NEET PG cut off: minus marks score candidates secures md ms seats in top medical college NEET PG cut off : नीट पीजी में 800 में से माइनस 12 और 4 अंकों वालों को भी मिली MD व MS की सीट, भड़के डॉक्टर, Career Hindi News - Hindustan
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NEET PG cut off : नीट पीजी में 800 में से माइनस 12 और 4 अंकों वालों को भी मिली MD व MS की सीट, भड़के डॉक्टर

नीट पीजी कटऑफ गिरने के बाद 800 में से माइनस 12 मार्क्स लाने वाले उम्मीदवार को फिजियोलॉजी में एमडी सीट अलॉट की गई है। माइनस 8 मार्क्स वाले एक कैंडिडेट को ऑल इंडिया कोटे की एसटी कैटेगरी के तहत गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में बायोकेमिस्ट्री में एमडी सीट मिली है।

Tue, 10 Feb 2026 04:08 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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NEET PG cut off : नीट पीजी में 800 में से माइनस 12 और 4 अंकों वालों को भी मिली MD व MS की सीट, भड़के डॉक्टर

NEET PG cut off: नीट पीजी क्वालिफाइंग कटऑफ में भारी कटौती के चलते सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों पर बेहद कम स्कोर में एडमिशन दिया जा रहा है। बेहद कम अंकों में जिन पीजी मेडिकल सीटों पर दाखिला मिल रहा है उनमें हाईरिस्क क्लिनिकल स्पेशलिटी भी शामिल हैं। नीट पीजी में 800 में से माइनस 12 (-12) मार्क्स लाने वाले उम्मीदवार को फिजियोलॉजी में एमडी सीट अलॉट की गई है। थर्ड राउंड काउंसलिंग रिजल्ट के डेटा के मुताबिक 230087 रैंक वाले कैंडिडेट को ओपन ओबीसी कैटेगरी के तहत सेल्फ-फाइनेंस्ड मेरिट सीट के जरिए एसीएस मेडिकल कॉलेज, चेन्नई में एमडी फिजियोलॉजी सीट पर दाखिला मिला है।

माइनस 8 और माइनस 5 अंक वालों को दाखिला

साउथ फर्स्ट की रिपोर्ट के मुताबिक नेगेटिव स्कोर वाले दो और उम्मीदवारों ने भी पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीट पक्की कर ली है। माइनस 8 मार्क्स वाले एक कैंडिडेट को ऑल इंडिया कोटे की एसटी कैटेगरी के तहत गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में बायोकेमिस्ट्री में एमडी सीट मिली है। जबकि माइनस पांच मार्क्स वाले दूसरे कैंडिडेट को सिम्बायोसिस मेडिकल कॉलेज फॉर विमेन, पुणे में बायोकेमिस्ट्री में एमडी सीट मिली। इतना ही नहीं 800 में से सिर्फ चार मार्क्स वाले एक कैंडिडेट को ओबीसी PwD कैटेगरी के तहत ऑल इंडिया कोटे के जरिए एक जाने-माने सरकारी मेडिकल कॉलेज पीजीआईएमएस (PGIMS) रोहतक में एमएस ऑर्थोपेडिक्स सीट अलॉट की गई है। एमएस ऑर्थोपेडिक्स सीट सबसे अधिक डिमांड वाली सर्जिकल स्पेशलिटी में से एक है।

नीट पीजी थर्ड राउंड काउंसलिंग रिजल्ट के नीचे के टॉप 50 रैंक वालों के विश्लेषण से पता चलता है कि बेहद कम अंक लाने वालों को क्लिनिकल और नॉन क्लिनिकल दोनों तरह की मेडिकल पीजी सीट मिली है।

बेहद कम नंबर हो गया मेडिकल पीजी सीटों पर दाखिला

- रोहतक के सरकारी संस्थान में ऑर्थोपेडिक्स (MS) में 800 में से केवल 4 अंक पर सीट मिली

- दिल्ली के एक प्रमुख मेडिकल कॉलेज में प्रसूति एवं स्त्री रोग (MD/MS) में 44 अंक पर दाखिला हुआ।

- सरकारी मेडिकल कॉलेज में जनरल सर्जरी में 47 अंक पर दाखिला हुआ।

- ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में 10 अंक (800 में से), एनाटॉमी में 11 अंक (800 में से) और बायोकैमिस्ट्री में रहा -8 (800 में से) पर दाखिला हुआ।

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नीट पीजी कटऑफ में क्या हुआ था बदलाव

- जनरल /EWS कैटेगरी: क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल को 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 7 पर्सेंटाइल कर दिया गया है। स्कोर कट-ऑफ 276 से गिरकर 103 (800 में से) हो गया है।

- एससी, एसटी, ओबीसी (PwD सहित) कैटेगरी: सबसे बड़ा बदलाव इसी कैटेगरी में देखा गया है। जहां क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल 40 पर्सेंटाइल से घटकर सीधे 0 पर आ गया है। इसका स्कोर कट-ऑफ भी 235 से गिरकर सिर्फ 40 (800 में से) हो गया है।

- जनरल PwD श्रेणी: इस श्रेणी में क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल 45 पर्सेंटाइल से गिरकर 5 पर्सेंटाइल पर आ गया है। इसका स्कोर कट-ऑफ 255 से कम होकर 90 (800 में से) रह गया है।

डॉक्टर का कहना है कि कटऑफ पूरी तरह हटाने से मरीज की सुरक्षा खतरे में है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक सरकारी मेडिकल कॉलेज के सीनियर फैकल्टी मेंबर ने कहा, 'यह मेडिकल एजुकेशन और वर्कफोर्स प्लानिंग में गंभीर खराबी का संकेत है। ऑर्थोपेडिक्स पारंपरिक रूप से सबसे ज्यादा मांग वाली सर्जिकल स्पेशलिटी में से एक रही है। इसे लगभग जीरो स्कोर पर भरना कमजोर स्टूडेंट्स की नहीं, बल्कि सिस्टम पर बहुत ज्यादा दबाव की निशानी है।'

गौरतलब है कि जनवरी माह के दूसरे सप्ताह में एकेडमिक सेशन 2025-26 के लिए नीट पीजी क्वालिफाइंग स्टैंडर्ड्स में भारी कमी दी गई थी। सभी कैटेगरी में कट-ऑफ बहुत कम कर दिए गए, जिससे बहुत कम और यहां तक कि नेगेटिव स्कोर वाले कैंडिडेट भी क्वालिफाई कर गए। इसका असर सभी सब्जेक्ट्स में दिखा। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में 10 मार्क्स, एनाटॉमी में 11 मार्क्स और बायोकेमिस्ट्री में माइनस 8 मार्क्स पर सीटें भरी गईं, जिनमें से कई रिजर्व्ड और PwD कैटेगरी के तहत थीं।

मेडिकल एजुकेशन का स्तर गिरेगा

एक सरकारी मेडिकल कॉलेज के एक सीनियर डॉक्टर ने कहा, 'सर्जिकल और क्लिनिकल ब्रांच को जीरो या लगभग जीरो परसेंटाइल पर भरने की इजाजत देना मेडिकल एजुकेशन के स्टैंडर्ड्स में गंभीर गिरावट दिखाता है। 800 में से 4, 11, 44 या 47 जैसे कम मार्क्स बेसिक एप्टीट्यूड की कमी दिखाते हैं। कट-ऑफ को पूरी तरह से हटाने से सीधे तौर पर मरीज की सुरक्षा को खतरा है।'

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खाली सीटों को भरने के लिए कटऑफ लेवल बहुत नीचे गिराने की सरकार की मौजूदा पॉलिसी सरकार के पहले के स्टैंड से एक बड़ा बदलाव दिखाती है। जुलाई 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट में नीट पीजी कट-ऑफ कम करने की याचिका का विरोध करते हुए केंद्र ने तर्क दिया था कि एजुकेशन स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए मिनिमम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल जरूरी थे। कोर्ट ने इस पर सहमति जताई और चेतावनी दी कि मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड कम करने से समाज में तबाही मच सकती है क्योंकि मेडिसिन में जिंदगी और मौत का मामला होता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया बचाव

पॉलिसी का बचाव करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि पीजी सीटें बदले हुए एलिजिबिलिटी नियमों के तहत अलॉट की जाती हैं और काबिलियत सिर्फ एंट्री कटऑफ से नहीं, बल्कि ट्रेनिंग और एग्जिट एग्जाम के जरिए पक्की की जानी है। अधिकारी ने कहा कि कॉलेज रेगुलेटर से सर्टिफाइड होते हैं और गलत कैंडिडेट को फेल करने के लिए वे ही जिम्मेदार होते हैं।

फैकल्टी मेंबर का कहना है कि इसके नतीजे पहले से ही हैं। दिख रहा है कि कई पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट बिना मजबूत थ्योरेटिकल बेसिस, क्लिनिकल स्किल्स या डिसिप्लिन के आते हैं। स्टूडेंट को पास करने का दबाव, कमजोर एग्जिट मैकेनिज्म और ऑनलाइन लर्निंग पर बहुत ज्यादा निर्भरता ने ट्रेनिंग की क्वालिटी को और कम कर दिया है।

एक और डॉक्टर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'आसान एंट्री ने टॉप इंस्टीट्यूशन में भी गंभीरता कम कर दी है। संख्या बढ़ रही है, लेकिन ट्रेनिंग की क्वालिटी गिर रही है, और इससे पेशेंट केयर के लिए लंबे समय तक रिस्क है।'

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