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JEE Main : जुड़वा भाइयों के जेईई मेन में भी समान अंक, 5 साल तैयारी कर पाए शानदार मार्क्स, IIT के बाद IAS है टारगेट

ओडिशा के जुड़वा भाई महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान ने जेईई मेन में एक समान 300 में से 285 अंक हासिल कर सबको चौंका दिया है। दोनों ने एक साथ तैयार की। एक जैसा शेड्यूल व रणनीति बनाई।

Wed, 18 Feb 2026 09:20 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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JEE Main : जुड़वा भाइयों के जेईई मेन में भी समान अंक, 5 साल तैयारी कर पाए शानदार मार्क्स, IIT के बाद IAS है टारगेट

आडिशा में भुवनेश्वर के रहने वाले जुड़वां भाई महरूफ और मसरूर अहमद खान ने जेईई मेन 2026 सेशन 1 परीक्षा में एक समान अंक 300 में से 285 अंक हासिल किए हैं। दोनों भाइयों ने कोटा में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी की थी। एक भाई ने कहा कि खुशकिस्मत से ज्यादा मुश्किलें नहीं आईं। सब कुछ बहुत आसानी से हो गया। सभी शिक्षकों ने बहुत मदद की। मैंने बस वही किया जो शिक्षकों ने मुझे करने को कहा और उसका पालन किया, सारा काम किया। इसके अलावा कुछ नहीं। उन्होंने आगे कहा कि मैंने तैयारी में बहुत समय लगाया है। मैं पिछले पांच सालों से खुद ही जेईई की तैयारी कर रहा हूं। वहीं, दूसरे भाई ने कहा कि मुझे कठिनाई हुई। कभी-कभी छोटी-छोटी गलतियों के कारण मेरे कम अंक आ जाते थे। मैंने इस बारे में शिक्षकों से बात की।

दोनों भाइयों का जन्म 7 मई 2008 को हुआ था। एक ही स्कूल में पढ़ाई, एक साथ पढ़ने की आदत और पढ़ाई में प्रतिस्पर्धा ने इन्हें बेहतर बनाया। 10वीं कक्षा में महरूफ ने 95.2 प्रतिशत जबकि मसरूर ने 97.2 प्रतिशत अंक हासिल किए।

साथ में डाउट क्लियर करते थे

महरूफ और मसरूर ने बताया कि उनकी तैयारी का तरीका बहुत ही सीधा था- 'साथ पढ़ो और साथ बढ़ो।'मसरूर ने बताया कि वे दोनों भाई एक ही समय पर एक ही स्टडी टेबल पर पढ़ने बैठते थे और एक ही टाइम टेबल फॉलो करते थे। महरूफ ने कहा, 'हम दोनों के बीच हमेशा एक हेल्दी कॉम्पिटिशन रहा। हम साथ में डाउट क्लियर करते थे और अगर कभी किसी के कम नंबर आते, तो दूसरा उसे मोटिवेट करता था। शायद यही वजह है कि हमारे नंबर एक जैसे आए हैं।' मसरूर ने कहा, 'हम 10वीं से कोटा में हैं और पिछले तीन सालों से अपने टीचर्स की गाइडेंस में कोचिंग मटीरियल का इस्तेमाल करके तैयारी कर रहे हैं।' आपको बता दें कि कोटा देश में इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षा की कोचिंग का गढ़ माना जाता है। देश भर से बच्चे यहां आकर कोचिंग व तैयारी करते हैं।

महरूफ और मसरूर न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। दोनों मिलकर करीब 30 गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

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जेईई मेन में शानदार प्रदर्शन के बाद अब इन दोनों भाइयों की नजर जेईई एडवांस पर है जो उन्हें आईआईटी में एंट्री दिलाएगा। महरूफ का सपना है कि वह आईआईटी बॉम्बे से बीटेक इन कंप्यूटर साइंस करे। हालांकि महरूफ का लक्ष्य इंजीनियरिंग कर सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस अफसर बनने का है।

मां जॉब छोड़ा कोटा साथ आ गई

दोनों भाइयों की इस बड़ी कामयाबी के पीछे उनकी मां का बहुत बड़ा त्याग है। जब महरूफ और मसरूर ने इंजीनियरिंग की तैयारी करने का फैसला किया, तो पेशे से गायनोलॉजिस्ट उनकी मां डॉ. जीनत ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए सरकारी नौकरी तक छोड़ दी। वह अपने बच्चों के साथ ओडिशा से राजस्थान के कोटा शिफ्ट हो गईं, ताकि उनकी पढ़ाई और खान-पान का पूरा ख्याल रख सकें।

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