IIT : JEE में टॉप रैंक पाने की मारामारी होगी कम, एक दूसरे के कैंपस में जाकर पढ़ सकेंगे आईआईटी छात्र
देश के 23 आईआईटी संस्थानों के छात्र अब एक दूसरे के कैंपसों में पढ़ने जा सकेंगे। इससे जेईई में हायर रैंक पाकर टॉप आईआईटी में सीट पक्की करने की अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा कुछ हद तक कम होगी। सीमाएं टूटने से छात्रों को भी नया सीखने को मिलेगा।

देश के 23 आईआईटी संस्थान पहली बार एक दूसरे के छात्रों के लिए अपने क्लासरूम के दरवाजे खोलने जा रहे हैं। इसी एकेडमिक वर्ष से एक आईआईटी के छात्र दूसरी आईआईटी कैंपस में जाकर क्लास अटेंड कर सकेंगे। अब स्टूडेंट्स को दूसरे आईआईटी कैंपस में कुछ खास कोर्स करने और अपने पेरेंट इंस्टिट्यूट (जहां उन्होंने दाखिला लिया है) से दूर एक टर्म बिताने की भी इजाजत होगी। यह आईआईटी एजुकेशन सिस्टम में पहला औपचारिक शैक्षणिक आदान-प्रदान होगा। बताया जा रहा है कि आईआईटी संस्थानों की इस अहम कदम से जेईई में हायर रैंक पाने की मारामारी कम होगी। अभी तक रैंक न सिर्फ आईआईटी में दाखिला तय करती है बल्कि उसके बाद कम से कम चार सालों तक छात्र के शैक्षणिक अनुभव की सीमाएं भी तय कर देती है। आईआईटी की नई पहल से ये बाधाएं और सीमाएं टूटेंगी।
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर पद्म श्री वी कामकोटी ने कहा, 'हम अलग-अलग आईआईटी में कई कोर्सेज के लिए करिकुलम की मैपिंग कर रहे हैं। एक बार यह मैच हो जाने के बाद आईआईटी मद्रास के हमारे स्टूडेंट दूसरे आईआईटी में एक टर्म बिता सकते हैं या आईआईटी कानपुर या दिल्ली या इंदौर का स्टूडेंट मद्रास कैंपस में आकर कुछ कोर्स पढ़ सकता है और क्रेडिट हासिल कर सकता है। स्टूडेंट के इन क्रेडिट को उनके मूल संस्थान में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।'
सालों से दुनिया भर की यूनिवर्सिटी जॉइंट डिग्री और शेयर्ड क्लासरूम के जरिए मिलकर काम कर रही हैं। हालांकि भारत के सबसे जाने-माने तकनकी संस्थानों ने इस ट्रेंड को उस तरह से नहीं देखा है।
आईआईटी में आवाजाही को आसान बनाने के लिए स्ट्रक्चर्ड सिस्टम
आईआईटी मद्रास के डीन (एकेडमिक्स) प्रोफेसर प्रताप हरिदास ने कहा, 'हाल ही में आईआईटी मद्रास ने सभी आईआईटी के एकेडमिक डीन की मीटिंग आयोजित की थी। कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें से एक जरूरी टॉपिक आईआईटी में क्रेडिट ट्रांसफर और स्टूडेंट की आवाजाही था। आज तक बड़े पैमाने पर ट्रांसफर की इजाजत न मिलने का एक बड़ा कारण रैंक हुआ करती थी। स्टूडेंट्स को शुरू में रैंक के आधार पर सीटें दी जाती है और मनमाने ट्रांसफर की इजाजत देने से उस फ्रेमवर्क का उल्लंघन हो सकता है।' हालांकि आईआईटी काउंसिल में स्टूडेंट के आने-जाने की इजाजत देने के प्लान पर चर्चा हुई और अलग-अलग आईआईटी की सीनेट से मंजूरी लेने का फैसला लिया गया।
आईआईटी काउंसिल ने पिछले साल अगस्त में अपनी मीटिंग में यह सिफारिश दी थी। इसने सभी आईआईटी संस्थानों में 5 फीसदी अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट एक्सचेंज का टारगेट रखा, ताकि दूसरे आईआईटी में लिए गए कोर्स के लिए आसानी से क्रेडिट ट्रांसफर हो सके।'
आसानी से दूसरी जगह जा सकेंगे
इससे एक साथ चलने वाले कैंपस एक ऐसे नेटवर्क में बदल जाएंगे जिससे स्टूडेंट एक इंस्टिट्यूट के बीच आ-जा सकेंगे। प्रोफेसर हरिदास ने कहा, 'यह बात अब आम हो रही है कि स्टूडेंट इंटर्नशिप, ट्रेनिंग और दूसरे एकेडमिक या प्रोफेशनल कामों के लिए तेजी से एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं।' ऐसे मामलों में एक आईआईटी के स्टूडेंट को उसी समय दूसरे आईआईटी में कोर्स करने की इजाजत देना फायदेमंद होगा। इसलिए आईआईटी कैंपस के बीच सेमेस्टर-बेस्ड मोबिलिटी के लिए एक स्ट्रक्चर्ड मैकेनिज़्म बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जहां स्टूडेंट दूसरे आईआईटी में एक टर्म बिता सकते हैं, वहां क्रेडिट अर्जित कर सकते हैं, और उन क्रेडिट को अपने असल संस्थान में ट्रांसफर करवा सकते हैं।' ठीक वैसे ही जैसे अभी विदेशी यूनिवर्सिटी के साथ सेमेस्टर एक्सचेंज प्रोग्राम चलते हैं। प्रोफेसर हरिदास ने आगे कहा, 'शुरू में इसे सीमित तरीके से लागू किया जाएगा।'
हर आईआईटी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षमता के आधार पर यह तय करेगा कि वह किसी भी समय कितने विजिटिंग स्टूडेंट को खपा सकता है।
एक दूसरे की सुविधाओं और एक्सपर्ट का फायदा उठा सकेंगे छात्र
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक प्रोफेसर हरिदास ने कहा कि इससे इंटर्नशिप में भी आसानी हो सकती है और स्टूडेंट्स को किसी खास IIT में किसी खास सब्जेक्ट एक्सपर्ट द्वारा पढ़ाए जाने वाले इलेक्टिव्स के लिए ट्रांसफर करने की सुविधा मिल सकती है। उन्होंने आगे कहा, 'पहले हमारे पास मई से जुलाई तक सिर्फ गर्मियों की इंटर्नशिप होती थी। लेकिन कई लोगों को यह मुश्किल लगता था। इसलिए हमने अपने करिकुलम में इसे इस तरह से अरेंज किया है कि छठे सेमेस्टर में स्टूडेंट्स के पास सिर्फ इलेक्टिव्स हों… चार इलेक्टिव्स हैं। स्टूडेंट्स के पास अपनी क्रेडिट जरूरतों में इतनी जगह होती है कि वे उन चार इलेक्टिव्स को पिछले या अगले सेमेस्टर में शिफ्ट कर सकें, जिससे उनका पूरा छठा सेमेस्टर इंटर्नशिप के लिए खाली रहे। अगर हम ट्रांसफर की सुविधा देते हैं, तो वे उन इलेक्टिव्स को किसी दूसरे आईआईटी में कर सकते हैं, और उन्हें इसे दूसरे सेमेस्टर के लिए आगे नहीं बढ़ाना पड़ेगा। हो सकता है कि किसी दूसरे IIT में ऐसे इलेक्टिव्स हों जो हमारे पास न हों, और हो सकता है कि हमारे पास कुछ ऐसा हो जो दूसरे IIT में न हो। हर IIT में इलेक्टिव एरिया का स्पेशलिस्ट मौजूद नहीं हो सकता है। हमें ऐसे स्टूडेंट्स मिलते हैं… जो हर कोर्स की डिटेल्स देखते हैं और बहुत सोच-समझकर फैसला करते हैं कि वे कोई कोर्स क्यों कर रहे हैं या क्यों नहीं कर रहे हैं। ऐसे स्टूडेंट्स के लिए इस तरह की (ट्रांसफर) सुविधा काम की है।'
उन्होंने कहा कि इससे स्टूडेंट्स स्टार्ट-अप्स जैसी दूसरी एक्टिविटीज भी कर सकते हैं। उनकी पढ़ाई पर भी असर नहीं पड़ेगा।




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