MBBS में दाखिले के लिए हुए NEET UG परीक्षा को लेकर बवाल, हिंदी मीडियम के छात्रों को थमा दिया अंग्रेजी का पेपर
पलामू जिले मेदिनीनगर के एक परीक्षा केंद्र पर NEET UG एग्जाम में भारी हंगामा हो गया जब हिंदी मीडियम के छात्रों को अंग्रेजी का पेपर दे दिया गया, हालांकि बाद में परीक्षा पूरी कराई गई।

झारखंड के पलामू जिले के मेदिनीनगर से एक बेहद हैरान करने वाली और छात्रों की धड़कनें बढ़ा देने वाली खबर सामने आई है। देश की सबसे कठिन और अहम मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी (NEET UG) देने पहुंचे छात्रों के पैरों तले उस वक्त जमीन खिसक गई, जब उन्हें एग्जाम हॉल में गलत भाषा का क्वेश्चन पेपर थमा दिया गया। जरा सोचिए, एक होनहार छात्र जिसने अपना पूरा साल हिंदी माध्यम में पढ़ाई करते हुए खपा दिया हो और परीक्षा की घड़ी में उसके सामने अंग्रेजी भाषा का पेपर आ जाए, तो उसकी मानसिक स्थिति क्या होगी? बिल्कुल ऐसा ही कुछ रविवार को पलामू के मेदिनीनगर के एक एग्जाम सेंटर पर देखने को मिला। इस भयंकर लापरवाही के चलते परीक्षा केंद्र पर भारी अफरा-तफरी मच गई और छात्रों ने व्यवस्था के खिलाफ जमकर अपना आक्रोश जाहिर किया।
रिपोर्ट्स की मानें तो यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा मेदिनीनगर के जाने-माने योध सिंह नामधारी महिला कॉलेज का है। यहां नीट यूजी का सेंटर पड़ा था और बच्चे पूरी तैयारी के साथ डॉक्टर बनने का सपना आंखों में लिए परीक्षा हॉल में बैठे थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था। लेकिन जैसे ही पेपर बांटने का वक्त आया और सील खुली, तो कई छात्रों के चेहरों का रंग उड़ गया। असल में, जिन छात्रों ने फॉर्म भरते समय साफ तौर पर हिंदी मीडियम का विकल्प चुना था, वहां मौजूद मैनेजमेंट ने उन्हें अंग्रेजी भाषा के प्रश्न पत्र बांट दिए। यह देखते ही छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने तुरंत इस बात का विरोध दर्ज कराया और देखते ही देखते शांत परीक्षा हॉल में भारी हंगामा शुरू हो गया। छात्रों और वहां मौजूद स्टाफ के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। छात्रों का सीधा आरोप था कि यह उनके भविष्य और करियर के साथ एक भद्दा मजाक है और मैनेजमेंट की एक ऐसी चूक है जिसे कतई माफ नहीं किया जा सकता।
NTA ने साधा संपर्क
हालात इतने बेकाबू हो गए कि मामले की भनक फौरन स्थानीय प्रशासन के कानों तक पहुंच गई। बिना कोई भी वक्त बर्बाद किए, जिले के आला अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। केंद्र के अंदर और बाहर का माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ था। बाहर खड़े अभिभावक भी घबरा रहे थे कि आखिर अंदर चल क्या रहा है। जो परीक्षा अपने तय समय यानी दोपहर 2 बजे शुरू होकर शाम 5 बजकर 20 मिनट पर खत्म होनी थी, वह इस बवाल की वजह से बुरी तरह से लटक गई। इसके बाद अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के बड़े अधिकारियों और कंट्रोल रूम से तुरंत संपर्क साधा गया।
कैसे निकला इस पेचीदगी का हल
काफी लंबी जद्दोजहद और सीधे NTA के दखल के बाद आखिरकार इस पेचीदा मसले का हल निकाला गया। आला अधिकारियों के निर्देश के बाद छात्रों को उनकी चुनी हुई भाषा यानी हिंदी का सही पेपर उपलब्ध कराया गया। शाम 6 बजे के बाद एक बार फिर से परीक्षा की प्रक्रिया पटरी पर लौटी और छात्रों ने अपना एग्जाम देना शुरू किया। तब जाकर घंटों से टेंशन में बैठे छात्रों और चिलचिलाती धूप में बाहर इंतजार कर रहे उनके माता-पिता ने राहत की एक बड़ी सांस ली। इस पूरे बवाल पर स्थिति साफ करते हुए पलामू की एसडीएम (SDM) सुलोचना मीना ने बताया कि यह सारी परेशानी दरअसल एक 'तकनीकी गड़बड़ी' (टेक्निकल एरर) की वजह से पैदा हुई थी। इसी एरर के चलते पैकेट में गलत प्रश्न पत्र आ गए थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस गलती को वक्त रहते सुधार लिया गया और सभी उम्मीदवारों ने शांतिपूर्ण माहौल में अपना एग्जाम पूरा किया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पलामू जिले में इस साल नीट एग्जाम के लिए कुल चार सेंटर बनाए गए थे। इनमें केजी गर्ल्स स्कूल, जिला स्कूल, गिरिवर हाई स्कूल और यह महिला कॉलेज शामिल था। यह प्रशासन के लिए एक बड़ी गनीमत रही कि इतनी बड़ी चूक सिर्फ महिला कॉलेज सेंटर पर ही हुई। बाकी तीनों सेंटर्स पर परीक्षा बिना किसी रुकावट के, अपने तय समय पर शांति से निपट गई। मामले की नजाकत और परीक्षा की अहमियत को देखते हुए जिले के उपायुक्त (DC) दिलीप प्रताप सिंह शेखावत और पुलिस अधीक्षक (SP) कपिल चौधरी खुद देर शाम तक सेंटर पर डटे रहे। वे अपनी निगरानी में पूरी प्रक्रिया संपन्न करवा रहे थे ताकि परीक्षा में कोई और अड़चन न आए और उसकी साख पर कोई बट्टा न लगे। भले ही एग्जाम पूरा हो गया हो, लेकिन प्रशासन ने इस बात को गंभीरता से लिया है और इतनी बड़ी लापरवाही आखिर किस स्तर पर हुई, इसकी तह तक जाने के लिए एक सघन जांच शुरू कर दी गई है।




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