तजुर्बे से सीखा। लघिमा ने इस लंबे सफर में किसी कोचिंग संस्थान का दरवाजा नहीं खटखटाया, बल्कि सेल्फ स्टडी और टेस्ट सीरीज को ही अपना सबसे भरोसेमंद साथी बनाया। लगातार प्रैक्टिस करने और नियमित रूप से मॉक टेस्ट देने से उनकी तैयारी दिन ब दिन निखरती चली गई और यही उनकी कामयाबी की असली चाबी साबित हुई।

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निरंतरता यानी कंसिस्टेंसी बेहद जरूरी

जो उम्मीदवार इस वक्त यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए निरंतरता यानी कंसिस्टेंसी बनाए रखने की लघिमा की एक बेहद अहम और काम की सलाह है। उनका साफ मानना है कि आप भले ही दिन में थोड़े कम घंटे पढ़ाई करें, लेकिन हर दिन पढ़ें। पढ़ाई के शेड्यूल में कोई गैप नहीं आना चाहिए। लगातार पढ़ने और बार बार रिवीजन करने से विषयों पर पकड़ मजबूत होती है, कॉन्फिडेंस बढ़ता है और परीक्षा के नतीजे भी बेहतर आते हैं। इसके अलावा, वो एक और जरूरी बात पर जोर देती हैं कि प्रीलिम्स परीक्षा देने के बाद नतीजों का इंतजार करने में वक्त बिल्कुल बर्बाद नहीं करना चाहिए। उम्मीदवारों को प्रीलिम्स खत्म होते ही फौरन मेन्स की तैयारी में जुट जाना चाहिए, क्योंकि मेन्स के सिलेबस में बहुत गहराई से चीजों को पढ़ना और लिखना पड़ता है।

ऑप्शनल सब्जेक्ट के लिए क्या अपनाई रणनीति

विषयों के चुनाव को लेकर भी लघिमा की सोच काफी स्पष्ट रही। उन्होंने यूपीएससी मेन्स के लिए एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना था। हालांकि उनका मुख्य बैकग्राउंड इंजीनियरिंग का था, लेकिन स्कूल के दिनों में 9वीं से 12वीं तक उन्होंने बायोलॉजी पढ़ी थी। अपनी इसी बुनियादी समझ का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने एंथ्रोपोलॉजी में शानदार प्रदर्शन किया। यह बात इस ओर भी इशारा करती है कि अगर आप किसी विषय में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपका बैकग्राउंड चाहे जो भी हो, आप उसमें महारत हासिल कर सकते हैं। अपनी इस ऐतिहासिक कामयाबी का पूरा श्रेय लघिमा अपने माता पिता और परिवार को देती हैं। वह अपने परिवार की पहली ऐसी सदस्य हैं, जिन्होंने सिविल सेवा में कदम रखा है और पूरे देश में अपने परिवार के साथ साथ अपने शहर अलवर का नाम भी रोशन किया है।

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