JEE Main 2026 Topper : छठी कक्षा से ही जेईई मेन की तैयारी, 12-14 घंटे पढ़ाई, कहानी दिल्ली के टॉपर श्रेयस मिश्रा की
JEE Main 2026 Topper : पूरे 100 परसेंटाइल हासिल कर जेईई मेन में टॉप करने वाले दिल्ली के श्रेयस मिश्रा बताते हैं कि उन्होंने 2019 से ही जेईई परीक्षा की तैयारी की। तब वे कक्षा 6 में थे। मैं इसके लिए हर दिन 12-14 घंटे पढ़ाई करता था।

JEE Main 2026 Topper : दिल्ली के श्रेयस मिश्रा ने जेईई मेन 2026 परीक्षा में पूरे 100 परसेंटाइल हासिल कर ऑल इंडिया टॉप किया है। देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में पूरे 100 परसेंटाइल पाने वाले देश के 12 होनहार छात्रों की सूची में उनका नाम टॉप पर है। 17 वर्षीय श्रेयस राष्ट्रीय राजधानी में पंजाबी बाग के एक पीजी में रहते हैं। पहले प्रयास में जेईई टॉप करने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा, 'हालांकि मैंने जेईई मेन की तैयारी 2019 से ही शुरू कर दी थी। तब में छठी क्लास में था। लेकिन केवल दो साल पहले ही मैं अपने माता-पिता से दूर पंजाबी बाग में एक पीजी में शिफ्ट हो गया था। मेरे माता पिता ग्रेटर नोएडा में रहते हैं। मैथ्स के प्रति मेरे जुनून ने मुझे जेईई की ओर खींचा। मेरा लक्ष्य देश के शीर्ष संस्थानों में प्रवेश लेना था, परीक्षा में टॉप करने की नहीं सोची थी। श्रेयस अशोक विहार स्थित कुलाची हंसराज मॉडल स्कूल (सीनियर विंग) में 12वीं के छात्र हैं और पूरी मेहनत के साथ बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं।
श्रेयस मिश्रा ट्रैवल टाइम बचाने के लिए अपने परिवार से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी तैयारी घंटे गिनने के बजाय टॉपिक कवर करने पर ज्यादा फोकस करती थी। पिछले दो सालों के अपने शेड्यूल के बारे में बताते हुए मिश्रा ने कहा, 'मेरा शेड्यूल घंटों के हिसाब से फिक्स नहीं था। कुछ दिन यह पांच से छह घंटे का होता था, जबकि दूसरे दिनों यह 12 या 14 घंटे तक खिंच जाता था। मैंने जितना हो सके उतना समय देने की कोशिश की, लेकिन मुझे अब भी लगता है कि मैंने बहुत समय बर्बाद किया।' उन्होंने आगे कहा कि प्री-बोर्ड एग्जाम के बाद, वह जेईई की तैयारी के लिए ज्यादा घंटे दे पाए।
बचपन से ही नया जानने और खोजने की ललक है
श्रेयस बचपन से ही जिज्ञासु थे। क्लास 6 के स्टूडेंट के तौर पर उनके आसपास की दुनिया सवालों से भरी हुई लगती थी। पुल, ट्रेन, स्मारक और मशीनें सिर्फ रोजमर्रा की चीजें नहीं थीं, वे समझने वाली पहेलियां थीं। पुल का आकार ऐसा क्यों होता है? ट्रेनों को अलग तरह से क्यों डिजाइन किया जाता है? अशोक के लोहे के खंभे में जंग क्यों नहीं लगा? ये सब सवाल वे तभी सोचने लगे थे।
स्पीड मैथ और अबेकस कॉम्पिटिशन ने बनाया जीनियस
बचपन में उनके पिता ने उन्हें स्पीड मैथ और अबेकस कॉम्पिटिशन में एडमिशन दिलाया। इस मौके से उनके न्यूमेरिकल स्किल और कॉन्फिडेंस बढ़े। मिश्रा ने अपने उस सफर के बारे में बताया जो सवालों से शुरू हुआ और परफेक्ट स्कोर पर खत्म हुआ, 'उन्होंने वेस्टर्न यूपी अबेकस चैंपियनशिप में दूसरा प्राइज जीता। उन्हें मैथ में दिलचस्पी थी और वह दिलचस्पी धीरे-धीरे इस लेवल तक बढ़ी।'
साथियों के साथ डिस्कशन में डाउट क्लियर किए
उन्होंने कहा, 'पिछले डेढ़ महीने कई मॉक देने, इन-डेप्थ एनालिसिस करने और क्लास में और साथियों के साथ डिस्कशन में डाउट क्लियर करने में बीते।' लेकिन सभी दिन आसान नहीं थे। मिश्रा ने कहा कि सफर लंबा था और उन्होंने बर्नआउट से बचने के लिए म्यूजिक सुनने और दोस्तों के साथ घूमने के लिए ब्रेक लिए।
सोशल मीडिया से दूर रखा
उन्होंने खुद को सोशल मीडिया से दूर रखा और दोस्तों के साथ आमने-सामने बातचीत जारी रखी। मिश्रा ने कहा, 'शुरू से ही मैं बर्नआउट से बचने के लिए समय निकालता था। स्ट्रेस से बचने के लिए क्लासिकल म्यूजिक सुनना, क्रिकेट खेलना और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिताना मेरी प्राथमिकता रही।' उन्होंने यह पक्का किया कि उनकी तैयारी कभी पटरी से न उतरे, लेकिन उनके परिवार और दोस्तों के सपोर्ट ने भी उनके इस सफर में उतनी ही अहम भूमिका निभाई।
परिवार का मिला सपोर्ट
मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले श्रेयस के पिता सुमंत मिश्रा 24 साल पहले बेहतर नौकरी के मौकों की तलाश में राजधानी आए थे और अब साइबर सिक्योरिटी कंसल्टेंट के तौर पर काम करते हैं। उन्होंने कहा, 'जब कॉम्पिटिटिव एग्जाम की बात आती है, तो सिर्फ कैंडिडेट ही तैयारी नहीं करता, पूरा परिवार इसमें शामिल होता है। मैंने और मेरी पत्नी ने यह सुनिश्चित किया हर दिन फोन पर उससे मतलब की बातें करें। उसे स्ट्रेस फील न होने दें। हमने पक्का किया कि वह कभी अकेला महसूस न करे। हम जन्मदिन और एनिवर्सरी मनाते रहे, और साथ में त्योहारों का मजा लेते रहे, सब कुछ बैलेंस्ड और कंट्रोल्ड तरीके से।' उन्होंने आगे बताया कि उनके और उनकी पत्नी, जो एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा में कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर हैं, दोनों के मजबूत एकेडमिक बैकग्राउंड ने उनके बेटे के लिए सफर को आसान बना दिया।




साइन इन