MBBS degree holders Do Not Have Exclusive Right To Use Prefix Dr doctor phd logic : High Court क्या MBBS वाले ही नाम के साथ डॉक्टर लगा सकते है, कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, PhD डिग्री का भी दिया तर्क, Career Hindi News - Hindustan
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क्या MBBS वाले ही नाम के साथ डॉक्टर लगा सकते है, कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, PhD डिग्री का भी दिया तर्क

केरल हाईकोर्ट ने मेडिकल प्रोफेशनल्स की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट की ओर से अपने नाम के साथ डॉ लगाए जाने को चुनौती दी थी।

Tue, 27 Jan 2026 03:04 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, कोच्चि
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क्या MBBS वाले ही नाम के साथ डॉक्टर लगा सकते है, कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, PhD डिग्री का भी दिया तर्क

केरल हाईकोर्ट ने मेडिकल प्रोफेशनल्स की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट की ओर से अपने नाम के साथ डॉ लगाए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) एक्ट में एमबीबीएस ग्रेजुएट्स के लिए प्रीफिक्स डॉक्टर या डॉ के इस्तेमाल का कोई प्रावधान नहीं है। जस्टिस वी जी अरुण ने कहा कि डॉक्टर शब्द का इस्तेमाल शुरू में ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता था जिसने सीखने के उच्चतम स्तर को हासिल किया हो और जिसे धर्मशास्त्र, कानून और दर्शन जैसे क्षेत्रों में पढ़ाने का लाइसेंस मिला हो।

कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर शब्द का असल मतलब एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति था जो पढ़ाने के लिए योग्य हो, लेकिन धीरे-धीरे, मेडिकल साइंस में प्रगति के साथ, यूनिवर्सिटी से पढ़े-लिखे डॉक्टरों - जिनके पास मेडिसिन में डिग्री थी - को डॉक्टर कहा जाने लगा। कोर्ट ने कहा, 'इसलिए यह दावा कि डॉक्टर की उपाधि विशेष रूप से मेडिकल प्रोफेशनल्स की है, एक गलतफहमी है, क्योंकि अब भी पुराने समय की तरह पीएचडी जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता वाले लोग डॉक्टर की उपाधि का इस्तेमाल करने के हकदार हैं।'

कोर्ट ने आगे कहा कि एनएमसी एक्ट में योग्य मेडिकल प्रोफेशनल्स को डॉक्टर की उपाधि देने का कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि केरल राज्य मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट की धारा 40 में इस्तेमाल किए गए उपाधि शब्द को कानूनी तौर पर योग्य मेडिकल प्रोफेशनल्स को उनके नाम के आगे 'डॉ. लगाने का अधिकार देने के रूप में नहीं समझा जा सकता। कोर्ट ने कहा, 'ऐसे प्रावधान के अभाव में, याचिकाकर्ता (डॉक्टर) डॉ शब्द का इस्तेमाल करने के विशेष अधिकार का दावा नहीं कर सकते।'

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एनसीएएचपी एक्ट के प्रावधानों को करने से भी इनकार

कोर्ट ने नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन (NCAHP) एक्ट, 2021 के प्रावधानों को कम करने से भी इनकार कर दिया, ताकि एनएमसी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड योग्य मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट द्वारा पेशेवर सेवाओं के दायरे को एक सहायक समूह के रूप में सीमित किया जा सके। कोर्ट ने कहा कि कुछ मेडिकल प्रोफेशनल्स के कहने पर केंद्र सरकार की नीति में छेड़छाड़ करना या एनसीएएचपी एक्ट या फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी के लिए कॉम्पिटेंसी बेस्ड करिकुलम के प्रावधानों को कम करना कतई ठीक नहीं होगा।

मामला कब उठा था

यह मामला तब उठा जब पिछले साल नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन (NCAHP) ने फिजियोथेरेपिस्ट के लिए डॉ शब्द इस्तेमाल करने की सिफारिश की थी। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने आईएमए के नेशनल प्रेसिडेंट, डॉ. दिलीप भानुशाली को लिखे एक पत्र में कहा था कि 'डॉ. शब्द का इस्तेमाल करके फिजियोथेरेपिस्ट इंडियन मेडिकल डिग्री एक्ट, 1916 का कानूनी उल्लंघन करेंगे। डीजीएचएस ने यह निर्देश आईएपीएमआर सहित कई संगठनों से डॉ प्रीफिक्स इस्तेमाल के बारे में कई प्रतिक्रियाओं और कड़ी आपत्तियां मिलने के बाद जारी किया था। हालांकि सिर्फ एक दिन बाद डीजीएचएस ने अपने पहले के पत्र को वापस लेने की घोषणा की।

मामला कब उठा था

यह मामला तब उठा जब पिछले साल नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन (NCAHP) ने फिजियोथेरेपिस्ट के लिए डॉ शब्द इस्तेमाल करने की सिफारिश की थी। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने आईएमए के नेशनल प्रेसिडेंट, डॉ. दिलीप भानुशाली को लिखे एक पत्र में कहा था कि 'डॉ. शब्द का इस्तेमाल करके फिजियोथेरेपिस्ट इंडियन मेडिकल डिग्री एक्ट, 1916 का कानूनी उल्लंघन करेंगे। डीजीएचएस ने यह निर्देश आईएपीएमआर सहित कई संगठनों से डॉ प्रीफिक्स इस्तेमाल के बारे में कई प्रतिक्रियाओं और कड़ी आपत्तियां मिलने के बाद जारी किया था। हालांकि सिर्फ एक दिन बाद डीजीएचएस ने अपने पहले के पत्र को वापस लेने की घोषणा की।

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