NEET UG: physiotherapy bpt and bot courses NCAHP Admissions through NEET scores but tamil nadu cm protest NEET UG : अब फिजियोथैरेपी समेत 2 और कोर्स के दाखिले नीट स्कोर से, पर विरोध क्यों, क्या हैं योग्यता नियम, Career Hindi News - Hindustan
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NEET UG : अब फिजियोथैरेपी समेत 2 और कोर्स के दाखिले नीट स्कोर से, पर विरोध क्यों, क्या हैं योग्यता नियम

NEET UG : अब नीट यूजी स्कोर से बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (बीपीटी) और बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (बीओटी) कोर्स में भी दाखिले होंगे। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसका कड़ा विरोध किया है।

Tue, 27 Jan 2026 06:57 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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NEET UG : अब फिजियोथैरेपी समेत 2 और कोर्स के दाखिले नीट स्कोर से, पर विरोध क्यों, क्या हैं योग्यता नियम

NEET UG : अब देश में बीपीटी यानी बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी और बीओटी यानी बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी कोर्स में दाखिले भी नीट यूजी स्कोर से होंगे। नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) ने नोटिस जारी कर इसकी जानकारी दे दी है। एनसीएएचपी ने नीट यूजी कराने वाली परीक्षा एजेंसी एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) को पत्र लिख इसकी डिटेल्स दे दी है जिसमें बीपीटी और बीओटी के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता का जिक्र भी किया गया है। ये व्यवस्था पूरे देशभर में लागू होगी। एडमिशन एकेडमिक ईयर 2026-27 से शुरू होंगे। हालांकि कुछ माह पहले एनसीएएचपी ने पैरामेडिकल के कुल 13 कोर्सों में दाखिला के लिए नीट को अनिवार्य करने का फैसला किया था। 13 कोर्सों में यूजी और पीजी में दाखिला नीट के स्कोर के आधार पर होने थे। लेकिन अब आखिरकार केवल दो कोर्स बीपीटी और बीओटी को नीट के दायरे में लाने का फैसला लिया गया है।

आपको बता दें कि एनटीए हर वर्ष नीट यूजी परीक्षा आयोजित करता है। नीट यूजी से देश भर में एमबीबीएस, बीएएमस, बीयूएमस, बीएसएमएस और बीएचएमस, बैचलर ऑफ डेंटल स्टडीज (बीडीएस) और बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबैंड्री (बीवीएससी एंड एएच) कोर्सेज में दाखिले होते हैं। बहुत से संस्थानों में बीएससी नर्सिंग में दाखिला भी नीट यूजी स्कोर से होता है।

इन 13 कोर्सेज में दाखिला नीट से होना था लेकिन अब केवल दो में मायने होगा नीट यूजी स्कोर

फिजियोथेरेपी (BPT)

इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट (पैरामेडिक), बर्न केयर टेक्नोलॉजिस्ट और एडवांस केयर पैरामेडिक

ऑक्यूपेशनल थेरेपी

मेडिकल लैबोरेटरी साइंसेज

एप्लाइड साइकोलॉजी और बिहेवियरल हेल्थ

ऑप्टोमेट्री

न्यूट्रिशन और डायटेटिक्स

डायलिसिस थेरेपी टेक्नोलॉजी और डायलिसिस थेरेपी

रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी

मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी

एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी

हेल्थ इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट

फिजिशियन एसोसिएट्स

बीपीटी और बीओटी को छोड़कर अन्य पैरामेडिकल कोर्सेज में दाखिले कैसे होंगे

एनसीएएचपी ने यह साफ कर दिया है कि बीपीटी और बीओटी को छोड़कर अन्य पैरामेडिकल कोर्सेज में दाखिले संबंधित राज्य या संबंधित यूनिवर्सिटी कराएगी। प्राइवेट यूनिवर्सिटी बीपीटी और बीओटी को छोड़कर अन्य पैरामेडिकल कोर्सेज में दाखिले अपने स्तर पर लेंगे।

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क्या हैं बीपीटी और बीओटी के योग्यता नियम

बीपीटी- पांच वर्षीय कोर्स (चार वर्ष प्लस एक साल की इंटर्नशिप)

- फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी (बॉटनी या जूलॉजी) के साथ 12वीं पास हो। एग्रीगेट 50 फीसदी हो (एससी एसटी व ओबीसी वर्ग के लिए 40 फीसदी)। इंग्लिश विषय में पास होना भी अनिवार्य।

- नीट यूजी का स्कोर हो।

बीओटी - पांच वर्षीय कोर्स (चार वर्ष प्लस एक साल की इंटर्नशिप)

- फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी (बॉटनी या जूलॉजी) के साथ 12वीं पास हो। एग्रीगेट 50 फीसदी हो (एससी एसटी व ओबीसी वर्ग के लिए 40 फीसदी)। इंग्लिश विषय में पास होना भी अनिवार्य।

- नीट यूजी का स्कोर हो।

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने किया विरोध

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करें कि बीपीटी और बीओटी दाखिलों से नीट को अलग रखा जाये और कहा कि प्रवेश संबंधी तौर-तरीके राज्यों के अधिकार क्षेत्र में ही रहने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि नीट में मात्र उपस्थित होना योग्यता का मानदंड तय करना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक पात्रता या तो परीक्षा पास करने अथवा उसमें ज्यादा अंक प्राप्त करने के आधार पर निर्धारित की जाती है।

कोचिंग कल्चर को बढ़ावा मिलेगा

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा, ‘केवल उपस्थिति अनिवार्य करने का कोई अकादमिक औचित्य नहीं है और ऐसा लगता है कि इसे समाज में नीट को सामान्य बनाने और उसका विस्तार करने के लिए ही बनाया गया है। इससे देश के लाखों लोगों को कोचिंग लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।’ मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा, ‘इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, मैं आपके व्यक्तिगत हस्तक्षेप की उम्मीद करता हूं।’ उन्होंने दावा किया कि राज्यों से, जो संवैधानिक रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों के प्रभारी हैं, इस नवीनतम कदम पर परामर्श नहीं किया गया। स्टालिन ने कहा, ‘यह हमें बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।’

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