जेईई एडवांस्ड के टॉपर्स से सीखें, गलतियों से कैसे सीखा, प्रेशर को हराकर कैसे आगे बढ़े
जेईई एडवांस्ड 2026 के टॉपर्स रैंकर्स की सूची में स्टूडेंट्स अर्नव गौतम (एआईआर-7) ने अपनी सिली मिस्टेक पर बात करते हुए कहा कि जब भी मॉक टेस्ट में नंबर कम आते थे, तो लगता था कि सिली मिस्टेक ज्यादा कर रहा हूं। इसके लिए टीचर्स से बात की।

हाल ही में 'जेईई एडवांस्ड 2026' (JEE Advanced 2026) का रिजल्ट घोषित हुआ है। जिसमें कई छात्रों ने टॉप करके इतिहास रचा है। शुभम कुमार ने जहां 360 में से 330 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक (AIR 1) का खिताब अपने नाम किया, तो वहीं हरियाणा के गुरुग्राम में रहने वाले कबीर छिल्लर ने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की है। हालांकि इन टॉपर्स के सफल होने की कहानी आसान नहीं है। इसके पीछे ना केवल शिक्षकों और परिवार का भरोसा और त्याग है, बल्कि इनकी कड़ी मेहनत और सटीक प्लानिंग का भी काफी योगदान रहा है। इतना ही नहीं छोटी-छोटी गलतियों से सीखते हुए इन छात्रों ने अपनी सफलती की कहानी गढ़ी है। जेईई एडवांस्ड रिजल्ट 2026 जारी होने के बाद कुछ टॉपर्स ने अपने सिली मिस्टेक्स पर खुलकर बात की है। साथ ही यह भी बताया कि इन गलतियों से कैसे बचा जाए।
टॉपर अर्नव गौतम के सिली मिस्टेक्स
जेईई एडवांस्ड 2026 के टॉपर्स रैंकर्स की सूची में स्टूडेंट्स अर्नव गौतम (एआईआर-7) ने अपनी सिली मिस्टेक पर बात करते हुए कहा कि जब भी मॉक टेस्ट में नंबर कम आते थे, तो लगता था कि सिली मिस्टेक ज्यादा कर रहा हूं। इसके लिए टीचर्स से बात की। सिली मिस्टेक कैसे होती है? इस पर अर्नव गौतम ने बताया कि सवाल को गलत पढ़ लिया। सारे ऑप्शंस नहीं देखे और कैलकुलेशन मिस्टेक। अर्नव ने बताया कि कैलकुलेशन मिस्टेक के लिए कैलकुलेटर को बिल्कुल हटा देना चाहिए। मैंने कैलकुलेटर बिल्कुल हटा दिया था।
कबीर छिल्लर ने टाइम मैनेजमेंट को और भी किया मजबूत
वहीं, JEE Advanced 2026 में 360 में से 329 अंक लाकर ऑल इंडिया रैंक-2 (AIR 2) अपने नाम करने वाले कबीर छिल्लर ने बताया कि मैं पेपर से पहले भी रिलैक्स था, पेपर के दौरान भी शांत था और पेपर देने के बाद भी रिलैक्स था। कबीर का मानना है कि केवल फॉर्मूले रट लेने से जेईई जैसी कठिन परीक्षा क्रैक नहीं की जा सकती। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान किसी भी शॉर्टकट का सहारा नहीं लिया। वहीं, उन्होंने सिली मिस्टेक के बारे में बात करते हुए बताया कि अगर मुझसे कोई सिली मिस्टेक होती थी, तो मैं सोचता था कि उस वक्त मेरे दिमाग में क्या चल रहा था? मैंने ऐसा क्यों सोचा? इस प्रॉसेस से मैंने अपने टाइम मैनेजमेंट को और भी मजबूत किया।
आरोही देशपांडे का मूल मंत्र
वहीं, जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 77 प्राप्त करने के साथ ऑल इंडिया गर्ल टॉपर रही आरोही देशपांडे सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित मेहनत को दिया। उन्होंने भी अपनी गलतियों के बारे में खुलकर बात की। आरोही ने बताया कि उनके सक्सेस का मूल मंत्र कॉन्सेप्ट्स की गहरी समझ और लगातार प्रैक्टिस रहा। वो रेगुलर टेस्ट देती थीं और हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का एनालिसिस करती थीं। उनका मानना है कि जेईई एडवांस्ड में सफलता के लिए केवल कठिन परिश्रम ही नहीं, बल्कि स्मार्ट स्टडी, टाइम मैनेजमेंट और रेगुलर सेल्फ एनालिसिस भी जरुरत है। फिलहाल आईआईटी से बीटेक करने पर फोकस है। उसके आगे का प्लान फिलहाल सोचा नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरे पेरेन्ट्स ने कभी एक्स्ट्रा प्रेशर नहीं बनाया, बल्कि हमेशा मोटिवेट किया, जिससे मैं पूरी तरह अपनी पढ़ाई पर फोकस कर सकी।
प्रेशर को कमजोरी नहीं बनने दिया- शुभम कुमार
वहीं, जेईई-एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक लाकर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल करने वाले शुभम ने जेईई मेन में 100 परसेंटाइल स्कोर किया था और ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल की थी। सही गाइडेंस, डिसिप्लिन, रेगुलर प्रेक्टिस और कॉन्फिडेंस ने उन्हें सफल बनाया। उन्होंने बताया कि मैंने हमेशा फैकल्टीज की हर बात को गंभीरता से सुना और उन्हीं के बताए हुए तरीके को फॉलो किया। जब भी कोई टॉपिक कठिन लगता था, मैं बार-बार डाउट पूछता था। उन्होंने बताया कि क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करना मेरे डेली रूटीन में शामिल था। जेईई की तैयारी में कई बार प्रेशर आ जाता है, लेकिन मैंने उसे कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मैंने हर चुनौती को मोटिवेशन में बदला। मेरा पूरा फोकस सिर्फ अपने लक्ष्य पर था।
जितिन कुमार ने बताया कि गलतियों से कैसे बचें
जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक-3 हासिल करने वाले जतिन कुमार चाहर ने बताया कि मैं क्ला में पढ़ाई पर पूरा ध्यान देता था और उसी दिन पढ़ाए गए विषयों को दोबारा रिवाइज करने की आदत रखता था। नियमित रूप से मॉक टेस्ट देता था और हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का गहराई से विश्लेषण करता था। मेरा ध्यान केवल अच्छे अंक लाने पर नहीं, बल्कि अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने पर रहता था। जिस विषय या टॉपिक में गलती होती थी, उस पर मैं एक्स्ट्रा समय देकर मेहनत करता था। मैं प्रतिदिन लगभग 7 से 8 घंटे सेल्फ-स्टडी करता था, क्योंकि मेरा मानना है कि जेईई जैसी परीक्षा में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।




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