IIT Roorkee alumnus Siddharth Maheshwari explains 25 lpa ctc vs in hand salary breakdown tax pf gratuity पैकेज 25 लाख का इन-हैंड सिर्फ 1.45 लाख, CTC के नाम पर कैसे बनते हैं बेवकूफ; IIT के इस बंदे ने खोली पोल, Career Hindi News - Hindustan
More

पैकेज 25 लाख का इन-हैंड सिर्फ 1.45 लाख, CTC के नाम पर कैसे बनते हैं बेवकूफ; IIT के इस बंदे ने खोली पोल

IIT रुड़की के पूर्व छात्र सिद्धार्थ माहेश्वरी ने सोशल मीडिया पर 25 लाख की सीटीसी पैकेज का पूरा ब्रेकडाउन शेयर किया है, जिसमें उन्होंने सीटीसी और इन हैंड सैलरी का असली अंतर समझाया।

Mon, 15 June 2026 08:16 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
share
पैकेज 25 लाख का इन-हैंड सिर्फ 1.45 लाख, CTC के नाम पर कैसे बनते हैं बेवकूफ; IIT के इस बंदे ने खोली पोल

Siddharth Maheshwari explains 25 lpa ctc vs in hand salary breakdown : जब किसी को 25 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिलता है तो बाहर से देखने वालों को यही लगता है कि बंदा हर महीने ऐश कर रहा होगा। लेकिन असल जिंदगी की हकीकत इससे कोसों दूर है। आईआईटी रुड़की और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के पास आउट सिद्धार्थ माहेश्वरी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपनी पहली सैलरी का एक ऐसा सच बयां किया है, जिसने सीटीसी यानी 'कॉस्ट टू कंपनी' के बड़े बड़े दावों की हवा निकाल दी है। गुड़गांव के एक स्टार्टअप में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट के पद पर काम कर रहे 35 साल के सिद्धार्थ ने बताया कि कैसे 25 लाख का भारी भरकम पैकेज आखिरकार बैंक अकाउंट में आते आते महज 1.45 लाख रुपये में सिमट गया। सिद्धार्थ ने इंस्टाग्राम पर एक बेहद दिलचस्प पोस्ट लिखी है जो आज के हर नौकरीपेशा और नए ग्रेजुएट्स को जानना जरूरी है।

अपने पोस्ट में सिद्धार्थ लिखते हैं, "पहली सैलरी क्रेडिट हुई 1,45,000 रुपये। मैंने अपना बैलेंस दोबारा चेक किया, फिर तीसरी बार देखा। नंबर वही था। मुझे लगा शायद बैंक से कोई गलती हुई है। पर सच तो यह था कि गलती बैंक की नहीं, बल्कि उस ऑफर लेटर की थी जिसने मुझे बड़े बड़े सपने दिखाए थे।"

समझाया 25 लाख के पैकेज का पूरा गणित

अमूमन लोग 25 लाख के पैकेज को सीधे 12 महीनों से भाग दे देते हैं, जिससे लगता है कि हर महीने करीब 2.08 लाख रुपये मिलने चाहिए। लेकिन पेरोल का ढांचा इससे बिल्कुल अलग होता है। सिद्धार्थ ने अपनी पोस्ट में इसका पूरा ब्रेकडाउन समझाया है -

  • बेसिक पे: 80,000 रुपये प्रति महीना
  • मकान किराया भत्ता (एचआरए): 40,000 रुपये प्रति महीना
  • स्पेशल अलाउंस: 45,000 रुपये प्रति महीना
  • एलटीए और मेडिकल बेनिफिट्स: 5,000 रुपये प्रति महीना

इन सब को मिलाकर ग्रॉस मंथली सैलरी बनती है करीब 1.7 लाख रुपये। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, असली कैंची तो इसके बाद चलती है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:इंतजार की घड़ियां खत्म, SSC GD की आंसर की जारी, यहां देखें पूरी डिटेल

टैक्स और डिडक्शन ने खाई सैलरी

इस 1.7 लाख रुपये की ग्रॉस सैलरी में से कई तरह की कटौतियां की जाती हैं -

1. इम्पलॉई पीएफ: लगभग 9,600 रुपये हर महीने कट जाते हैं।

2. प्रोफेशनल टैक्स: 200 रुपये महीना।

3. टीडीएस यानी इनकम टैक्स: करीब 20,000 रुपये प्रति महीना।

इन सभी सरकारी और जरूरी कटौतियों के बाद हाथ में आने वाली रकम यानी इन हैंड सैलरी घटकर सिर्फ 1.4 लाख रुपये से 1.45 लाख रुपये के बीच रह जाती है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जब 12वीं पास ने B.Tech वालों को दी टक्कर, तो सामने आया चौंकाने वाला सच

CTC की वो रकम जो कभी कैश बनकर जेब में नहीं आती

सिद्धार्थ ने उन कंपोनेंट्स पर भी खुलकर बात की जो कंपनियां आपके सीटीसी में तो जोड़ती हैं, लेकिन वो आपको हर महीने नगद नहीं मिलतीं। इस पर सिद्धार्थ ने लिखा, "इम्पलायर पीएफ के 9,600 रुपये आपके पीएफ खाते में जाते हैं, जिसे आप 58 साल की उम्र से पहले आसानी से नहीं निकाल सकते। ग्रेच्युटी के 3,200 रुपये तब मिलते हैं जब आप लगातार 5 साल एक ही कंपनी में टिकें। मेडिकल इंश्योरेंस के 2,500 रुपये एक सुविधा है, कैश नहीं। और सबसे बड़ा धोखा है वेरिएबल पे 12,500 रुपये का यह नंबर पूरी तरह कंपनी के प्रदर्शन पर टिका होता है, इसकी कोई गारंटी नहीं होती क्योंकि यह जीरो भी हो सकता है।"

नए टैक्स नियम का असर

सिद्धार्थ ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026 27 के नए टैक्स रिजीम के हिसाब से भी टैक्स का हिसाब लगाया है। स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद अगर सालाना टैक्सेबल इनकम 20.25 रुपये लाख बनती है, तो पूरे साल की कुल टैक्स लायबिलिटी 2.14 लाख रुपये से ज्यादा बैठती है। इसका मतलब है कि हर महीने आपकी सैलरी से करीब 18,000 रुपये का टीडीएस कटना बिल्कुल तय है।

नौकरी ढूंढने वालों के लिए सिद्धार्थ की 3 अनमोल सलाह

इस पूरे कड़वे अनुभव से सीख लेते हुए सिद्धार्थ ने युवाओं और जॉब सीकर्स को तीन बेहद जरूरी बातें समझाई हैं। जिसमें पहली बात सीटीसी सिर्फ मार्केटिंग का खेल है क्योंकि कंपनियों का एम्प्लॉयर पीएफ और ग्रेच्युटी जैसी चीजों को सीटीसी में शामिल करना सिर्फ पैकेज को बड़ा दिखाने का तरीका है। इसे कैश समझने की भूल न करें। दूसरी बात ये कि वेरिएबल पे पर भरोसा न करें क्योंकि वेरिएबल पे को कभी भी अपनी फिक्स्ड इनकम मानकर बजट न बनाएं, क्योंकि यह कभी भी कम या जीरो हो सकता है। तीसरी बात ये कि टैक्स रिजीम को समझें क्योंकि महंगे शहरों में रहने वाले लोगों को अपनी सहूलियत और किराए के खर्च के हिसाब से ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम की तुलना जरूर कर लेनी चाहिए।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ICSE 2026: 10वीं रिजल्ट से संतुष्ट नहीं था छात्र, री-इवैल्यूएशन में हुआ कमाल

अंत में सिद्धार्थ ने नौकरी की बात चला रहे लोगों से सिर्फ एक बात पर सबसे ज्यादा फोकस करने को कहा, "जब भी किसी कंपनी से ऑफर लेटर की बात हो, तो उनसे सिर्फ एक ही सवाल पूछें कि सब टैक्स और कटौतियां काटने के बाद मेरे हाथ में महीना खत्म होने पर कितना पैसा आएगा? क्योंकि सीटीसी सिर्फ एक मार्केटिंग नंबर है, लेकिन आपकी ईएमआई और घर का खर्च केवल वही इन हैंड सैलरी भरती है जो बैंक में क्रेडिट होती है।"

करियर सेक्शन में लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़, सरकारी जॉब , एग्जाम , एडमिशन , CBSE 12th Result 2026 Live के साथ सभी Board Results 2026 देखें। सबसे पहले अपडेट पाने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।