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NEET UG 2026 रद्द के बाद बवाल, परीक्षा सिस्टम पर भी सवाल; क्या अब ऑनलाइन होगा मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम?

NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा रद्द होने से देशभर में हड़कंप मच गया है। अब ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में NEET कराने की मांग तेज हो गई है। जानिए NTA, शिक्षा मंत्रालय और एक्सपर्ट कमेटी की पूरी रिपोर्ट।

Wed, 13 May 2026 05:00 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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NEET UG 2026 रद्द के बाद बवाल, परीक्षा सिस्टम पर भी सवाल; क्या अब ऑनलाइन होगा मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम?

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों के बीच आ गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का ऐलान कर दिया। इस फैसले के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है, क्योंकि पिछले दो साल से लगातार परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि मेहनत करने वाले उम्मीदवार हर बार सिस्टम की गड़बड़ियों का शिकार बन रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग संस्थानों तक अब एक ही मांग सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है कि NEET UG को ऑफलाइन की जगह ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में कराया जाए।

2024 के विवाद के बाद भी नहीं बदला सिस्टम

यह पहला मौका नहीं है जब NEET परीक्षा पर पेपर लीक का आरोप लगा हो। साल 2024 में भी कथित पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स विवाद ने देशभर में बड़ा बवाल खड़ा कर दिया था। उस समय कई छात्रों ने आरोप लगाया था कि NTA की व्यवस्था के कारण उनके नंबर प्रभावित हुए और टॉपर्स की संख्या असामान्य रूप से बढ़ गई।

उस विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा सुरक्षा ढांचे की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी जिसकी अगुवाई पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन ने की थी। इस कमेटी ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव सुझाए थे, लेकिन दो साल बाद भी कई अहम सिफारिशें लागू नहीं हो पाईं।

अब ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड की चर्चा तेज

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट की मानें तो NTA अब NEET को कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी CBT या हाइब्रिड मॉडल में बदलने की तैयारी कर रहा है। हालांकि इस बदलाव के लिए अभी स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार बताया जा रहा है।

एक प्रस्ताव यह भी है कि सवाल डिजिटल तरीके से छात्रों तक पहुंचाए जाएं लेकिन जवाब OMR शीट पर भरवाए जाएं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों दोनों का खतरा कम हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा में सर्वर और तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं, जबकि पुराने ऑफलाइन मॉडल में पेपर लीक का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में हाइब्रिड मॉडल को बीच का बेहतर रास्ता माना जा रहा है।

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मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया पर पड़ेगा बड़ा असर

NEET UG 2026 रद्द होने का सबसे बड़ा असर मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया पर पड़ने वाला है। अब दोबारा परीक्षा कराने के लिए नए एडमिट कार्ड जारी होंगे और पूरे देश में फिर से परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इस वजह से रिजल्ट, काउंसलिंग और MBBS-BDS एडमिशन में कई हफ्तों की देरी हो सकती है। संभावना है कि मेडिकल कॉलेजों को अपना अकादमिक कैलेंडर बदलना पड़े और सेमेस्टर छोटा करना पड़े। कई छात्रों का कहना है कि लगातार देरी के कारण मानसिक दबाव बढ़ रहा है और तैयारी का पूरा चक्र बिगड़ जाता है।

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राधाकृष्णन कमेटी ने क्या-क्या बदलाव सुझाए थे

सरकारी एक्सपर्ट पैनल ने परीक्षा सुरक्षा मजबूत करने के लिए 95 बड़े सुझाव दिए थे। इनमें सबसे अहम सुझाव था कि NEET जैसी हाई-स्टेक परीक्षा को धीरे-धीरे Pen and Paper Test से हटाकर Hybrid CBT मॉडल में बदला जाए। कमेटी ने यह भी कहा था कि पूरे देश में नया सिस्टम लागू करने से पहले पायलट टेस्ट किए जाएं। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया। इसके अलावा सुझाव दिया गया था कि परीक्षा कई दिनों और कई सेशंस में कराई जाए ताकि एक ही दिन पूरे सिस्टम पर दबाव न पड़े और सुरक्षा बेहतर हो सके।

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NTA की पूरी संरचना बदलने की सिफारिश

कमेटी ने केवल परीक्षा मोड बदलने की बात नहीं कही थी, बल्कि NTA की पूरी कार्यप्रणाली में बदलाव की जरूरत बताई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि एजेंसी को चलाने के लिए ज्यादा जवाबदेह और शक्तिशाली गवर्निंग बॉडी बनाई जाए। साथ ही टेस्ट ऑडिट, एथिक्स, ट्रांसपेरेंसी और सुरक्षा के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ समितियां बनाई जाएं।

रिपोर्ट में यह भी सुझाव था कि NTA में सामान्य प्रशासनिक अधिकारियों की जगह परीक्षा और टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों को नेतृत्व दिया जाए। इसके अलावा एजेंसी के भीतर अलग-अलग तकनीकी और सुरक्षा विंग बनाने की भी सिफारिश की गई थी।

अब सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर

NEET UG 2026 रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इस बार सच में परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करेगी या फिर पुराना ढांचा ही जारी रहेगा। छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते परीक्षा व्यवस्था नहीं बदली गई तो हर साल लाखों छात्रों का भविष्य इसी तरह विवादों और अव्यवस्था के बीच फंसता रहेगा।

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