NEET PG : क्या EWS वर्ग के MBBS डॉक्टरों ने 4 करोड़ रुपये फीस देकर लिया MD व MS सीट पर दाखिला
EWS कैटेगरी के अभ्यर्थी NEET PG में एडमिशन के लिए करोड़ों रुपए तक खर्च कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 145 कैंडिडेट्स ने ऐसे प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लिया है, जिनकी सालाना ट्यूशन फीस 1 करोड़ से 4.2 करोड़ रुपए तक है। ये सीटें मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे में आती हैं।

NEET PG MD MS Admission : नीट पीजी के जरिए पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों पर दाखिले के तौर तरीके ने ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) सर्टिफिकेट की विश्ववसनीयता पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में हुई नीट पीजी राउंड 2 की काउंसलिंग के आंकड़ों से पता चलता कि बहुत से एमबीबीएस डॉक्टरों ने नीट पीजी में ईडब्ल्यूएस का कोटा लगाया लेकिन बाद में डीम्ड यूनिवर्सिटी में 1 करोड़ से 4.2 करोड़ तक की भारी फीस देकर एमडी एमएस की सीटें हासिल कर लीं। एजुकेशन वेबसाइट करियर360 की रिपोर्ट के मुताबिक ईडब्ल्यूएस वर्ग के करीब 145 उम्मीदवारों ने भारी भरकम फीस देकर डीम्ड यूनिवर्सिटीज की मेडिकल पीजी स्पेशलिटीज सीटों पर दाखिला लिया है।
ऐसा पहली बार नहीं है जब इस तरह का मामला सामने आया है। पिछले साल भी ईडब्ल्यूएस वर्ग के 140 से ज्यादा उम्मीदवारों ने भारी भरकम फीस देकर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे से मेडिकल पीजी स्पेशलिटीज सीटों पर दाखिला लिया था।
क्या उठता है सवाल
आपको बता दें कि ईडब्ल्यूएस कोटे का लाभ उसी अभ्यर्थी को मिलता है जिनके परिवार की सालाना इनकम 8 लाख रुपये से कम हो। अब सवाल यह है कि अगर ये अभ्यर्थी एक करोड़ से चार करोड़ तक की मोटी फीस दे सकते हैं तो फिर इनके परिवार की सालाना आय महज 8 लाख तक सीमित कैसे हो सकती है? इन लोगों का ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट कैसे बना? इसे किसने बनाया?
- क्या इन ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट्स का इस्तेमाल सेंट्रल या स्टेट काउंसलिंग राउंड के दौरान प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट पाने के लिए किया गया था।
EWS के लिए कौन योग्य है?
- इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन (EWS) कैटेगरी उन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने के लिए बनाई गई थी जो SC/ST/OBC कोटे में शामिल नहीं हैं। सरकार ने EWS पात्रता के लिए आय और संपत्ति दोनों शर्तें तय की हैं।
- EWS के रूप में योग्य होने के लिए आवेदक के परिवार को निम्नलिखित सभी शर्तों को पूरा करना होगा:
- आवेदन से पिछले वित्तीय वर्ष में सभी स्रोतों से परिवार की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
- परिवार के पास पांच एकड़ या उससे ज़्यादा कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए।
- परिवार के पास 1000 वर्ग फुट या उससे बड़ा आवासीय फ्लैट नहीं होना चाहिए।
- परिवार के पास नोटिफाइड नगर पालिकाओं में 100 वर्ग गज या उससे बड़ा आवासीय प्लॉट नहीं होना चाहिए।
- परिवार के पास नोटिफाइड नगर पालिकाओं के अलावा अन्य क्षेत्रों में 200 वर्ग गज या उससे बड़ा आवासीय प्लॉट नहीं होना चाहिए।
इस मसले पर एक पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर ने कहा, 'वे ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार के तौर पर नीट पीजी एग्जाम में अप्लाई करते हैं और जब उनकी रैंक बहुत कम आती है, तो वे एनआरआई बन जाते हैं। ये उम्मीदवार करोड़ों में फीस देकर एनआरआई या मैनेजमेंट कोटे की महंगी सीटें ले लेते हैं। एनआरआई या मैनेजमेंट कोटे से इन सीटों की फीस 1 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो जाती है।'
800 भारतीय डॉक्टर बने एनआरआई
नीट पीजी काउंसलिंग के बीच 800 से अधिक भारतीय उम्मीदवारों ने अपनी राष्ट्रीयता को 'भारतीय' से बदलकर 'एनआरआई' (NRI) श्रेणी में बदलने का अनुरोध किया है। इस कोटे का रुझान इसलिए बढ़ा है क्योंकि सामान्य भारतीय कोटे की तुलना में एनआरआई कोटे का कट-ऑफ अक्सर काफी कम रहता है। ऐसे में जिन उम्मीदवारों का रैंक बहुत अच्छा नहीं है, वे भारी फीस देकर एनआरआई कोटे के जरिए अपनी पसंदीदा ब्रांच (जैसे रेडियोलॉजी या डर्मेटोलॉजी) में एडमिशन पाने की कोशिश करते हैं।




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