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UPSC CSE : यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में नाकाम हुए तो क्या हैं ऑप्शन, कहां कहां हैं मौके

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में असफल होना करियर का अंत नहीं है, बल्कि एक नया अवसर हो सकता है। जो अभ्यर्थी सफल नहीं हो पाते, उनके पास गहरा ज्ञान और कई उपयोगी स्किल्स होती हैं बस उन्हें सही दिशा देने की जरूरत होती है।

Thu, 9 April 2026 06:20 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, अंशु सिंह, नई दिल्ली
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UPSC CSE : यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में नाकाम हुए तो क्या हैं ऑप्शन, कहां कहां हैं मौके

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाना आसान काम नहीं। जो सफल हो जाते हैं, उन्हें परवाज के लिए नया आसमान मिलता है। जो सफल नहीं हो पाते, उन अभ्यर्थियों के पास ज्ञान का भंडार तो होता है, लेकिन दिशा की कमी होती है। हालांकि, अगर इस ज्ञान को सही दिशा में लगाया जाए, तो अवसर खुद बनते चले जाते हैं। देहरादून में सिविल सेवा परीक्षाओं की प्रतिष्ठित ‘प्रयास’ कोचिंग सेंटर के संस्थापक सुशील सिंह की यात्रा भी इसी की बानगी है। वह बताते हैं, ‘2002 में जब मेरी प्रयास सीमा खत्म हो गई, तो मैंने एलएलबी, एलएलएम किए। फिर पीएचडी, किताबें लिखीं और फिर कोचिंग शुरू कर दी। मेरा मानना है कि इस तैयारी से मिला ज्ञान सही दिशा में लगाया जाए तो यह दूसरों के लिए भी मार्गदर्शन का जरिया बनता है। आज के दौर में आप देखेंगे जितनी भी प्रतियोगी पत्रिकाएं निकलती हैं, उनको कारगर बनाने में अधिकतर वे अभ्यर्थी होते हैं, जो कभी खुद यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। ’

एक स्किल स्कूल है यूपीएससी

इस परीक्षा की तैयारी में विकसित स्किल जैसे गहराई से पढ़ने और समझने की आदत, जटिल मुद्दों को सरल भाषा में समझाने की क्षमता, नोट्स बनाना- ये कंटेंट राइटिंग, रिसर्च, टीचिंग और पॉलिसी सेक्टर में उपयोगी साबित होते हैं। कई सॉफ्ट स्किल भी विकसित हो जाते हैं, जैसे विश्लेषण, तर्कक्षमता, दबाव सहने की क्षमता, समय प्रबंधन आदि। आज ये खूबियां हर नियोक्ता को चाहिए। असफलता से घबराने के बजाय अपनी विशेषताओं को पहचानकर स्किल्स निखारें और नए विकल्प तलाशें।

अच्छे वेतन के सेक्टर

भारत के कई संस्थान, जैसे टिस (TISS) या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज पब्लिक पॉलिसी में एम.ए. या पीजी डिप्लोमा कराते हैं। यूपीएससी के सीसैट (CSAT) की तैयारी आपको मैनेजमेंट की कैट परीक्षा के लॉजिकल रीजनिंग और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन की तैयारी का आधार देती है। इस तरह पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन या मैनेजमेंट में करियर के लिए भी यह पढ़ाई काम आती है।

सरकारी रिसर्च संस्थान

डीआरडीओ, सीएसआईआर, आईसीएमआर जैसे सरकारी रिसर्च संस्थानों और डेवलपमेंट के क्षेत्र से जुड़े शोध संस्थानों में विकल्प खुलते हैं। यहां पॉलिसी रिसर्चर, प्रोजेक्ट मैनेजर के पदों के लिए यूपीएससी की तैयारी काम आती है।

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दूसरे विकल्प पर विचार कब करें

वैसे तो इसका कोई एक फॉर्मला नहीं कहा जा सकता। यह आपकी उम्र, जरूरत और उत्साह आदि पर निर्भर करता है, लेकिन कुछ चीजों को ध्यान में रखें।

- अगर 4-5 साल यूपीएससी देने के बाद आपके पास कोई बैकअप स्किल या करिअर विकल्प नहीं है, तो हर अतिरिक्त साल की अहमियत आपके भविष्य के लिए बढ़ती जाती है।

- वैकल्पिक विषय, अध्ययन सामग्री या रणनीति में बदलाव करने पर भी असफल रहे हैं, तो तैयारी व तरीकों का पुनर्मूल्यांकन करें।

- तैयारी पूरी तरह छोड़ने के बजाय धीरे-धीरे दूसरी तैयारी की ओर बढ़ें। 3 से 6 महीनों में कोई व्यावहारिक कौशल जरूर अर्जित करें।

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जर्नलिज्म से जैविक खेती तक अनेक अवसर

सुशील सिंह ( संस्थापक, प्रयास कोचिंग, देहरादून) की राय

हर साल करीब 15 हजार अभ्यर्थी मेन्स देते हैं। इंटरव्यू के लिए लगभग 2700–2800 उम्मीदवार पहुंचते हैं, जबकि वैकेंसी करीब 1000 होती हैं। इस बार 2736 ने इंटरव्यू दिया और 956 का चयन हुआ। ऐसे में सवाल है कि बाकी डेढ़ हजार से ज्यादा उम्मीदवार आगे क्या करेंगें?

- हर साल करीब 12 लाख अभ्यर्थियों में से 150-180 ही आईएएस बनते हैं, लेकिन बाकी भी अपने कौशल के दम पर आगे बढ़ते हैं। इस तैयारी में विकसित क्षमताएं जर्नलिज्म से लेकर जैविक खेती तक कई क्षेत्रों में काम आती हैं। जान लें, यूपीएसएसी में मिली असफलता भी व्यर्थ नहीं जाती, रास्ते बन ही जाते हैं।

- जनरल उम्मीदवार 32 साल तक छह अटैम्प्ट दे सकता है। यदि ओबीसी है, 35 साल तक उम्र है तो उसके पास नौ मौके हैं प्रयास करने के। यदि एससी/एसटी है तो 37 साल की उम्र तक सीमित प्रयास कर सकता है, लेकिन इतने प्रयासों के बाद उम्र निकल जाने से बैंक, पुलिस जैसी अन्य नौकरियों के विकल्प सीमित हो जाते हैं।

- ऐसे में स्टेट पीसीएस के विकल्प बचते हैं, जैसे मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, यूपी वगैरह। वहां यूपीएससी की तुलना में कहीं-कहीं 40-42 की उम्र तक प्रयास कर सकते हैं।

- लोअर/सबऑर्डिनेट लेवल के स्टेट इग्जाम होते हैं, जिसे पास कर मनोरंजन कर-अधिकारी आदि बन सकते हैं।

- जर्नलिज्म या कंटेंट राइटिंग कर सकते हैं। बीएड,नेट या पीएचडी क्वालिफाई कर लेक्चरर या असिटेंट प्रोफेसर की नौकरी कर सकते हैं।

- अपना कोचिंग सेंटर शुरू कर सकते हैं। अब डिजिटल मार्केटिंग, स्टार्टअप भी विकल्प हैं, तो कुछ किसी सेंटर में फैकल्टी के तौर पर काम करने लगते हैं। चूंकि, उनके पास अनुभव है, तो आंसर राइटिंग चेक करना, लिखने का तरीका बताना या सोशल मीडिया के दौर में इन्फ्लुएंसर के तौर पर जुड़ना भी विकल्प है।

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वरिष्ठ करिअर काउंसलर जितिन चावला की राय

अगर कोई उम्मीदवार यूपीएससी क्लियर नहीं कर पाता है, तब भी इस दौरान विकसित हुई समझ, अनुशासन और समस्याएं सुलझाने की क्षमता उसे पब्लिक पॉलिसी, एनजीओ, रिसर्च, कंटेंट और कॉरपोरेट जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मजबूत आधार देती है। कई अभ्यर्थी मैनेजमेंट, ऑपरेशंस, एचआर स्ट्रैटेजी और रिसर्च जैसे कॉरपोरेट भूमिकाओं में भी जाते हैं, जहां संगठित और तार्किक सोच को महत्व दिया जाता है। स्टेट सिविल सर्विसेज, आरबीआई, सेबी, नाबार्ड, एसएससी और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं में शामिल होना भी एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि सिलेबस के ओवरलैप का सीधा फायदा मिलता है। इसे अपनी असफलता नहीं, बल्कि नई दिशा की ओर बढ़ने का मौका समझें।

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