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बेटी को कोटा में पढ़ाने के लिए बेच दिया खेत, कर्ज लेकर पिता करा रहे थे कोचिंग; NEET UG पेपर लीक ने छीनी नींद

नीट 2026 पेपर लीक की खबर से बिहार के ग्रामीण छात्रों और उनके परिवारों में गहरा सदमा है। दो साल की मेहनत, कर्ज और उम्मीदें एक झटके में टूट गईं, कई छात्र डिप्रेशन में चले गए।

Thu, 14 May 2026 08:29 AMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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बेटी को कोटा में पढ़ाने के लिए बेच दिया खेत, कर्ज लेकर पिता करा रहे थे कोचिंग; NEET UG पेपर लीक ने छीनी नींद

NEET UG 2026 पेपर लीक की खबर ने एक झटके में उन हजारों सपनों को हिला दिया है जो सालों की मेहनत, कर्ज और संघर्ष के सहारे बुने गए थे। बिहार के छोटे कस्बों और गांवों से निकले वे छात्र, जिन्होंने डॉक्टर बनने के लिए दिन-रात एक कर दिया था, आज एक अनिश्चित भविष्य के सामने खड़े हैं। किसी ने खेत बेचकर पढ़ाई कराई, किसी ने कर्ज लेकर कोचिंग भेजा, तो किसी ने भूख और थकान के बीच कमरे में बंद होकर तैयारी की। पटना और अन्य शहरों में रहकर नीट की तैयारी कर रहे इन युवाओं को लग रहा था कि इस बार उनका सपना पूरा हो जाएगा, लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर ने न सिर्फ उनकी उम्मीदें तोड़ दीं, बल्कि पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। जहां कल तक रिजल्ट की चर्चा थी, वहां आज सन्नाटा और आंसुओं ने जगह ले ली है।

मुजफ्फरपुर में टूटा भरोसा

मुजफ्फरपुर में नीट की तैयारी कर रही अंशिका की कहानी इस पूरे संकट की एक झलक है। दो साल से पटना में रहकर वह डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी। पिता ने कर्ज लेकर उसकी कोचिंग और रहने का खर्च उठाया। अंशिका को पूरा भरोसा था कि इस बार उसका पेपर अच्छा गया है और उसका चयन तय है, लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर ने पूरे परिवार को हिला दिया। पिता प्रमोद कुमार के अनुसार बेटी मानसिक तनाव में चली गई है और घर का माहौल पूरी तरह बदल गया है।

खेत बेचकर भी पूरा नहीं हुआ सपना

अंशिका की तरह कई परिवारों की स्थिति भी बेहद कठिन है। कई माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया, तो कुछ ने जमीन तक बेच दी। आर्थिक तंगी के बावजूद उम्मीद थी कि मेहनत रंग लाएगी, लेकिन पेपर लीक की खबर ने सभी सपनों को तोड़ दिया।

काउंसलिंग सेंटर में लगातार आ रहे दर्द भरे कॉल

मुजफ्फरपुर के काउंसलिंग विशेषज्ञ डॉ. कुमार बताते हैं कि लगातार ऐसे कॉल आ रहे हैं जिनमें छात्र टूट चुके हैं। कई छात्र यह पूछ रहे हैं कि उनके जीवन के तीन साल का हिसाब कौन देगा। ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।

लखीसराय के पीयूष की उम्मीदों पर पानी फिरा

लखीसराय के पीयूष ने बताया कि वह दो साल से एक छोटे कमरे में रहकर पढ़ाई कर रहा था। पिता किसान हैं और किसी तरह खर्च उठा रहे थे। उसे उम्मीद थी कि इस बार 670 से ज्यादा अंक आएंगे और मेडिकल कॉलेज मिल जाएगा, लेकिन परीक्षा रद्द होने से उसकी पूरी मेहनत बेकार लग रही है।

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पटना में तैयारी कर रहे छात्रों का टूटा भरोसा

पटना में रहकर पढ़ाई करने वाले कई छात्र भी इस फैसले से सदमे में हैं। लक्की के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और बेटे ने इस बार 650 से अधिक अंक की उम्मीद लगाई थी। अब सब कुछ अनिश्चित हो गया है और परिवार मानसिक तनाव में है।

बेगूसराय का सपना अधूरा रह गया

बेगूसराय के कमल नयन ने बताया कि इस बार उसका पेपर बेहद अच्छा गया था और 700 से अधिक अंक आने की उम्मीद थी। पिता सुरक्षा बल में कार्यरत हैं, लेकिन अब परीक्षा रद्द होने के बाद वह लगातार चिंता में है और नींद नहीं आ रही।

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गया और अन्य जिलों में भी गहरा असर

गया और अन्य जिलों से भी ऐसे ही मामले सामने आ रहे हैं। कई छात्र जिन्होंने दिन-रात एक करके पढ़ाई की थी, अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कोचिंग संस्थानों में भी निराशा का माहौल है और छात्र एक-दूसरे से बस यही पूछ रहे हैं कि आगे क्या होगा।

मोतिहारी के छात्रों की भी यही कहानी

मोतिहारी से आए छात्रों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नीट ही सबसे बड़ा अवसर होता है। अंग्रेजी और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने मेहनत की, लेकिन पेपर लीक की खबर ने उनकी सारी उम्मीदों को झटका दिया।

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परिवारों की मेहनत और भावनात्मक टूटन

कई परिवारों ने अपनी जरूरतें कम करके बच्चों को पढ़ाया। किसी ने दुकान की कमाई लगाई तो किसी ने खेत तक बेच दिया। मां-बाप की उम्मीदें अब दर्द में बदल गई हैं और छात्र मानसिक दबाव में आ गए हैं।

छात्रों की सबसे बड़ी चिंता भविष्य की अनिश्चितता

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगली परीक्षा कैसे होगी, क्या वह पहले जैसी तैयारी के साथ संभव हो पाएगी, और क्या फिर से वही मेहनत रंग लाएगी या नहीं। यह अनिश्चितता छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।

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