NEET UG 2026: नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा में बड़े बदलावों के सुझाव; जेईई के साथ मर्जर और ऑनलाइन परीक्षा पर विचार
NEET UG 2026 Reforms: नीट-यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक विवाद के बाद, देश में नीट परीक्षा के ढांचे को बदलने की तैयारी चल रही है। आइए जानते हैं कि आने वाले समय में नीट परीक्षा प्रणाली में क्या-क्या बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

NEET UG Exam Reforms: नीट-यूजी (NEET UG) 2026 परीक्षा के पेपर लीक विवाद और देशव्यापी हंगामे के बाद, भारत की चिकित्सा और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के पूरे ढांचे को बदलने की तैयारी चल रही है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय छात्रों के तनाव को कम करने, पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और देश के परीक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्लोबल डिजिटल मानकों के अनुरूप बनाने के लिए एक व्यापक रोडमैप पर विचार कर रहे हैं।
संसदीय स्थायी समितियों की बैठकों और हाल ही में गठित ‘राधाकृष्णन समिति’ की प्रगतिशील सिफारिशों के आधार पर भविष्य की परीक्षाओं के लिए कई बड़े संरचनात्मक सुधारों के सुझाव सामने आए हैं। आइए जानते हैं कि आने वाले समय में नीट परीक्षा प्रणाली में क्या-क्या बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
1. "एक देश, एक परीक्षा" की ओर कदम: नीट और जेईई का मर्जर
वर्तमान में छात्रों को अलग-अलग सिलेबस और परीक्षा तिथियों के कारण कई कठिन परीक्षाओं के दबाव से गुजरना पड़ता है। इस भारी बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार एक बेहद कुशल प्रस्ताव पर विचार कर रही है— नीट (NEET) और जेईई (JEE) परीक्षाओं को मिलाकर एक संयुक्त राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा का आयोजन करना। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत छात्रों को केवल एक ही उच्च-गुणवत्ता वाली बुनियादी परीक्षा में बैठना होगा। इसमें स्पेशलाइज्ड सेक्शन होंगे, जैसे इंजीनियरिंग उम्मीदवारों के लिए गणित और मेडिकल उम्मीदवारों के लिए बायोलॉजी का पेपर अनिवार्य होगा।
2. डिजिटल लीप: पेन-एंड-पेपर मोड से ऑनलाइन (CBT) मोड में शिफ्ट होना
पेन-और-पेपर (OMR शीट) आधारित परीक्षा प्रणाली कई बार सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से संवेदनशील साबित हुई है। शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, भविष्य की नीट-यूजी परीक्षाओं को पूरी तरह से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित करने का पुरजोर सुझाव दिया गया है। ऑनलाइन परीक्षा होने से पेपर लीक और फिजिकल ओएमआर शीट से छेड़छाड़ की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
3. मल्टी-स्टेज टेस्टिंग: साल में कई चरणों में हो सकती है परीक्षा
छात्रों की चिंता और एक ही दिन के प्रदर्शन पर पूरा भविष्य टिके होने के डर को दूर करने के लिए, नीट परीक्षा को सिंगल-डे फॉर्मेट से हटाकर मल्टी-सेशन टेस्टिंग (कई चरणों/सत्रों में परीक्षा) के प्रारूप में बदलने का सुझाव है। इससे यदि किसी छात्र का एक सेशन का पेपर खराब भी हो जाता है, तो उसे अपनी योग्यता साबित करने के लिए दूसरा मौका मिल सकेगा।
4. पात्रता के नए नियम: अधिकतम आयु सीमा और प्रयासों की संख्या
शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय के कुलपतियों द्वारा निरंतर अकादमिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है। इसके तहत नीट-यूजी के लिए एक उचित ऊपरी आयु सीमा निर्धारित करने और कुल प्रयासों की संख्या को सीमित करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रेरित छात्र सही समय पर उच्च शिक्षा में प्रवेश कर सकेंगे और उनके करियर में भटकाव कम होगा।
5. एनटीए का अपग्रेडेड सुरक्षा चक्र: एआई और क्लाउड-बेस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर
सुरक्षा को अचूक बनाने के लिए जमीनी और डिजिटल दोनों स्तरों पर अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल करने का प्रस्ताव है। सभी परीक्षा केंद्रों पर अनिवार्य आधार-लिंक्ड बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, एआई-सक्षम (AI-CCTV) सर्विलांस और आधुनिक मोबाइल जैमर्स लगाना। किसी भी तीसरे पक्ष पर निर्भरता कम करने के लिए एनटीए का खुद का सुरक्षित, क्लाउड-बेस्ड प्रोप्राइटरी सॉफ्टवेयर विकसित करना, जो परीक्षा प्रक्रिया की एंड-टू-एंड निगरानी करेगा।




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