Success Story: पिता को कैंसर से खोया, विधवा मां ने कपड़े सिलकर बेटे को JEE के लिए पढ़ाया, अब जिगर जाएगा IIT
Jigar Nayak JEE Advanced success story 2026: ओडिशा के जिगर नायक ने पिता को कैंसर से खोने और भारी आर्थिक तंगी के बाद भी JEE Advanced पास कर ली। मां ने सिलाई करके बेटे को पढ़ाया और अब जिगर अपने पूरे गांव का पहला IITian बनने जा रहा है।

Jigar Nayak JEE Advanced success story 2026: जब हौसले आसमान छूने का दम रखते हों, तो वक्त और तंगी की क्या मजाल जो आपका रास्ता रोक सकें! कुछ ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है ओडिशा के गंजम जिले के एक छोटे से गांव 'बाकलीकोड़ा' के रहने वाले जिगर नायक की। हाल ही में जारी हुए जेईई एडवांस 2026 (JEE Advanced) के नतीजों में जिगर ने ऑल इंडिया रैंक 5474 और ओबीसी-एनसीएल (OBC-NCL) कैटेगरी में 1201वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। वह न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि अपने पूरे गांव के पहले आईआईटीयन (IITian) बनने जा रहे हैं। लेकिन इस चमचमाती सफलता के पीछे छिपे संघर्ष के आंसू और मां के त्याग की दास्तान किसी के भी दिल को झकझोर देगी।
कैंसर ने छीना पिता का साया, टूट गया दुखों का पहाड़
जिगर के पिता जूरीनाथ गुजरात की एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करते थे और परिवार का गुजारा अच्छे से चल रहा था। जिगर भी पढ़ाई में होनहार थे, उन्होंने 10वीं में 95% और 12वीं में 87% अंक हासिल किए। लेकिन अचानक खुशियों को किसी की नजर लग गई। पिता को कैंसर होने का पता चला और उनके इलाज में परिवार की पूरी जमा-पूंजी लग गई। साल 2020 में पिता का निधन हो गया। एक तरफ सिर से पिता का साया उठ गया और दूसरी तरफ घर में दाने-दाने का संकट खड़ा हो गया।
मां ने सिलाई मशीन को बनाया हथियार, लिया गोल्ड लोन
ऐसी दर्दनाक स्थिति में भी जिगर की मां अपूर्वा नायक ने घुटने नहीं टेके। उन्होंने तय किया कि वह अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं देंगी। मां ने हिम्मत जुटाकर पहले गोल्ड लोन लिया और फिर घर-घर जाकर सिलाई के लिए कपड़े मांगना शुरू किया। दिन-रात सिलाई मशीन पर बैठकर कपड़े सिलते हुए उन्होंने न केवल घर चलाया, बल्कि जिगर की पढ़ाई के लिए पाई-पाई जोड़ी। कई बार घर में खाने के लिए खीना नहीं होता था, लेकिन मां ने इस बात की भनक कभी अपने बेटे को नहीं लगने दी।
सोशल मीडिया के एक वीडियो ने बदल दी जिंदगी
दिलचस्प बात यह है कि 10वीं कक्षा तक जिगर को पता ही नहीं था कि आईआईटी या जेईई परीक्षा क्या होती है। एक दिन सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हुए उन्होंने इंजीनियरिंग और आईआईटी से जुड़ा एक वीडियो देखा। बस, वहीं से उनकी आंखों में आईआईटीयन बनने का सपना अपना लिया। उन्होंने कसम खाई कि वह पढ़ाई के दम पर अपनी मां की इस लाचारी और गरीबी को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे। इसके बाद वह राजस्थान के कोचिंग हब 'कोटा' आए और कोचिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया। जिगर की गंभीर आर्थिक स्थिति को देखते हुए संस्थान ने उनकी 11वीं और 12वीं की फीस भी माफ कर दी।
जिगर का एक छोटा भाई भी है जो अभी 7वीं में पढ़ता है। अपनी सफलता पर भावुक होते हुए जिगर कहते हैं, "मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, पूरे परिवार के उज्जवल भविष्य के लिए पढ़ रहा था। मेरा लक्ष्य है कि आईआईटी से निकलने के बाद मेरी मां को कभी सिलाई मशीन न छूनी पड़े और मेरे भाई को पैसों के लिए पढ़ाई न छोड़नी पड़े।" जिगर की यह कहानी आज देश के हर उस छात्र के लिए मिसाल है जो छोटी-मोटी दिक्कतों से घबराकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं।




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