NEET परीक्षा से पहले दिया ‘पेपर लीक’ का झांसा, MBBS सीट दिलाने के नाम पर 30 लाख तक की ठगी
दिल्ली पुलिस ने NEET UG 2026 से पहले MBBS में एडमिशन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। 18 छात्रों को बचाया गया और 4 आरोपी गिरफ्तार किए गए।

डॉक्टर बनने का सपना हर साल लाखों छात्रों को NEET की परीक्षा तक लेकर आता है लेकिन इसी सपने को कुछ ठग अपना हथियार बना लेते हैं। दिल्ली में एक ऐसा ही संगठित गिरोह बेनकाब हुआ, जो MBBS में पक्की सीट दिलाने और प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों और उनके परिवारों से लाखों रुपये ऐंठ रहा था। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है।
परीक्षा से पहले रचा गया था पूरा खेल
तीन मई को होने वाली NEET UG 2026 परीक्षा से पहले इस गिरोह ने अपनी साजिश को अंजाम देना शुरू कर दिया था। आरोप है कि उन्होंने 18 छात्रों, जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे, को असली प्रश्न पत्र देने का झांसा देकर अज्ञात ठिकानों पर बुला लिया। दरअसल, जो प्रश्न पत्र दिखाए जा रहे थे, वे पूरी तरह फर्जी थे और पुराने वर्षों के पेपर व कोचिंग सामग्री से तैयार किए गए थे।
20 से 30 लाख तक की डील
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। वे छात्रों के परिवारों से संपर्क कर MBBS में एडमिशन की गारंटी देते थे। इसके बदले 20 से 30 लाख रुपये तक की मांग की जाती थी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने कई अभिभावकों से अग्रिम रकम, 10वीं-12वीं की मूल मार्कशीट और साइन किए हुए खाली चेक भी ले लिए थे।
सूरत से मिली सूचना
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब सूरत पुलिस ने दो मई को दिल्ली पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी। इसके बाद तकनीकी निगरानी के जरिए जांच टीम महिपालपुर एक्सटेंशन पहुंची, जहां कई होटलों में तलाशी अभियान चलाया गया। यहीं से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें कथित सरगना और एक डॉक्टर भी शामिल है।
गाजियाबाद तक फैला था जाल
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कुछ छात्रों को उनके परिवारों से अलग कर दिया गया है। इसके बाद गाजियाबाद में एक अस्पताल के पास जाल बिछाया गया, जहां से तीन छात्रों को सुरक्षित बचाया गया। इसके बाद एक फ्लैट पर छापेमारी में 15 और छात्रों को छुड़ाया गया, जो परीक्षा देने वाले थे। पुलिस ने सभी को समझाकर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी।
गिरोह की पूरी भूमिका आई सामने
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का हर सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारी निभा रहा था। मुख्य आरोपी साजिश रचता था, डॉक्टर फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करता था, एक अन्य आरोपी ठहरने और संसाधनों की व्यवस्था करता था, जबकि बिचौलिया परिवारों से संपर्क साधता था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 149 पन्नों की कथित प्रश्न-उत्तर सामग्री, साइन किए गए खाली चेक और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच जारी है।




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